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चायनीज झालरों की चमक गुम
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
Updated Wed, 26 Oct 2016 11:53 PM IST
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मिट्टी के दीये खरीदते लोग
- फोटो : अमर उजाला
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दीपोत्सव पर्व पर मिट्टी से बने लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों की पूजा कर मिट्टी के दीयों से घर को रोशन करना पुरानी परंपरा रही है। दीपावली में मिट्टी के दिये से दीपदान की परंपरा खत्म सी होती जा रही है। चाइनीज लाइटों और चाइनीज आइटमों के बहिष्कार के अभियान के बाद कुम्हारों के घरों की रोशनी भी बढ़ सी गई है।
आधुनिकता ने कुम्हारों के घरों की रोशनी छीन सी ली है। उनका रोजगार कम होता जा रहा है। समय के साथ आए बदलाव के तहत कैंडल व विद्युत झालरों के बढ़ते उपयोग ने उनकी आय के इस साधन पर ग्रहण लगा दिया है। हांलाकि चायनीज आइटम का क्रेज कम होने के बाद स्वदेशी निर्मित आइटमों की मांग बढ़ी है। इससे कुम्हारों की उम्मीदें भी रोशन होने लगी हैं।
पर्व पर आधुनिकता के हावी होने के बावजूद बाजार में आज भी मिट्टी की कला जीवित है। पुरानी परंपरा सहजने के कद्रदान आज भी मिट्टी के दीयों से दीपदान करते हैं यही कारण है कि पर्व से कई दिन पूर्व से लेकर पर्व की रात तक जारी रहने वाली खरीद फरोख्त से साल में एक बार ही सही पर कुम्हारों के चेहरे रोशन हो जाते हैं।
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डिजाइनर दीयों की भरमार
बाजार में साधारण दीये के अलावा नक्काशीदार दीये भी मौजूद हैं। डिजाइनदार दीयों के साइज के अनुसार अलग-अलग रेट है। लेकिन इन दीयों की खूबसूरती देखते ही बनती है। सबसे छोटा डिजाइनदार दीया तीन रुपये से पांच रुपये तक है। दीये के साइज बढ़ने के अनुपात में उनका रेट बढ़ता जाता है। इस बार बाजार में मिट्टी के दीयों की भरमार है।
बाजार से गुम होती जा ही हैं चायनीज झालरें
दीपावली का पर्व आते ही चाइनीज झालराें की दुकानाें पर झिलमिलाहट दिखने लगी है। इस बार दीपावली में स्वदेश निर्मित रोप लाइट, फूलबत्ती, दीपक लाइट, पाइप लाइट, मिर्ची लाइट झालर, एलईडीझालर, चटाई झालर, शोदार झालरशहर समेत विभिन्न प्रकार की झालरें व लाइटें लोगों की पसंद बनी हैं। इलेक्ट्रिक एलईडी बोर्ड में स्वागतम्, शुभ-लाभ, ओम, लक्ष्मी-गणेश व स्वास्तिक के आकार की लाइटें आकर्षण का केंद्र बनी हैं। हालांकि कई दुकानों पर चायनीज झालरें भी बिक्री के लिए लगी हैं।
स्वदेशी झालरों से चायनीज झालरे करीब तीस प्रतिशत सस्ती हैं। लेकिन अधिक रुझान स्वदेशी निर्मित झालरों पर ही है। सोशल मीडिया पर चाइनीज लाइटों व आइटमों का बहिष्कार अभियान के बाद बाजार में स्वेदशी झालरों व लाइटों से दुकानें सजी हैं। जनपद में कई बार चाइनीज आइटमों की होली भी जलाई जा चुकी है। इस अभियान के दौरान समाजसेवियों व व्यापारियों ने दीपों से घर रोशन करने का आह्वान किया था। इसका असर भी दिखाई दे रहा है।
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आधुनिकता ने कुम्हारों के घरों की रोशनी छीन सी ली है। उनका रोजगार कम होता जा रहा है। समय के साथ आए बदलाव के तहत कैंडल व विद्युत झालरों के बढ़ते उपयोग ने उनकी आय के इस साधन पर ग्रहण लगा दिया है। हांलाकि चायनीज आइटम का क्रेज कम होने के बाद स्वदेशी निर्मित आइटमों की मांग बढ़ी है। इससे कुम्हारों की उम्मीदें भी रोशन होने लगी हैं।
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पर्व पर आधुनिकता के हावी होने के बावजूद बाजार में आज भी मिट्टी की कला जीवित है। पुरानी परंपरा सहजने के कद्रदान आज भी मिट्टी के दीयों से दीपदान करते हैं यही कारण है कि पर्व से कई दिन पूर्व से लेकर पर्व की रात तक जारी रहने वाली खरीद फरोख्त से साल में एक बार ही सही पर कुम्हारों के चेहरे रोशन हो जाते हैं।
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डिजाइनर दीयों की भरमार
बाजार में साधारण दीये के अलावा नक्काशीदार दीये भी मौजूद हैं। डिजाइनदार दीयों के साइज के अनुसार अलग-अलग रेट है। लेकिन इन दीयों की खूबसूरती देखते ही बनती है। सबसे छोटा डिजाइनदार दीया तीन रुपये से पांच रुपये तक है। दीये के साइज बढ़ने के अनुपात में उनका रेट बढ़ता जाता है। इस बार बाजार में मिट्टी के दीयों की भरमार है।
बाजार से गुम होती जा ही हैं चायनीज झालरें
दीपावली का पर्व आते ही चाइनीज झालराें की दुकानाें पर झिलमिलाहट दिखने लगी है। इस बार दीपावली में स्वदेश निर्मित रोप लाइट, फूलबत्ती, दीपक लाइट, पाइप लाइट, मिर्ची लाइट झालर, एलईडीझालर, चटाई झालर, शोदार झालरशहर समेत विभिन्न प्रकार की झालरें व लाइटें लोगों की पसंद बनी हैं। इलेक्ट्रिक एलईडी बोर्ड में स्वागतम्, शुभ-लाभ, ओम, लक्ष्मी-गणेश व स्वास्तिक के आकार की लाइटें आकर्षण का केंद्र बनी हैं। हालांकि कई दुकानों पर चायनीज झालरें भी बिक्री के लिए लगी हैं।
स्वदेशी झालरों से चायनीज झालरे करीब तीस प्रतिशत सस्ती हैं। लेकिन अधिक रुझान स्वदेशी निर्मित झालरों पर ही है। सोशल मीडिया पर चाइनीज लाइटों व आइटमों का बहिष्कार अभियान के बाद बाजार में स्वेदशी झालरों व लाइटों से दुकानें सजी हैं। जनपद में कई बार चाइनीज आइटमों की होली भी जलाई जा चुकी है। इस अभियान के दौरान समाजसेवियों व व्यापारियों ने दीपों से घर रोशन करने का आह्वान किया था। इसका असर भी दिखाई दे रहा है।