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बीएस फोर के कार्यकर्ताओं व सपा अधिवक्ता सभा ने किया प्रदर्शन
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बाराबंकी। सीएमओ कार्यालय के सामने हाईवे जाम कर प्रदर्शन करते भारतीय संविधान संरक्षण संघर्ष समि?
- फोटो : BARABANKI
बाराबंकी। बीएस फोर के कार्यकर्ताओं ने जहां बुधवार को दलितों और पिछड़ों के आरक्षण को संविधान की नवीं अनुसूची में शामिल किए जाने को लेकर शहर में पैदल मार्च निकाला। वहीं सपा अधिवक्ता सभा के कार्यकर्ताओं ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लिए जाने के विरोध में धरना-प्रदर्शन किया। दोनों संगठनों ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को सौंपा। विरोध प्रदर्शन को लेकर पुुलिस भी चौकन्नी दिखी। इस दौरान सड़क पर लगे जाम से राहगीरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। प्रदर्शन के चलते शहर में जगह-जगह भारी पुलिस बल भी तैनात रहा।
प्रदर्शन के दौरान पैदल मार्च का नेतृत्व कर रहे पूर्व मंत्री आरके चौधरी ने कहा कि दलितों और पिछड़े वर्ग के आरक्षण के मुकदमे में भाजपा सरकार ने घटिया दलील पेश कर दिया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सात फरवरी व 11 जून 2020 को दुुर्भाग्यपूर्ण फैसला दे दिया। उन्होंने कहा कि भगवा सरकार दलितों व पिछड़े वर्ग के आरक्षण को बर्दाश्त नहीं कर पा रही है।
उन्होंने राष्ट्रपति को भेजे ज्ञापन के माध्यम से मांग किया कि दलितों और पिछड़ों के आरक्षण को संविधान की नवीं अनुसूची में शामिल कराकर उसमें अनावश्यक हस्तक्षेप को रोका जाए। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने हाथ में स्लोगन लिखी तख्तियों को लेकर नारेबाजी भी की। इस प्रदर्शन में सत्येंद्र, उमेेश, जगदंबा, अतुल आदि शामिल रहे।
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उधर, समाजवादी पार्टी अधिवक्ता सभा के जिलाध्यक्ष शांति ओम के नेतृत्व में किसानों के समर्थन में प्रदर्शन किया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार दमनकारी नीति को अपनाए हुए है। चंद लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए किसानों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रही है। सरकार को आंदोलन पर बैठे किसानों से बात कर कृषि विरोधी कानूनों को वापस लेना चाहिए। इस दौरान शहर में जुुलूस निकालने के बाद पटेल तिराहे पर कार्यकर्ताओं ने कृषि कानूनों की छाया प्रतियां जल कर प्रदर्शन किया। इस मौके पर सिद्धांत कपिल, हरीश चंद्र, आसिफ, उदल सिंह, सुनील, प्रणय, दीपक, नरेंद्र यादव, सोनू, नितेश मौजूद रहे।
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प्रदर्शन के दौरान पैदल मार्च का नेतृत्व कर रहे पूर्व मंत्री आरके चौधरी ने कहा कि दलितों और पिछड़े वर्ग के आरक्षण के मुकदमे में भाजपा सरकार ने घटिया दलील पेश कर दिया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सात फरवरी व 11 जून 2020 को दुुर्भाग्यपूर्ण फैसला दे दिया। उन्होंने कहा कि भगवा सरकार दलितों व पिछड़े वर्ग के आरक्षण को बर्दाश्त नहीं कर पा रही है।
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उन्होंने राष्ट्रपति को भेजे ज्ञापन के माध्यम से मांग किया कि दलितों और पिछड़ों के आरक्षण को संविधान की नवीं अनुसूची में शामिल कराकर उसमें अनावश्यक हस्तक्षेप को रोका जाए। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने हाथ में स्लोगन लिखी तख्तियों को लेकर नारेबाजी भी की। इस प्रदर्शन में सत्येंद्र, उमेेश, जगदंबा, अतुल आदि शामिल रहे।
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उधर, समाजवादी पार्टी अधिवक्ता सभा के जिलाध्यक्ष शांति ओम के नेतृत्व में किसानों के समर्थन में प्रदर्शन किया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार दमनकारी नीति को अपनाए हुए है। चंद लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए किसानों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रही है। सरकार को आंदोलन पर बैठे किसानों से बात कर कृषि विरोधी कानूनों को वापस लेना चाहिए। इस दौरान शहर में जुुलूस निकालने के बाद पटेल तिराहे पर कार्यकर्ताओं ने कृषि कानूनों की छाया प्रतियां जल कर प्रदर्शन किया। इस मौके पर सिद्धांत कपिल, हरीश चंद्र, आसिफ, उदल सिंह, सुनील, प्रणय, दीपक, नरेंद्र यादव, सोनू, नितेश मौजूद रहे।