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अब ब्लॉक प्रमुख के लिए बिछने लगी सियासी बिसात
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बाराबंकी। क्षेत्र पंचायत सदस्य की मतगणना पूरी होने के बाद अब ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी के लिए सियासी बिसात बिछने लगी है लेकिन इस बार आरक्षण में बदलाव के चलते कई नए चेहरों के प्रमुुख की कुर्सी पर काबिज होने का मौका मिलेगा। परिणाम आने के बाद से ही जरूरत के हिसाब से बीडीसी सदस्यों की संख्या बल जुुटाने के लिए गणित लगना शुरू हो गया है।
जिले की पंद्रह ब्लॉक प्रमुख की सीटों पर इस बार महिलाओं के लिए पांच सीटें आरक्षण कोटे में आई हैं। राजनीतिक पार्टियां जिला पंचायत अध्यक्ष की तरह ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी पर अपने समर्थित बीडीसी सदस्य को बैठाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाने में जुट गई हैं।
पंद्रह विकासखंड वाले इस जिले में क्षेत्र पंचायत सदस्य की कुल 1440 सीटें हैं। जिन पर बीते 26 अप्रैल को मतदान हुआ। हालांकि नामांकन प्रक्रिया के दौरान 25 बीडीसी सदस्य ऐसे थे जो निर्विरोध चुने गए हैं। सीधे तौर पर यह कहा जाए कि इन निर्विरोध निर्वाचित बीडीसी सदस्य के वार्ड से कोई दूसरा दावेदार सामने आया ही नहीं और नामांकन दाखिल भी किया तो नाम वापसी की प्रक्रिया तक जोड़ जुगाड़ से उसे अपने पाले में मिलाकर पर्चा वापस करा दिया। शेष 1415 सीटों के लिए मतदान के बाद दो मई को परिणाम सामने आए तो ब्लॉक प्रमुखी की कुर्सी पर काबिज होने के सियासी बिसात बिछने लगी।
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वहीं सरकार प्रदेश सरकार द्वारा प्रमुख की कुर्सी के आरक्षण में बदलाव कर नए चेेहरों को भी इसका मौका दे दिया। जिले के 1440 बीडीसी चुनकर आए लोगों में भाजपा, सपा, कांग्रेस और बसपा ने अपने समर्थित उम्मीदवार उतारे थे लेकिन टक्कर सपा और भाजपा के बीच देखने को मिल रही है। वहीं निर्दलीय के रुप में जीत कर आए बीडीसी सदस्य को अपने पाले में मिलने के लिए दलों ने गणित बैठना शुरू कर दिया है।
यह है ब्लॉकवार प्रमुख पद का आरक्षण
महिलाओं के लिए आरक्षित ब्लॉक प्रमुख की पांच सीटों में त्रिवेदीगंज व सिद्धौर अनुसूचित जाति महिला के साथ सूरतगंज और सिरौलीगौसपुर पिछड़ा वर्ग महिला और बनीकोडर ब्लॉक महिला वर्ग के लिए शामिल है। जबकि फतेहपुर व मसौली अन्य पिछड़ा वर्ग, हरख व हैदरगढ़ अनुसूचित जाति तथा निंदूरा, बंकी, देवा, दरियाबाद, रामनगर व पूरेडलई ब्लॉक अनारक्षित वर्ग के लिए निर्धारित किए गए हैं।
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जिले की पंद्रह ब्लॉक प्रमुख की सीटों पर इस बार महिलाओं के लिए पांच सीटें आरक्षण कोटे में आई हैं। राजनीतिक पार्टियां जिला पंचायत अध्यक्ष की तरह ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी पर अपने समर्थित बीडीसी सदस्य को बैठाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाने में जुट गई हैं।
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पंद्रह विकासखंड वाले इस जिले में क्षेत्र पंचायत सदस्य की कुल 1440 सीटें हैं। जिन पर बीते 26 अप्रैल को मतदान हुआ। हालांकि नामांकन प्रक्रिया के दौरान 25 बीडीसी सदस्य ऐसे थे जो निर्विरोध चुने गए हैं। सीधे तौर पर यह कहा जाए कि इन निर्विरोध निर्वाचित बीडीसी सदस्य के वार्ड से कोई दूसरा दावेदार सामने आया ही नहीं और नामांकन दाखिल भी किया तो नाम वापसी की प्रक्रिया तक जोड़ जुगाड़ से उसे अपने पाले में मिलाकर पर्चा वापस करा दिया। शेष 1415 सीटों के लिए मतदान के बाद दो मई को परिणाम सामने आए तो ब्लॉक प्रमुखी की कुर्सी पर काबिज होने के सियासी बिसात बिछने लगी।
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वहीं सरकार प्रदेश सरकार द्वारा प्रमुख की कुर्सी के आरक्षण में बदलाव कर नए चेेहरों को भी इसका मौका दे दिया। जिले के 1440 बीडीसी चुनकर आए लोगों में भाजपा, सपा, कांग्रेस और बसपा ने अपने समर्थित उम्मीदवार उतारे थे लेकिन टक्कर सपा और भाजपा के बीच देखने को मिल रही है। वहीं निर्दलीय के रुप में जीत कर आए बीडीसी सदस्य को अपने पाले में मिलने के लिए दलों ने गणित बैठना शुरू कर दिया है।
यह है ब्लॉकवार प्रमुख पद का आरक्षण
महिलाओं के लिए आरक्षित ब्लॉक प्रमुख की पांच सीटों में त्रिवेदीगंज व सिद्धौर अनुसूचित जाति महिला के साथ सूरतगंज और सिरौलीगौसपुर पिछड़ा वर्ग महिला और बनीकोडर ब्लॉक महिला वर्ग के लिए शामिल है। जबकि फतेहपुर व मसौली अन्य पिछड़ा वर्ग, हरख व हैदरगढ़ अनुसूचित जाति तथा निंदूरा, बंकी, देवा, दरियाबाद, रामनगर व पूरेडलई ब्लॉक अनारक्षित वर्ग के लिए निर्धारित किए गए हैं।