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Barabanki News: रूई की बाती से रोशन हुई लक्ष्मी की जिंदगी
Thu, 03 Sep 2026 01:17 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Thu, 03 Sep 2026 01:17 AM IST
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सिद्धौर। ग्राम पंचायत मोहब्बतपुर की लक्ष्मी देवी ने आजीविका मिशन से जुड़कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। उनके समूह की महिलाएं रूई की बाती बना रही हैं, जिसे आसपास के मंदिरों व घरों में पूजन कार्यक्रम के दौरान प्रमुखता से इस्तेमाल किया जाता है। इससे होने वाली आय समूह से जुड़ी महिलाओं की आय बढ़ाने के साथ ही उन्हें आत्म निर्भर बना रही हैं।
स्नातक तक पढ़ी लक्ष्मी की शादी करीब 10 वर्ष पहले अमित कुमार से हुई थी। उनके पति के पास एक बीघा जमीन थी। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। नौकरी न मिलने पर लक्ष्मी ने परिवार की आमदनी बढ़ाने के लिए आजीविका मिशन से जुड़ने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने गांव की महिलाओं के साथ मिलकर तीन साल पहले पूर्वी मैया स्वयं सहायता समूह बनाने के बाद ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर सबा फातिमा की प्रेरणा से रुई से बाती बनाने का काम शुरू किया। इस कार्य के लिए समूह से 1.10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी ली। इसमें 70 हजार रुपये की मशीन और 40 हजार रुपये कच्चा माल खरीदने में खर्च हुए।
लक्ष्मी ने आरती, गीता देवी, शांति, अंजलि, सुषमा, पुष्पा और नीलम सहित आसपास की अन्य महिलाओं को भी अपने साथ जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया। वर्तमान में लक्ष्मी प्रतिमाह 8 से 10 हजार रुपये तक की आमदनी प्राप्त करने के साथ ही समूह में काम करने वाली महिलाओं को भी प्रतिदिन 100 रुपये पैकिंग के लिए देती हैं। समूह की ओर से तैयार बत्तियां अवसानेश्वर मंदिर, सिद्धेश्वर मंदिर सिद्धौर, मां दुर्गा मंदिर बीबीपुर और अन्य धार्मिक स्थलों पर बेची जाती हैं। (संवाद)
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पति को दिलाया ई रिक्शा
समूह की आय से लक्ष्मी खुद के रोजगार तक ही सीमित नहीं रहीं। उन्होंने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से पति अमित कुमार को भी ई रिक्शा दिलवाने में भी मदद की। अब अमित कुमार ई रिक्शा चलाकर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने बराबर का सहयोग कर रहे हैं। इनकी बड़ी बेटी अर्चना कक्षा 11 और बेटा सोम कक्षा एक में क्षेत्र के एक कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं।
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स्नातक तक पढ़ी लक्ष्मी की शादी करीब 10 वर्ष पहले अमित कुमार से हुई थी। उनके पति के पास एक बीघा जमीन थी। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। नौकरी न मिलने पर लक्ष्मी ने परिवार की आमदनी बढ़ाने के लिए आजीविका मिशन से जुड़ने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने गांव की महिलाओं के साथ मिलकर तीन साल पहले पूर्वी मैया स्वयं सहायता समूह बनाने के बाद ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर सबा फातिमा की प्रेरणा से रुई से बाती बनाने का काम शुरू किया। इस कार्य के लिए समूह से 1.10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी ली। इसमें 70 हजार रुपये की मशीन और 40 हजार रुपये कच्चा माल खरीदने में खर्च हुए।
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लक्ष्मी ने आरती, गीता देवी, शांति, अंजलि, सुषमा, पुष्पा और नीलम सहित आसपास की अन्य महिलाओं को भी अपने साथ जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया। वर्तमान में लक्ष्मी प्रतिमाह 8 से 10 हजार रुपये तक की आमदनी प्राप्त करने के साथ ही समूह में काम करने वाली महिलाओं को भी प्रतिदिन 100 रुपये पैकिंग के लिए देती हैं। समूह की ओर से तैयार बत्तियां अवसानेश्वर मंदिर, सिद्धेश्वर मंदिर सिद्धौर, मां दुर्गा मंदिर बीबीपुर और अन्य धार्मिक स्थलों पर बेची जाती हैं। (संवाद)
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पति को दिलाया ई रिक्शा
समूह की आय से लक्ष्मी खुद के रोजगार तक ही सीमित नहीं रहीं। उन्होंने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से पति अमित कुमार को भी ई रिक्शा दिलवाने में भी मदद की। अब अमित कुमार ई रिक्शा चलाकर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने बराबर का सहयोग कर रहे हैं। इनकी बड़ी बेटी अर्चना कक्षा 11 और बेटा सोम कक्षा एक में क्षेत्र के एक कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं।