{"_id":"62c3397a77be7a46f83982fc","slug":"saryu-river-barabanki-news-lko638160290","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरयू की धारा बदलने के लिए 11 करोड़ पानी में बहे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरयू की धारा बदलने के लिए 11 करोड़ पानी में बहे
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोटवाधाम (बाराबंकी)। तराई के लोगों को बाढ़ से बचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर ड्रेजिंग का कार्य कराया गया। नदी को मूल स्वरूप में लाने और धारा को मोड़ने के लिए सिल्ट हटाने का कार्य किया गया। इससे निकलने वाली बालू को नीलाम किया जाना था लेकिन विभागीय लापरवाही का आलम ये रहा है कि ड्रेजिंग से निकली ज्यादातर बालू नदी की धारा में ही बह गई। इससे ड्रेजिंग के नाम पर करोड़ों रुपये तो खर्च हो गया परंतु तराई में बाढ़ का खतरा बरकरार है।
सिरौलीगौसपुर तहसील में सरयू नदी में तेलवारी और कोरियनपुरवा के निकट ड्रेजिंग का कार्य कराया गया। इसका मुख्य उद्देश्य तराई की जनता को बाढ़ से बचाना है। सरयू नदी की धारा को सीधा कर दिया जाए जिससे पानी का दबाव आबादी की तरफ न आए। इस पर करीब 11 करोड़ रुपया खर्च किया गया। दावा किया जाता है कि ड्रेजिंग का कार्य पूरा कर लिया गया है।
इससे निकलने वाली सिल्ट में से करीब एक लाट को नीलाम करा दिया गया और चार लाट की नीलामी अभी बाकी है। वहीं नदी का जलस्तर फिर से बढ़ने लगा है। इसके चलते ड्रेजिंग कार्य से निकाली गई बालू नदी की धारा में ही समा गई है।
विज्ञापन
लापरवाही का आलम ये है कि ड्रेजिंग का कार्य काफी देर से शुरू किया गया। इसकी वजह से जो काम समय से पूरा हो जाना चाहिए था वह निर्धारित समय पर पूरा नहीं किया जा सका। नदी का जलस्तर बढ़ने से निकाली गई सिल्ट को सही स्थान पर भी नहीं पहुंचाया जा सका और वह नदी की धारा के साथ ही बह रही है।
बिना ऑफिस होती कार्य की निगरानी
ड्रेजिंग का कार्य बाढ़ खंड के बजाए दूसरे डिवीजन द्वारा कराया जाता है। इसका मुख्यालय कानपुर में है। जिला मुख्यालय पर कोई ऑफिस और कैंप कार्यालय नहीं हैं। विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि उनका काम फील्ड का है इसलिए वह पूरा दिन फील्ड में ही रहकर कराए जा रहे कार्यों की निगरानी करते हैं। इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि तराई के ड्रेजिंग की आड़ में किस तरह से कार्य कराया गया होगा।
कोरियनपुरवा और तेलवारी के पास करीब 11 करोड़ से ड्रेजिंग का कार्य कराया गया है। यह कार्य काफी देरी से शुरू हुआ। इसके बाद भी पूरा कर लिया गया। ड्रेजिंग से करीब चार लाट बालू निकली है। इसमें से एक लाट नीलाम हो चुकी है। जो बची है उसके नीलामी की प्रक्रिया चल रही है।
-शशांक कुमार, सहायक अभियंता, मैकेनिकल विंग
विज्ञापन
सिरौलीगौसपुर तहसील में सरयू नदी में तेलवारी और कोरियनपुरवा के निकट ड्रेजिंग का कार्य कराया गया। इसका मुख्य उद्देश्य तराई की जनता को बाढ़ से बचाना है। सरयू नदी की धारा को सीधा कर दिया जाए जिससे पानी का दबाव आबादी की तरफ न आए। इस पर करीब 11 करोड़ रुपया खर्च किया गया। दावा किया जाता है कि ड्रेजिंग का कार्य पूरा कर लिया गया है।
विज्ञापन
इससे निकलने वाली सिल्ट में से करीब एक लाट को नीलाम करा दिया गया और चार लाट की नीलामी अभी बाकी है। वहीं नदी का जलस्तर फिर से बढ़ने लगा है। इसके चलते ड्रेजिंग कार्य से निकाली गई बालू नदी की धारा में ही समा गई है।
विज्ञापन
लापरवाही का आलम ये है कि ड्रेजिंग का कार्य काफी देर से शुरू किया गया। इसकी वजह से जो काम समय से पूरा हो जाना चाहिए था वह निर्धारित समय पर पूरा नहीं किया जा सका। नदी का जलस्तर बढ़ने से निकाली गई सिल्ट को सही स्थान पर भी नहीं पहुंचाया जा सका और वह नदी की धारा के साथ ही बह रही है।
बिना ऑफिस होती कार्य की निगरानी
ड्रेजिंग का कार्य बाढ़ खंड के बजाए दूसरे डिवीजन द्वारा कराया जाता है। इसका मुख्यालय कानपुर में है। जिला मुख्यालय पर कोई ऑफिस और कैंप कार्यालय नहीं हैं। विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि उनका काम फील्ड का है इसलिए वह पूरा दिन फील्ड में ही रहकर कराए जा रहे कार्यों की निगरानी करते हैं। इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि तराई के ड्रेजिंग की आड़ में किस तरह से कार्य कराया गया होगा।
कोरियनपुरवा और तेलवारी के पास करीब 11 करोड़ से ड्रेजिंग का कार्य कराया गया है। यह कार्य काफी देरी से शुरू हुआ। इसके बाद भी पूरा कर लिया गया। ड्रेजिंग से करीब चार लाट बालू निकली है। इसमें से एक लाट नीलाम हो चुकी है। जो बची है उसके नीलामी की प्रक्रिया चल रही है।
-शशांक कुमार, सहायक अभियंता, मैकेनिकल विंग