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सांसदों ने तीन गांवों को लिया गोद
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 18 Apr 2017 11:52 PM IST
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पहले के दो सांसद आदर्श गांवों में भले ही विकास कार्यों का पहिया न घुमा हो लेकिन जिले के तीन सांसदों ने और तीन गांव लेकर उन्हें सांसद आदर्श ग्राम बनाने की ठानी है। इस बार सपा के राज्यसभा सांसद बेनी प्रसाद वर्मा ने अपने गृह तहसील सिरौलीगौसपुर के धुसड़िया गांव को आदर्श ग्राम के रूप में चुना है। भाजपा सांसद प्रियंका सिंह रावत ने फतेहपुर ब्लॉक के दीन पनाह को आदर्श ग्राम के रूप में चयनित किया है। डॉ. पीएल पुनिया ने हैदरगढ़ तहसील के दतौली चंदा को गोद लिया है।
केंद्र सरकार के निर्देश पर सांसद को हर वर्ष एक अति पिछड़े गांव का चयन करना होता है। उस गांव को सांसद आदर्श गांव के तहत केंद्र व प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित कराया जाता है। दो साल तक जिला प्रशासन की कार्यवाही में कुछ खास नतीजा नहीं निकला। अब प्रदेश में निजाम बदलने के बाद जिला प्रशासन को मिले सख्त निर्देश पर जिम्मेदार अधिकारियों ने इसमें माथापच्ची शुरू कर दी है।
2014 में भाजपा की केंद्र में सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री ने हर सांसद को जिले में हर वर्ष एक अति पिछड़े गांव का चयन करना था। इसके लिए भाजपा सांसद प्रियंका सिंह रावत ने सिद्घौर क्षेत्र के ग्राम बुधनई को आदर्श ग्राम के रूप में चयन किया था। राज्यसभा सांसद डॉ. पीएल पुनिया ने मसौली ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम टेरा दौलतपुर का चयन कर उसे गोद लिया था। इन दोनों गांवों में निर्माण कार्य के साथ योजनाओं का लाभ देने के लिए विभागीय अधिकारियों को भी निर्देशित किया गया था।
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केंद्र सरकार के निर्देश पर सांसद को हर वर्ष एक अति पिछड़े गांव का चयन करना होता है। उस गांव को सांसद आदर्श गांव के तहत केंद्र व प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित कराया जाता है। दो साल तक जिला प्रशासन की कार्यवाही में कुछ खास नतीजा नहीं निकला। अब प्रदेश में निजाम बदलने के बाद जिला प्रशासन को मिले सख्त निर्देश पर जिम्मेदार अधिकारियों ने इसमें माथापच्ची शुरू कर दी है।
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2014 में भाजपा की केंद्र में सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री ने हर सांसद को जिले में हर वर्ष एक अति पिछड़े गांव का चयन करना था। इसके लिए भाजपा सांसद प्रियंका सिंह रावत ने सिद्घौर क्षेत्र के ग्राम बुधनई को आदर्श ग्राम के रूप में चयन किया था। राज्यसभा सांसद डॉ. पीएल पुनिया ने मसौली ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम टेरा दौलतपुर का चयन कर उसे गोद लिया था। इन दोनों गांवों में निर्माण कार्य के साथ योजनाओं का लाभ देने के लिए विभागीय अधिकारियों को भी निर्देशित किया गया था।
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