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Barabanki News: फाइलों में अटके मॉडल गांवों के काम, तरक्की नदारद
Tue, 04 Aug 2026 12:56 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Tue, 04 Aug 2026 12:56 AM IST
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बाराबंकी। मॉडल गांव की फाइलें दफ्तरों में धूल फांक रही हैं। जिससे गांव क्षेत्र में विकास का इंतजार लंबा होता जा रहा है। 30 फीसदी से अधिक अनुसूचित जाति (एससी) आबादी वाले गांवों की तकदीर बदलने के इरादे से शुरू हुई योजना अब फाइलों में अटक कर रह गई है।
वर्ष 2018-19 में जब प्रधानमंत्री ग्राम योजना का आगाज हुआ, तब उम्मीद जागी थी कि बुनियादी सुविधाओं से वंचित गांवों में तरक्की से जुड़े विकास कार्य दिखेंगे। नियम के तहत ग्राम पंचायतों से प्रपोजल मांगकर विद्यालय, आंगनबाड़ी, सड़क और नालियों को चमकाना था लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि सरकारी पोर्टल पर तो गांवों का ग्राफ लगातार ऊपर चढ़ता गया, मगर तरक्की के नाम पर पैसा बहुत कम गांवों के खाते तक पहुंचा।
योजना शुरू होने के बाद पहले चरण में चयनित गांवों की लंबी कतार दिखी। इसके बाद गत वर्ष और फिर 2025-26 में भी 77 नए गांव पोर्टल पर जोड़े जाते रहे लेकिन इनमें से अधिकतर गांव अपनी बारी के इंतजार में अभी तक सिर्फ बजट का मुंह ताक रहे हैं, जिससे फाइलों में दर्ज विकास से जुड़े कार्य ठप पड़े हैं। इस संबंध में जिला समाज कल्याण अधिकारी अभिलाषा त्रिपाठी ने बताया कि चयनित गांवों के विकास के लिए पंचायतों से प्रपोजल मांगे जाते हैं। जिन गांवों का बजट प्राप्त हो चुका है, वहां सड़क, नाली और विद्यालय जैसे काम कराए गए हैं। शेष गांवों के लिए धनराशि निर्गत होते ही प्रस्तावित विकास कार्य शुरू कराए जाएंगे।
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वर्ष 2018-19 में जब प्रधानमंत्री ग्राम योजना का आगाज हुआ, तब उम्मीद जागी थी कि बुनियादी सुविधाओं से वंचित गांवों में तरक्की से जुड़े विकास कार्य दिखेंगे। नियम के तहत ग्राम पंचायतों से प्रपोजल मांगकर विद्यालय, आंगनबाड़ी, सड़क और नालियों को चमकाना था लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि सरकारी पोर्टल पर तो गांवों का ग्राफ लगातार ऊपर चढ़ता गया, मगर तरक्की के नाम पर पैसा बहुत कम गांवों के खाते तक पहुंचा।
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योजना शुरू होने के बाद पहले चरण में चयनित गांवों की लंबी कतार दिखी। इसके बाद गत वर्ष और फिर 2025-26 में भी 77 नए गांव पोर्टल पर जोड़े जाते रहे लेकिन इनमें से अधिकतर गांव अपनी बारी के इंतजार में अभी तक सिर्फ बजट का मुंह ताक रहे हैं, जिससे फाइलों में दर्ज विकास से जुड़े कार्य ठप पड़े हैं। इस संबंध में जिला समाज कल्याण अधिकारी अभिलाषा त्रिपाठी ने बताया कि चयनित गांवों के विकास के लिए पंचायतों से प्रपोजल मांगे जाते हैं। जिन गांवों का बजट प्राप्त हो चुका है, वहां सड़क, नाली और विद्यालय जैसे काम कराए गए हैं। शेष गांवों के लिए धनराशि निर्गत होते ही प्रस्तावित विकास कार्य शुरू कराए जाएंगे।
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