{"_id":"fb22a21ef1fd5fb2cab77190ca632f87","slug":"scientists-of-netherlands-saw-the-cultivation-of-potatoes-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नीदरलैंड के वैज्ञानिक ने देखी आलू की खेती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नीदरलैंड के वैज्ञानिक ने देखी आलू की खेती
बाराबंकी/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 23 Jan 2016 12:05 AM IST
विज्ञापन
नीदरलैंड के वैज्ञानिक शुक्रवार को दौलतपुर पहुंच आलू की खेती देखी और प्रगतिशील किसान द्वारा अपनाई जा रही तकनीक की खूब सराहना की। वैज्ञानिक ने कहा कि यदि सभी किसान इसी प्रकार की तकनीक का प्रयोग करें तो बेहतर पैदावार हासिल कर सकते हैं।
नीदरलैंड पोटैटो ब्रीडिंग सेंटर के वैज्ञानिक फ्रिक्स वर्कमैन शुक्रवार को संयुक्त निदेशक उद्यान धर्मेन्द्र पांडेय और जिला उद्यान अधिकारी जयकरण सिंह के साथ जैदपुर क्षेत्र के दौलतपुर गांव पहुंचे। यहां पर उन्होंने प्रगतिशील किसान रामसरन के फार्म पर आलू की खेती देखी। रामसरन ने बताया कि पुखराज प्रजाति की आलू की बोआई की है। इस प्रजाति का उत्पादन काफी अच्छा होता है और करीब एक एकड़ में तीन सौ क्विंटल आलू पैदा होगा। वैज्ञानिक ने आश्चर्य जताते हुए पूछा, कैसे?
जिस पर प्रगतिशील किसान ने बताया कि एक एकड़ में 32 हजार पौधे हैं आलू का बीज 9 इंच की गहराई पर बोया गया है। पौधे से पौधे के बीच की दूरी 28 इंच हैं। जिस पर नीदरलैंड के वैज्ञानिक ने आलू के एक पौधे को खोद कर देखा तो पाया कि करीब एक किलो आलू एक पौधे के नीचे निकला। जिस उन्होंने रामसरन की तकनीक की सराहना करते हुए कहा कि यदि अन्य किसान भी इसी तरह से तकनीक का प्रयोग करें तो वह बेहतर उत्पादन पा सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
नीदरलैंड पोटैटो ब्रीडिंग सेंटर के वैज्ञानिक फ्रिक्स वर्कमैन शुक्रवार को संयुक्त निदेशक उद्यान धर्मेन्द्र पांडेय और जिला उद्यान अधिकारी जयकरण सिंह के साथ जैदपुर क्षेत्र के दौलतपुर गांव पहुंचे। यहां पर उन्होंने प्रगतिशील किसान रामसरन के फार्म पर आलू की खेती देखी। रामसरन ने बताया कि पुखराज प्रजाति की आलू की बोआई की है। इस प्रजाति का उत्पादन काफी अच्छा होता है और करीब एक एकड़ में तीन सौ क्विंटल आलू पैदा होगा। वैज्ञानिक ने आश्चर्य जताते हुए पूछा, कैसे?
विज्ञापन
जिस पर प्रगतिशील किसान ने बताया कि एक एकड़ में 32 हजार पौधे हैं आलू का बीज 9 इंच की गहराई पर बोया गया है। पौधे से पौधे के बीच की दूरी 28 इंच हैं। जिस पर नीदरलैंड के वैज्ञानिक ने आलू के एक पौधे को खोद कर देखा तो पाया कि करीब एक किलो आलू एक पौधे के नीचे निकला। जिस उन्होंने रामसरन की तकनीक की सराहना करते हुए कहा कि यदि अन्य किसान भी इसी तरह से तकनीक का प्रयोग करें तो वह बेहतर उत्पादन पा सकते हैं।
विज्ञापन