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शव वाहन न मिलने पर अस्पताल में किया हंगामा
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
Updated Thu, 25 May 2017 11:52 PM IST
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शव वाहन न मिलने पर हंगामा करते मृतक के परिवारीजन।
- फोटो : अमर उजाला
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जिला अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे किसान की मौत के बाद शव वाहन न मिलने पर परिवारीजनों ने जमकर हंगामा किया। मामला बढ़ता देख चिकित्सकों ने 100 नंबर पर सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने परिवारीजनों को समझा बुझाकर मामला शांत कराया और निजी वाहन से शव भेजवा दिया।
जहांगीराबाद थाना क्षेत्र के ग्राम हसरा निवासी प्रेमचंद्र (55) को सुबह दिल का दौरा पड़ने पर उसके पुत्र राकेश ने एंबुलेंस से जिला अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल पहुंचते ही गेट पर किसान की मौत हो गई। ड्यूटी पर तैनात डॉ. अजय सिंह ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिवारीजनों ने डॉक्टर से शव वाहन दिलाए जाने की मांग की, डॉक्टर ने सीएमएस से बात करने को कहा।
शव वाहन का लाभ न मिलने पर परिवारीजन आक्रोशित हो गए। मामला बढ़ता देख डॉ. मुदित ने पुलिस को सूचना देकर बुला लिया। चिकित्सकों का कहना है कि अस्पताल में इलाज के दौरान मौत होने पर शव वाहन का लाभ दिया जाता है।
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पुलिस ने परिवारीजनों को समझा बुझाकर निजी वाहन से शव भेजवा दिया। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसके शुक्ला का कहना है कि मामला संज्ञान में आया था, चालक भी नहीं है, और जिस स्थित में किसान की मौत हुई उसे शव वाहन का लाभ नहीं दिया जा सकता था।
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जहांगीराबाद थाना क्षेत्र के ग्राम हसरा निवासी प्रेमचंद्र (55) को सुबह दिल का दौरा पड़ने पर उसके पुत्र राकेश ने एंबुलेंस से जिला अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल पहुंचते ही गेट पर किसान की मौत हो गई। ड्यूटी पर तैनात डॉ. अजय सिंह ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिवारीजनों ने डॉक्टर से शव वाहन दिलाए जाने की मांग की, डॉक्टर ने सीएमएस से बात करने को कहा।
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शव वाहन का लाभ न मिलने पर परिवारीजन आक्रोशित हो गए। मामला बढ़ता देख डॉ. मुदित ने पुलिस को सूचना देकर बुला लिया। चिकित्सकों का कहना है कि अस्पताल में इलाज के दौरान मौत होने पर शव वाहन का लाभ दिया जाता है।
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पुलिस ने परिवारीजनों को समझा बुझाकर निजी वाहन से शव भेजवा दिया। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसके शुक्ला का कहना है कि मामला संज्ञान में आया था, चालक भी नहीं है, और जिस स्थित में किसान की मौत हुई उसे शव वाहन का लाभ नहीं दिया जा सकता था।