फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Barabanki News ›   Shedding tears over the plight of freedom fighters memorial

बदहाली पर आंसू बहा रहा स्वतंत्रता सेनानी का स्मारक

Sun, 14 Aug 2016 11:41 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी Updated Sun, 14 Aug 2016 11:41 PM IST
विज्ञापन
Shedding tears over the plight of freedom fighters memorial
स्व. रफी अहमद किदवई - फोटो : अमर उजाला
देश के लिए जंग-ए-आजादी में संघर्ष करने वाले स्व. रफी अहमद किदवई अब अतीत की स्मृतियों में खो गए हैं। बाराबंकी के इस सपूत की स्मृतियां को संजोने के प्रयास प्रशासन की ओर से नहीं किए गए। मसौली कस्बे में रफी साहब की याद में संगमरमर से बनाया गया स्मारक आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।
विज्ञापन


जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर मसौली कस्बा में 18 फरवरी 1894 में एक मध्यम वर्गीय जमीदार इम्तियाज अली के घर जन्मे रफी अहमद शिक्षण के दौरान महात्मा गांधी के आह्वान पर जंग-ए-आजादी में कूद पड़े।
विज्ञापन


अपनी असाधारण संगठन शक्ति के चलते वह शीघ्र ही आजादी के मतवालों की अग्रिम कतार में पहुंच गए। रफी साहब आजादी की लड़ाई में कई बार गिरफ्तार हुए और युवावस्था के 10 वर्ष से अधिक का समय जेेल में काटा। कारावास की सजा ही नहीं काटी बल्कि देश की आजादी के  संघर्ष में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


रफी अहमद किदवई उत्तर प्रदेश के राजस्व गृह और जेल विभागों के प्रभारी मंत्री पदों पर आसीन रहे। केंद्रीय संचार मंत्री के रूप में उन्होंने संचार व्यवस्था का ढांचा तैयार करके देश को दिया जो एक बड़ी उपलब्धि थी।

1952 में कें द्रीय खाद्यमंत्री भी रहे। देश का यह सच्चा सपूत 24 अक्टूबर 1954 को सदा के लिए सो गया। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. रफी अहमद किदवई की मृत्यु के बाद उनकी स्मृतियों को संजोए रखने के लिए जवाहर लाल नेहरू का सपना और प्रयास प्रशासन की उदासीनता के कारण बिखर सा गया है। उनकी स्मृतियां भी धुंधली होती जा रही हैं। 

नेहरू जी के प्रयासों पर फिरा पानी
25 अक्टूबर 1954 को कस्बा मसौली में रफी अहमद किदवई को सुपुर्द-ए-खाक किया गया तो इस मौके पर मौजूद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने उनका मकबरा व बाग बगीचा बनवाए जाने की बात कही थी।


रफी साहब को जहां पर सुपुर्दे खाक किया गया वहीं पर संगमरमर का खूबसूरत मकबरा बनवा कर फव्वारे लगाए गए तथा बगीचा विकसित किया गया। मौजूदा समय में चारों तरफ लगाए गए फव्वारे जर्जर हो गए हैं। वहीं परिसर का बगीचा अपना अस्तित्व खो चुका है। मजार के आसपास लगी लाइटें टूट चुकी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed