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इलाज में लापरवाही से गई गर्भवती की जान, परिजनों का हंगामा
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बाराबंकी। इलाज में बरती गई लापरवाही से एक गर्भवती की जान चली गई। मौत की जानकारी मिलते ही परिवारीजनों ने हंगामा शुरू कर दिया जिससे अस्पताल में अफरातफरी मच गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने परिवारीजनों को समझा-बुझाकर शांत कराया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
इधर, मामले की जानकारी मिलते ही एसीएमओ ने मौके पर पहुंच जांच शुरू कर दी है। बताया कि अस्पताल के लाइसेंस का नवीनीकरण कराए बिना ही संचालन करना गंभीर है। एसीएमओ की रिपोर्ट पर सीएमओ ने पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी है।
सिरौलीगौसपुर क्षेत्र के मदारपुर निवासी विकास शर्मा ने बताया कि पत्नी को प्रसव पीड़ा पर देर रात उन्होंने पैसार नाका स्थित आसरा जनसेवा अस्पताल में भर्ती कराया। आरोप है कि बिना डॉक्टर की देखरेेख में अप्रशिक्षितों ने इलाज शुरू कर दिया और गलत इंजेक्शन लगा दिया। इंजेक्शन लगने के कुछ देर बाद ही गर्भवती की मौत हो गई।
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मौत की सूचना मिलते ही परिवारीजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। अस्पताल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही और अप्रशिक्षितों से इलाज कराने का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसकी जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई और हंगामा कर रहे लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
सूचना मिलते ही एसीएमओ डॉ. आरएन वर्मा ने मामले की जांच शुरू कर दी है। बताया कि अस्पताल के लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं है। अस्पताल संचालक को कई बार बुलाया गया है लेकिन वह आए नहीं है। मामले की जानकारी सीएमओ को दे दी गई है। जो निर्देश मिलेगा उस आधार पर कार्य किया जाएगा।
बिना नवीनीकरण कराए संचालित हो रहे ज्यादातर अस्पताल
जिले में सौ से ज्यादा अस्पताल और नर्सिंगहोम संचालित हैं लेकिन इनमें से कुछ को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर अस्पताल ऐसे हैं जो लाइसेंस के बिना नवीनीकरण के ही संचालित किए जा रहे हैं। सूत्रों की माने तो इन अस्पतालों को विभाग के ही कुछ कर्मियों का खुला संरक्षण प्राप्त है। जिसकी वजह से ही ये लोग बिना लाइसेंस के ही अस्पताल ही नहीं चला रहे हैं बल्कि मरीजों को भर्ती कर उनका इलाज कर रहे हैं।
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इधर, मामले की जानकारी मिलते ही एसीएमओ ने मौके पर पहुंच जांच शुरू कर दी है। बताया कि अस्पताल के लाइसेंस का नवीनीकरण कराए बिना ही संचालन करना गंभीर है। एसीएमओ की रिपोर्ट पर सीएमओ ने पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी है।
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सिरौलीगौसपुर क्षेत्र के मदारपुर निवासी विकास शर्मा ने बताया कि पत्नी को प्रसव पीड़ा पर देर रात उन्होंने पैसार नाका स्थित आसरा जनसेवा अस्पताल में भर्ती कराया। आरोप है कि बिना डॉक्टर की देखरेेख में अप्रशिक्षितों ने इलाज शुरू कर दिया और गलत इंजेक्शन लगा दिया। इंजेक्शन लगने के कुछ देर बाद ही गर्भवती की मौत हो गई।
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मौत की सूचना मिलते ही परिवारीजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। अस्पताल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही और अप्रशिक्षितों से इलाज कराने का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसकी जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई और हंगामा कर रहे लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
सूचना मिलते ही एसीएमओ डॉ. आरएन वर्मा ने मामले की जांच शुरू कर दी है। बताया कि अस्पताल के लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं है। अस्पताल संचालक को कई बार बुलाया गया है लेकिन वह आए नहीं है। मामले की जानकारी सीएमओ को दे दी गई है। जो निर्देश मिलेगा उस आधार पर कार्य किया जाएगा।
बिना नवीनीकरण कराए संचालित हो रहे ज्यादातर अस्पताल
जिले में सौ से ज्यादा अस्पताल और नर्सिंगहोम संचालित हैं लेकिन इनमें से कुछ को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर अस्पताल ऐसे हैं जो लाइसेंस के बिना नवीनीकरण के ही संचालित किए जा रहे हैं। सूत्रों की माने तो इन अस्पतालों को विभाग के ही कुछ कर्मियों का खुला संरक्षण प्राप्त है। जिसकी वजह से ही ये लोग बिना लाइसेंस के ही अस्पताल ही नहीं चला रहे हैं बल्कि मरीजों को भर्ती कर उनका इलाज कर रहे हैं।