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कोविड अस्पतालों में समस्याओं से जूझ रहे मरीज

Wed, 09 Sep 2020 11:58 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 09 Sep 2020 11:58 PM IST
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Patients struggling with problems in Kovid hospitals
बाराबंकी। कोविड अस्पतालों में भर्ती मरीज अव्यवस्थाओं से जूझ रहे हैं। आरोप है कि अस्पतालों में तैनात चिकित्सक और कर्मचारी मनमानी करते हैं। उपचार के नाम पर महज औपचारिकता निभाई जा रही। इसके अलावा दवाई के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है। कोई इसका विरोध करता है तो उसे रेफर का पर्चा थमा दिया जाता है। वहीं, जिम्मेदार जानकर भी अंजान बने हुए हैं। जिससे मरीजों के साथ तीमारदारों को भी खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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जिले में आठ कोविड अस्पताल चिह्नित किए गए हैं। लेकिन कोरोना के मरीजों को इलाज की सुविधा सिर्फ पांच निजी अस्पतालों में दी जा रही है। चयनित किए गए तीन सरकारी अस्पताल सिर्फ नाम मात्र के ही हैं। इन अस्पतालों में कोविड के मरीजों को भर्ती करने की क्षमता करीब 1965 के आसपास है। लेकिन मौजूदा समय में अस्पतालों में महज 129 मरीज ही भर्ती हैं। जिनका उपचार किया जा रहा है। आरोप है कि इन अस्पतालों में भर्ती मरीज अव्यवस्थाओं से जूझ रहे हैं लेकिन अस्पताल में सुनवाई नहीं की जाती है। कोविड वार्डों में तैनात चिकित्सक और कर्मचारी पूरी तरह से मनमानी करते हैं और यदि कोई मरीज इसका विरोध करता है तो उसे रेफर का पर्चा थमा दिया जाता है। जिससे मरीजों के साथ ही इनकी तीमारदार भी अस्पतालों की मनमानी सहन को मजबूर हैं।
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अछूत जैसा करते हैं व्यवहार
आवास विकास निवासी विजय देवी ने बताया कि किसी को कोरोना हो जाए तो वह चयनित अस्पतालों में भर्ती होने के बजाए होम आइसोलेट हो जाए तो ज्यादा बेहतर होगा। अस्पतालों में कोई सुनवाई नहीं होती, चिकित्सक से लेकर कर्मचारी तक मनमानी करते हैं। 16 अगस्त को हिंद अस्पताल में भर्ती किया गया लेकिन यहां डॉक्टर और कर्मचारी किसी की कोई बात सुनते ही नहीं है। इलाज के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई जाती है। फीवर आने पर सिर्फ बुखार की दवा दी जाती है इसके अलावा कुछ भी नहीं दिया जाता है। 30 अगस्त को अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद उन्होंने बताया कि मरीजों के प्रति स्वास्थ्य कर्मियों का व्यवहार बहुत खराब है।
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सुरजनपुर मोहम्मदपुर खाला निवासी मीरा मिश्रा का कहना है कि कोरोना होने पर 14 अगस्त को उन्हें मेयो अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां मरीजों से ऐसा व्यवहार किया जाता है, जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। आरोप है कि परिवार वालो से इंजेक्शन के नाम पर 32 हजार जमा कराए गए लेकिन तीन इंजेक्शन लगाए गए और तीन गायब कर दिए गए। विरोध पर अभद्रता की गई। बिना किसी सिफारिश के चिकित्सक देखने नहीं आते और परिवार का कोई सदस्य उनके पास जा नहीं सकता। एक सितंबर को डिस्चार्ज होने के बाद अब वे घर पर हैं।
निशुल्क मिलेगा इंजेक्शन
सीएमओ ने बताया कि कोरोना मरीजों को अभी तक रेमडेसेविर इंजेक्शन का लाभ नहीं मिल पा रहा था। लेकिन इसे भी शासन की गाइड लाइन में शामिल कर लिया गया है। अब यह मरीजों को निशुल्क उपलब्ध होगा। मेयो और हिंद अस्पताल को इंजेक्शन उपलब्ध करा दिए गए हैं। खाली इंजेक्शन वापस करने पर आगे इंजेक्शन दिए जाएंगे।
अस्पताल में बेड
एल-1 श्रेणी में सीएचसी सतरिख 30 बेड, सीएचसी बड़ागांव 30 बेड, हिंद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज तीन सौ बेड, चन्द्रा हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर 130 बेड, शेरवुड हास्पिटल 125 बेड और सौ शैय्या चिकित्सालय सिरौलीगौसपुर दो सौ बेड। इसके अलावा एल-2 हिंद अस्पताल 520 बेड और एल-3 मेयो इंस्टीटयूट 630 बेड के अस्पतालों में 1965 बेड हैं। हिंद में दस वेंटिलेटर तो मेयो में 20 वेंटिलेटर की सुविधा उपलब्ध है।

कोविड अस्पतालों में भर्ती मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिले, इस पर पूरा फोकस किया जा रहा है। सबसे पहले मेयो अस्पताल का निरीक्षण किया गया है। निरीक्षण के बाद से ही व्यवस्था में किस तरह से बदलाव किया जाना है, इस पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। बहुत जल्द ही व्यवस्था में बदलाव दिखाई देगा।
- डॉ. बीकेएस चौहान, सीएमओ
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