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Barabanki News: सरयू लाल निशान से 25 सेमी ऊपर, रास्ते डूबे
Mon, 07 Sep 2026 01:52 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Mon, 07 Sep 2026 01:52 AM IST
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सिरौलीगौसपुर के रेता गांव से पलायन कर सुरक्षित स्थानों पर जाते ग्रामीण। संवाद
सूरतगंज। बाहरी बैराजों से 3.75 लाख क्यूसेक पानी फिर छोड़े जाने से सरयू नदी शांत नहीं हो रही है। नदी खतरे के निशान से 25 सेमी ऊपर बह रही है, पानी लगातार गांवों की ओर बढ़ रहा है। नदी किनारे बसे करीब 30 गांवों के लोग सहमे हुए हैं। कहीं सड़क पर पानी बह रहा है तो कहीं घरों के पास पानी पहुंच चुका है। सैंकड़ों परिवार अपना सामान समेटकर सुरक्षित स्थानों की ओर निकल गए हैं।
रामनगर के केदारपुर गांव में नदी के किनारे का नजारा सबसे ज्यादा बेचैन करने वाला है। पानी गांव के आसपास फैल चुका है। नदी किनारे बसे परिवार अपने मकानों की ईंटें और जरूरी सामान निकालकर सुरक्षित जगहों पर ले जा रहे हैं। यहां मकानों कु नींव खुदने के बाद उसके निशान ही सारी कहानी बयां कर रहे हैं।
केदारीपुर गांव से बाहर निकलने वाली सड़क भी पानी में डूबी है। पैदल चलने वालों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। वहीं पड़ाेस के हेतमापुर की तरफ नदी तेजी से कटान कर रही है। दूरभाष केंद्र नदी के मुहाने के बेहद करीब पहुंच चुका है। इसके आगे आबादी है।
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बाढ़ खंड यहां बोरियां व बंबू कैरेट लगाकर कटान रोकने की जतन कर रहा है। सुंदरनगर गांव के आसपास भी पानी भरा है। रामनगर क्षेत्र के करीब आधा दर्जन गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। खेत और रास्ते पानी में समा चुके हैं। गांवों से बाहर निकलने वाले रास्ते भी कई जगह बंद हो गए हैं।
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पानी के बीच खड़े होकर प्रदर्शन... राहत किट की मांग
रामनगर के बेलहरी गांव के भारत, रामकिशोर, विमलेश, विद्यानाथ, नसीम, नवाब, रामविलास, माधुरी व सूरजभान ने बाढ़ के पानी में खड़े होकर प्रदर्शन कर आरोप लगाया कि उनको राहत किट नहीं मिली। बतनेरा पंचायत की प्रशासक नंदनी अवस्थी ने डीएम को पत्र लिखकर बताया है कि बांध के अंदर के सात गांव हर साल बाढ़ से प्रभावित होते हैं, रामनगर तहसील के चार गांव संदरनगर, कोड़री, ललपुरवा, बाबापुरवा में राशन किट का वितरण करीब 20 दिन पूर्व किया गया था। बाकी तीन गांव बलईपुर, बेलहरी बाढ़ से अधिक प्रभावित हैं, लेकिन किट नहीं वितरित हुई।
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खेती डूब गई, गांव पानी से घिरा... अब नाव से पलायन
सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र के माझा रायपुर, परसवाल और बेहटा गांव नदी के उस पार बसे हैं। जलस्तर बढ़ने के साथ इन गांवों में पानी पहुंच गया है। वहीं, नदी के इस पार गोबरहा, तेलवारी, कहरनपुरवा, सनावा, टेपरा, बबुरी घुटरू और बघौलीपुरवा समेत कई गांवों के किनारों तक बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। नदी किनारे बसे गांवों में किसानों की फसल का बड़ा हिस्सा पानी में डूब चुका है। रेता गांव के लोग रविवार को नाव से पलायन कर सुरक्षित स्थानों पर जाते दिखे।
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रामनगर के केदारपुर गांव में नदी के किनारे का नजारा सबसे ज्यादा बेचैन करने वाला है। पानी गांव के आसपास फैल चुका है। नदी किनारे बसे परिवार अपने मकानों की ईंटें और जरूरी सामान निकालकर सुरक्षित जगहों पर ले जा रहे हैं। यहां मकानों कु नींव खुदने के बाद उसके निशान ही सारी कहानी बयां कर रहे हैं।
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केदारीपुर गांव से बाहर निकलने वाली सड़क भी पानी में डूबी है। पैदल चलने वालों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। वहीं पड़ाेस के हेतमापुर की तरफ नदी तेजी से कटान कर रही है। दूरभाष केंद्र नदी के मुहाने के बेहद करीब पहुंच चुका है। इसके आगे आबादी है।
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बाढ़ खंड यहां बोरियां व बंबू कैरेट लगाकर कटान रोकने की जतन कर रहा है। सुंदरनगर गांव के आसपास भी पानी भरा है। रामनगर क्षेत्र के करीब आधा दर्जन गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। खेत और रास्ते पानी में समा चुके हैं। गांवों से बाहर निकलने वाले रास्ते भी कई जगह बंद हो गए हैं।
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पानी के बीच खड़े होकर प्रदर्शन... राहत किट की मांग
रामनगर के बेलहरी गांव के भारत, रामकिशोर, विमलेश, विद्यानाथ, नसीम, नवाब, रामविलास, माधुरी व सूरजभान ने बाढ़ के पानी में खड़े होकर प्रदर्शन कर आरोप लगाया कि उनको राहत किट नहीं मिली। बतनेरा पंचायत की प्रशासक नंदनी अवस्थी ने डीएम को पत्र लिखकर बताया है कि बांध के अंदर के सात गांव हर साल बाढ़ से प्रभावित होते हैं, रामनगर तहसील के चार गांव संदरनगर, कोड़री, ललपुरवा, बाबापुरवा में राशन किट का वितरण करीब 20 दिन पूर्व किया गया था। बाकी तीन गांव बलईपुर, बेलहरी बाढ़ से अधिक प्रभावित हैं, लेकिन किट नहीं वितरित हुई।
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खेती डूब गई, गांव पानी से घिरा... अब नाव से पलायन
सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र के माझा रायपुर, परसवाल और बेहटा गांव नदी के उस पार बसे हैं। जलस्तर बढ़ने के साथ इन गांवों में पानी पहुंच गया है। वहीं, नदी के इस पार गोबरहा, तेलवारी, कहरनपुरवा, सनावा, टेपरा, बबुरी घुटरू और बघौलीपुरवा समेत कई गांवों के किनारों तक बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। नदी किनारे बसे गांवों में किसानों की फसल का बड़ा हिस्सा पानी में डूब चुका है। रेता गांव के लोग रविवार को नाव से पलायन कर सुरक्षित स्थानों पर जाते दिखे।