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Barabanki News: राम और भरत ने विपत्ति का किया था बंटवारा
Wed, 04 Nov 2026 02:26 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Wed, 04 Nov 2026 02:26 AM IST
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रामनगर। श्रीराम कथा में कथा व्यास अतुल कृष्ण भारद्वाज ने श्रोताओं से भरत और केवट से त्याग एवं भक्ति की प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राम और भरत ने संपत्ति का नहीं, बल्कि विपत्ति का बंटवारा किया था।
व्यास ने वनगमन के समय श्रीराम की भेंट निषादराज गुह और केवट से कराई। केवट ने भगवान राम के चरण धुलवाने की प्रार्थना की। भगवान को विवश होकर चरण धुलवाने पड़े, जिससे केवट और उसकी सात पीढ़ियां धन्य हो गईं।
भारद्वाज ने बताया कि सच्ची भक्ति से भगवान के दर्शन अवश्य प्राप्त होते हैं। उन्होंने राम-भरत मिलन का वर्णन करते हुए भरत को रघुवंश का हंस कहा। भरत चित्रकूट से श्रीराम की चरण पादुका लाए और उन्हें सिंहासन पर स्थापित किया।
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उन्होंने भगवान के अयोध्या लौटने से पूर्व ही रामराज्य की स्थापना कर दी। भारद्वाज ने श्रोताओं से अपनी योग्यता बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जीवन में दूसरों का योगदान अधिक होता है। इस मौके पर रामकुमार, ज्ञान प्रकाश, सत्यदेव मौजूद रहे।
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व्यास ने वनगमन के समय श्रीराम की भेंट निषादराज गुह और केवट से कराई। केवट ने भगवान राम के चरण धुलवाने की प्रार्थना की। भगवान को विवश होकर चरण धुलवाने पड़े, जिससे केवट और उसकी सात पीढ़ियां धन्य हो गईं।
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भारद्वाज ने बताया कि सच्ची भक्ति से भगवान के दर्शन अवश्य प्राप्त होते हैं। उन्होंने राम-भरत मिलन का वर्णन करते हुए भरत को रघुवंश का हंस कहा। भरत चित्रकूट से श्रीराम की चरण पादुका लाए और उन्हें सिंहासन पर स्थापित किया।
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उन्होंने भगवान के अयोध्या लौटने से पूर्व ही रामराज्य की स्थापना कर दी। भारद्वाज ने श्रोताओं से अपनी योग्यता बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जीवन में दूसरों का योगदान अधिक होता है। इस मौके पर रामकुमार, ज्ञान प्रकाश, सत्यदेव मौजूद रहे।