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राइस मिलों की लिमिट पूरी, धान की उठान ठप
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बाराबंकी। शासन द्वारा निर्धारित की गई लिमिट के अनुरूप राइस मिलों ने धान की उठान कर ली है। जिसके कारण राइस मिल मालिक अब धान उठान नहीं कर रहे हैं। इससे क्रय केंद्रों पर खरीदा गया धान डंप होता जा रहा है और जगह के अभाव में जिले में किसी भी समय धान की खरीद बंद हो सकती है। वहीं उठाए गए धान से तैयार चावल एफसीआई को दिए जाने के बाद ही इस लिमिट को घटाया बढ़ाया जा सकता है।
जिले में इस वर्ष 64 केंद्रों पर धान की खरीद की जा रही है। इन केंद्रों के माध्यम से शुक्रवार को 35 हजार 185 एमटी धान की खरीद की जा चुकी है। इसके लिए 53 राइस मिलों को क्रय केंद्रों से संबद्ध किया गया है। इसमें से 24 हजार 675 एमटी धान की उठान राइस मिल मालिक कर चुके हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, शासन द्वारा निर्धारित की गई क्षमता के अनुरूप एसएस राइस मिल, आकाश इंडस्ट्रीज समेत कई मिलों ने धान की उठान क्रय केंद्रों से कर ली है।
अब जो धान संबद्ध राइस मिलों पर भेजा जा रहा है उसे विभागीय पोर्टल ले नहीं रहा जिसकी वजह से राइस मिल मालिक भेजे गए धान लदे ट्रकों को अनलोड नहीं कर रहे हैं। जिससे फतेहपुर, सफदरगंज समेत कई केंद्रों पर धान की उठान न होने से खरीद प्रभावित होने लगी है और जिले में किसी भी समय क्रय केंद्रों पर जगह न होने के कारण धान की खरीद बंद हो सकती है।
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जिससे इसका खामियाजा क्रय केंद्रों पर धान लेकर आने वाले किसानों को भुगतना पड़ सकता है। क्रय केंद्र प्रभारियों ने इस संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत भी करा दिया है यदि समस्या का जल्द ही कोई हल नहीं निकाला जाता है तो धान खरीद पर इसका विपरीत असर पड़ सकता है।
संबद्धता के बाद भी नहीं कर रहे एग्रीमेंट
धान की कुटाई के लिए क्रय केंद्रों से राइस मिलों को संबद्धता तो कर दिया गया है लेकिन इनके द्वारा एग्रीमेंट नहीं किया जा रहा है जिससे धान की उठान नहीं हो पा रही है। नवीन मंडी में विपणन शाखा के कांटा नंबर एक जेआर इंडस्ट्रीज, जायसवाल राइस और लक्ष्मी राइस मिल को संबद्ध किया गया है लेकिन लक्ष्मी राइस मिल द्वारा अभी तक एग्रीमेंट नहीं किया गया।
इसी प्रकार कांटा नंबर तीन से सीपी राइस मिल, जायसवाल राइस मिल, नन्हें राइस मिल और कुरैशी राइस मिल को संबद्ध किया गया लेकिन इनमें से सीपी और जायसवाल राइस मिल द्वारा अभी तक एग्रीमेंट नहीं कराया गया जिससे खरीदे गए धान की उठान नहीं हो रही है। ये चंद नाम बानगी भर है। कमोवेश यही स्थिति पूरे जिले की है।
एक धान खरीद केंद्र से कई-कई राइस मिलों को संबद्ध किया गया है। यदि एक राइस मिल की लिमिट पूरी हो गई है तो दूसरी राइस मिल को धान की उठान कराएं। धान की खरीद किसी भी कीमत पर प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इस संबंध में सभी केंद्र प्रभारियों को सख्त निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इसमें लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
-रमेश कुमार, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
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जिले में इस वर्ष 64 केंद्रों पर धान की खरीद की जा रही है। इन केंद्रों के माध्यम से शुक्रवार को 35 हजार 185 एमटी धान की खरीद की जा चुकी है। इसके लिए 53 राइस मिलों को क्रय केंद्रों से संबद्ध किया गया है। इसमें से 24 हजार 675 एमटी धान की उठान राइस मिल मालिक कर चुके हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, शासन द्वारा निर्धारित की गई क्षमता के अनुरूप एसएस राइस मिल, आकाश इंडस्ट्रीज समेत कई मिलों ने धान की उठान क्रय केंद्रों से कर ली है।
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अब जो धान संबद्ध राइस मिलों पर भेजा जा रहा है उसे विभागीय पोर्टल ले नहीं रहा जिसकी वजह से राइस मिल मालिक भेजे गए धान लदे ट्रकों को अनलोड नहीं कर रहे हैं। जिससे फतेहपुर, सफदरगंज समेत कई केंद्रों पर धान की उठान न होने से खरीद प्रभावित होने लगी है और जिले में किसी भी समय क्रय केंद्रों पर जगह न होने के कारण धान की खरीद बंद हो सकती है।
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जिससे इसका खामियाजा क्रय केंद्रों पर धान लेकर आने वाले किसानों को भुगतना पड़ सकता है। क्रय केंद्र प्रभारियों ने इस संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत भी करा दिया है यदि समस्या का जल्द ही कोई हल नहीं निकाला जाता है तो धान खरीद पर इसका विपरीत असर पड़ सकता है।
संबद्धता के बाद भी नहीं कर रहे एग्रीमेंट
धान की कुटाई के लिए क्रय केंद्रों से राइस मिलों को संबद्धता तो कर दिया गया है लेकिन इनके द्वारा एग्रीमेंट नहीं किया जा रहा है जिससे धान की उठान नहीं हो पा रही है। नवीन मंडी में विपणन शाखा के कांटा नंबर एक जेआर इंडस्ट्रीज, जायसवाल राइस और लक्ष्मी राइस मिल को संबद्ध किया गया है लेकिन लक्ष्मी राइस मिल द्वारा अभी तक एग्रीमेंट नहीं किया गया।
इसी प्रकार कांटा नंबर तीन से सीपी राइस मिल, जायसवाल राइस मिल, नन्हें राइस मिल और कुरैशी राइस मिल को संबद्ध किया गया लेकिन इनमें से सीपी और जायसवाल राइस मिल द्वारा अभी तक एग्रीमेंट नहीं कराया गया जिससे खरीदे गए धान की उठान नहीं हो रही है। ये चंद नाम बानगी भर है। कमोवेश यही स्थिति पूरे जिले की है।
एक धान खरीद केंद्र से कई-कई राइस मिलों को संबद्ध किया गया है। यदि एक राइस मिल की लिमिट पूरी हो गई है तो दूसरी राइस मिल को धान की उठान कराएं। धान की खरीद किसी भी कीमत पर प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इस संबंध में सभी केंद्र प्रभारियों को सख्त निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इसमें लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
-रमेश कुमार, जिला खाद्य विपणन अधिकारी