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Barabanki News: एबीवीपी कार्यकर्ताओं व पुलिस के बयान दर्ज, आज सीएम को सौंपेंगे रिपोर्ट
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बाराबंकी। श्री रामस्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी में सोमवार को भड़के बवाल की जांच अब उच्चस्तर पर पहुंच गई है। अयोध्या मंडल के कमिश्नर राजेश कुमार और आईजी प्रवीण कुमार ने पुलिस अधिकारियों के साथ ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) कार्यकर्ताओं के बयान दर्ज किए। जांच टीम को यूनिवर्सिटी प्रशासन व पुलिस की ओर से 50 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराई गई है। लाठीचार्ज से पहले छात्रों और लखनऊ से पहुंचे बाहरी लोगों के बीच हुई भिड़ंत पर अधिकारियों की नजर है। बुधवार को जांच करीब पूरी कर ली गई। बृहस्पतिवार को रिपोर्ट सीएम को सौंप दी जाएगी।
सोमवार को यूनिवर्सिटी में एलएलबी व बीबीए की मान्यता न मिलने का मुद्दा छात्रों ने जोर-शोर से उठाया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने यूनिवर्सिटी का मुख्य गेट बंद कर दिया था। इसी दौरान एबीवीपी के प्रांत संगठन मंत्री पुष्पेंद्र सिंह समेत संगठन के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंच गए। गेट खोलने को लेकर छात्रों और कुछ बाहरी लोगों में विवाद इतना बढ़ा कि हालात बिगड़ गए और पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।
मंगलवार को जांच के दौरान कमिश्नर और आईजी ने एबीवीपी के 12 से अधिक कार्यकर्ताओं के बयान दर्ज किए। इसके साथ मौके पर मौजूद सीओ हर्षित चौहान सहित लगभग 20 पुलिसकर्मियों के बयान भी लिए। सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ का दायरा और बढ़ाया जाएगा, ताकि लाठीचार्ज से पहले और बाद के घटनाक्रम की कड़ी जुड़ सके। घटना में पुलिस चौकी पर हमले और कई छात्रों के घायल होने की बात सामने आई थी, वहीं बिना मान्यता के पढ़ाई कराए जाने को लेकर भी छात्रों में गहरा आक्रोश देखने को मिला था। अभी तक न तो किसी छात्र पर और न ही यूनिवर्सिटी प्रबंधन या प्रशासनिक स्तर पर कोई मुकदमा दर्ज कराया गया है।
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सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी मामले का संज्ञान लिया है और अयोध्या कमिश्नर व आईजी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। ऐसे में अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं, जो आने वाले दिनों में पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेगी।
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छात्रों को भड़काने की साजिश, मात्र 21 मिनट में बदला माहौल
छात्रों का कहना है कि उन्होंने यूनिवर्सिटी का गेट बंद कर केवल फैकल्टी व स्टाफ की आवाजाही रोकी थी, छात्राओं को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया। सीओ सिटी हर्षित चौहान मौके पर पहुंचे, लेकिन मान्यता से जुड़े सवालों पर जब उनके पास संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो छात्र पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। इसी खींचतान के बीच अचानक लगभग 4:03 बजे यूनिवर्सिटी गेट के अंदर से कुछ लोग बाहर आए। उन्होंने गार्ड के डंडे खींचकर छात्रों पर हमला बोल दिया। कुल 21 मिनट के इस घटनाक्रम में कौन-कौन लोग शामिल रहे, किसने हमला किया और किसने भड़काने की साजिश रची यह बड़ा सवाल है।
लाठीचार्ज मामले में अब तक सीओ, कोतवाल, चौकी इंचार्ज व एक सिपाही को हटाया गया है। जांच के दौरान दो और सिपाहियों को चिह्नित किया गया है। दोनों की जांच कराई जा रही है। दोषी मिलने पर कार्रवाई होगी।
-अर्पित विजयवर्गीय, एसपी-बाराबंकी
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सोमवार को यूनिवर्सिटी में एलएलबी व बीबीए की मान्यता न मिलने का मुद्दा छात्रों ने जोर-शोर से उठाया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने यूनिवर्सिटी का मुख्य गेट बंद कर दिया था। इसी दौरान एबीवीपी के प्रांत संगठन मंत्री पुष्पेंद्र सिंह समेत संगठन के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंच गए। गेट खोलने को लेकर छात्रों और कुछ बाहरी लोगों में विवाद इतना बढ़ा कि हालात बिगड़ गए और पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।
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मंगलवार को जांच के दौरान कमिश्नर और आईजी ने एबीवीपी के 12 से अधिक कार्यकर्ताओं के बयान दर्ज किए। इसके साथ मौके पर मौजूद सीओ हर्षित चौहान सहित लगभग 20 पुलिसकर्मियों के बयान भी लिए। सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ का दायरा और बढ़ाया जाएगा, ताकि लाठीचार्ज से पहले और बाद के घटनाक्रम की कड़ी जुड़ सके। घटना में पुलिस चौकी पर हमले और कई छात्रों के घायल होने की बात सामने आई थी, वहीं बिना मान्यता के पढ़ाई कराए जाने को लेकर भी छात्रों में गहरा आक्रोश देखने को मिला था। अभी तक न तो किसी छात्र पर और न ही यूनिवर्सिटी प्रबंधन या प्रशासनिक स्तर पर कोई मुकदमा दर्ज कराया गया है।
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सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी मामले का संज्ञान लिया है और अयोध्या कमिश्नर व आईजी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। ऐसे में अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं, जो आने वाले दिनों में पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेगी।
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छात्रों को भड़काने की साजिश, मात्र 21 मिनट में बदला माहौल
छात्रों का कहना है कि उन्होंने यूनिवर्सिटी का गेट बंद कर केवल फैकल्टी व स्टाफ की आवाजाही रोकी थी, छात्राओं को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया। सीओ सिटी हर्षित चौहान मौके पर पहुंचे, लेकिन मान्यता से जुड़े सवालों पर जब उनके पास संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो छात्र पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। इसी खींचतान के बीच अचानक लगभग 4:03 बजे यूनिवर्सिटी गेट के अंदर से कुछ लोग बाहर आए। उन्होंने गार्ड के डंडे खींचकर छात्रों पर हमला बोल दिया। कुल 21 मिनट के इस घटनाक्रम में कौन-कौन लोग शामिल रहे, किसने हमला किया और किसने भड़काने की साजिश रची यह बड़ा सवाल है।
लाठीचार्ज मामले में अब तक सीओ, कोतवाल, चौकी इंचार्ज व एक सिपाही को हटाया गया है। जांच के दौरान दो और सिपाहियों को चिह्नित किया गया है। दोनों की जांच कराई जा रही है। दोषी मिलने पर कार्रवाई होगी।
-अर्पित विजयवर्गीय, एसपी-बाराबंकी