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Barabanki News: मध्य प्रदेश में मिला था शव, पिता बोले बेटे की हत्या हुई
Sun, 19 Apr 2026 12:34 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sun, 19 Apr 2026 12:34 AM IST
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बाराबंकी। मसौली क्षेत्र के राजापुर गांव निवासी युवक अरुण कुमार (31) की मध्य प्रदेश के कटनी में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला अब उलझता जा रहा है। मृतक के पिता एसपी से शिकायत कर आरोप लगाया कि उनके बेटे का मोबाइल हैक कर वीडियो वायरल किया गया और बाद में उसकी हत्या कर हादसे का रूप दे दिया गया।
राजापुर गांव निवासी मृतक के पिता पूर्व प्रधान जय प्रकाश के मुताबिक अरुण मध्य प्रदेश के कटनी में रेलवे से जुड़े कार्य में लगा थे। जहां वह मथुरा निवासी ठेकेदार जगदीश गुप्ता और राजस्थान के सुपरवाइजर जगमोहन सेन के अधीन काम करते थे।
जयप्रकाश का आरोप है कि सुपरवाइजर जगमोहन सेन रेलवे के पत्थरों की ढुलाई में बड़े स्तर पर घोटाला कर रहा था। इसी घोटाले की जानकारी अरुण को हो गई थी, जिसके चलते उसे निशाना बनाया गया। उन्होंने बताया कि 31 मार्च को जगमोहन ने फोन कर सूचना दी कि अरुण की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और उसे घर भेजा जा रहा है।
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पिता का कहना है कि उन्होंने बेटे को अकेले भेजने का विरोध करते हुए खुद लेने आने की बात कही थी, लेकिन सुपरवाइजर ने उनकी बात को नजरअंदाज कर दिया। उसी रात अरुण से हुई आखिरी बातचीत में उसने घबराहट भरे स्वर में बताया था कि उसका मोबाइल हैक हो गया है और उसके वीडियो बनाए जा रहे हैं। बातचीत के दौरान वह बेहद डरा और असामान्य स्थिति में लग रहा था।
अगले दिन मामला और रहस्यमय हो गया। परिवार को जानकारी मिली कि अरुण का मोबाइल लोकेशन लखनऊ में ट्रेस हो रहा है, जबकि कटनी से फोन आया कि उसका शव रेलवे ट्रैक के किनारे पड़ा मिला है। इस विरोधाभास ने परिवार के संदेह को और गहरा कर दिया।
परिजन कटनी पहुंचे और शव को बाराबंकी लाकर अंतिम संस्कार किया गया। जयप्रकाश का आरोप है कि ठेकेदार, सुपरवाइजर और अन्य सहकर्मियों ने मिलकर घोटाले को छिपाने के लिए उनके बेटे की हत्या की और इसे हादसा दिखाने की कोशिश की। घटना के बाद मृतक की पत्नी बदहवास है और पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजन मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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राजापुर गांव निवासी मृतक के पिता पूर्व प्रधान जय प्रकाश के मुताबिक अरुण मध्य प्रदेश के कटनी में रेलवे से जुड़े कार्य में लगा थे। जहां वह मथुरा निवासी ठेकेदार जगदीश गुप्ता और राजस्थान के सुपरवाइजर जगमोहन सेन के अधीन काम करते थे।
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जयप्रकाश का आरोप है कि सुपरवाइजर जगमोहन सेन रेलवे के पत्थरों की ढुलाई में बड़े स्तर पर घोटाला कर रहा था। इसी घोटाले की जानकारी अरुण को हो गई थी, जिसके चलते उसे निशाना बनाया गया। उन्होंने बताया कि 31 मार्च को जगमोहन ने फोन कर सूचना दी कि अरुण की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और उसे घर भेजा जा रहा है।
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पिता का कहना है कि उन्होंने बेटे को अकेले भेजने का विरोध करते हुए खुद लेने आने की बात कही थी, लेकिन सुपरवाइजर ने उनकी बात को नजरअंदाज कर दिया। उसी रात अरुण से हुई आखिरी बातचीत में उसने घबराहट भरे स्वर में बताया था कि उसका मोबाइल हैक हो गया है और उसके वीडियो बनाए जा रहे हैं। बातचीत के दौरान वह बेहद डरा और असामान्य स्थिति में लग रहा था।
अगले दिन मामला और रहस्यमय हो गया। परिवार को जानकारी मिली कि अरुण का मोबाइल लोकेशन लखनऊ में ट्रेस हो रहा है, जबकि कटनी से फोन आया कि उसका शव रेलवे ट्रैक के किनारे पड़ा मिला है। इस विरोधाभास ने परिवार के संदेह को और गहरा कर दिया।
परिजन कटनी पहुंचे और शव को बाराबंकी लाकर अंतिम संस्कार किया गया। जयप्रकाश का आरोप है कि ठेकेदार, सुपरवाइजर और अन्य सहकर्मियों ने मिलकर घोटाले को छिपाने के लिए उनके बेटे की हत्या की और इसे हादसा दिखाने की कोशिश की। घटना के बाद मृतक की पत्नी बदहवास है और पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजन मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।