{"_id":"6a95cf8dd197e1c8050be19f","slug":"school-landscape-transformed-cm-to-present-state-teacher-awards-now-barabanki-news-c-315-1-brb1038-178325-2026-09-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Barabanki News: बदला स्कूल का नक्शा, अब सीएम देंगे राज्य शिक्षक पुरस्कार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Barabanki News: बदला स्कूल का नक्शा, अब सीएम देंगे राज्य शिक्षक पुरस्कार
Tue, 01 Sep 2026 12:31 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Tue, 01 Sep 2026 12:31 AM IST
विज्ञापन
बाराबंकी। जब इरादे मजबूत हों और बच्चों को गढ़ने का जुनून हो तो साधारण सा प्राथमिक विद्यालय भी मिसाल बन जाता है। जिले के त्रिवेदीगंज ब्लॉक स्थित प्राथमिक विद्यालय बहुता के प्रधानाध्यापक व एसआरजी राहुल शुक्ला ने यही कर दिखाया है। राज्य स्तरीय चयन समिति ने उनका चयन प्रतिष्ठित राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए किया है। आगामी पांच सितंबर को शिक्षक दिवस पर लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उन्हें इस सम्मान से नवाजेंगे।
वर्ष 2009 में दरियाबाद के पूरे मिश्री स्कूल से अपनी सेवा शुरू करने वाले राहुल शुक्ला ने 17 वर्षों के कार्यकाल में शिक्षा व्यवस्था को सरल और रोचक बनाने के लिए 14 प्रमुख नवाचार किए। प्रार्थना सभा को ज्ञान सभा और समापन सभा को विचार सभा में बदलने का उनका विचार इतना सराहा गया कि डायट की पत्रिका में भी इसे स्थान मिला।गणित को पहेली से समझाना और कविता-कहानी के जरिये अंग्रेजी सिखाना उनकी खास शिक्षण शैली रही है। इसके अलावा, बेसिक शिक्षा विभाग की 15 से अधिक पाठ्यपुस्तकों, कार्य पुस्तिकाओं और प्रशिक्षण हस्त पुस्तिकाओं के निर्माण में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
नवाचार जिसने पूरे प्रदेश को राह दिखाई
कोविड काल के बाद वर्ष 2021 में राहुल शुक्ला ने शिक्षक संकुल बैठकों का एक नया ढांचा तैयार किया। अमूमन आगे-पीछे बैठने से शिक्षकों को संवाद में कठिनाई होती थी। उन्होंने शिक्षकों को गोल घेरे में बैठाकर बीच से सीधे संवाद का तरीका निकाला। यह मॉडल तत्कालीन महानिदेशक स्कूली शिक्षा विजय किरन आनंद को इतना पसंद आया कि उन्होंने प्रेजेंटेशन कराकर इसे पूरे उत्तर प्रदेश में लागू करा दिया।
विज्ञापन
सजाया विद्यालय, बढ़ा नामांकन
राहुल शुक्ला ने जनसहयोग (एसआर फंड) के जरिये विद्यालय की सूरत बदल दी। उन्होंने बच्चों के फर्श पर बैठने की मजबूरी खत्म कर डेस्क-बेंच, अलग समृद्ध पुस्तकालय कक्ष, स्मार्ट क्लास और कंप्यूटर की व्यवस्था कराई। उनके बनाए भाषा, गणित और अंग्रेजी के टीएलएम (शिक्षण सामग्री) प्रदर्शनी में सराहे जा चुके हैं। इसी गुणवत्तापूर्ण माहौल का नतीजा है कि बहुता विद्यालय में नामांकन लगातार बढ़ा है।
विज्ञापन
वर्ष 2009 में दरियाबाद के पूरे मिश्री स्कूल से अपनी सेवा शुरू करने वाले राहुल शुक्ला ने 17 वर्षों के कार्यकाल में शिक्षा व्यवस्था को सरल और रोचक बनाने के लिए 14 प्रमुख नवाचार किए। प्रार्थना सभा को ज्ञान सभा और समापन सभा को विचार सभा में बदलने का उनका विचार इतना सराहा गया कि डायट की पत्रिका में भी इसे स्थान मिला।गणित को पहेली से समझाना और कविता-कहानी के जरिये अंग्रेजी सिखाना उनकी खास शिक्षण शैली रही है। इसके अलावा, बेसिक शिक्षा विभाग की 15 से अधिक पाठ्यपुस्तकों, कार्य पुस्तिकाओं और प्रशिक्षण हस्त पुस्तिकाओं के निर्माण में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
विज्ञापन
नवाचार जिसने पूरे प्रदेश को राह दिखाई
कोविड काल के बाद वर्ष 2021 में राहुल शुक्ला ने शिक्षक संकुल बैठकों का एक नया ढांचा तैयार किया। अमूमन आगे-पीछे बैठने से शिक्षकों को संवाद में कठिनाई होती थी। उन्होंने शिक्षकों को गोल घेरे में बैठाकर बीच से सीधे संवाद का तरीका निकाला। यह मॉडल तत्कालीन महानिदेशक स्कूली शिक्षा विजय किरन आनंद को इतना पसंद आया कि उन्होंने प्रेजेंटेशन कराकर इसे पूरे उत्तर प्रदेश में लागू करा दिया।
विज्ञापन
सजाया विद्यालय, बढ़ा नामांकन
राहुल शुक्ला ने जनसहयोग (एसआर फंड) के जरिये विद्यालय की सूरत बदल दी। उन्होंने बच्चों के फर्श पर बैठने की मजबूरी खत्म कर डेस्क-बेंच, अलग समृद्ध पुस्तकालय कक्ष, स्मार्ट क्लास और कंप्यूटर की व्यवस्था कराई। उनके बनाए भाषा, गणित और अंग्रेजी के टीएलएम (शिक्षण सामग्री) प्रदर्शनी में सराहे जा चुके हैं। इसी गुणवत्तापूर्ण माहौल का नतीजा है कि बहुता विद्यालय में नामांकन लगातार बढ़ा है।