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देहदान कर अमर हो गईं जगवंती
बाराबंकी/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 23 Nov 2015 11:43 PM IST
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सिद्धौर ब्लाॉक के ग्राम न्योछना की रहने वाली जगवंती देवी का देहांत तो हुआ लेकिन वह एक मिसाल कायम कर गईं। जगवंती के एक संकल्प देहदान की बदौलत अब दो अंधियारी जिंदगियों को ज्योति मिलेगी। साथ ही देह का परीक्षण कर मेडिकल के विद्यार्थी शिक्षित होंगे, जिनका लाभ आम जनमानस को मिलेगा। साथ ही जगवंती का शव शोध कार्य में लंबे समय तक प्रयोग हो सकेगा जिससे चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में नया आयाम भी मिल सकेगा।
सिद्धौर की ग्राम न्योछना में रहने वाली जगवंती (70), पत्नी स्व. राम प्यारे ने चार फरवरी 2014 को कोठी कस्बा में आयोजित एक कार्यक्रम में देहदान का संकल्प लिया था। रविवार की रात जगवंती देवी ने सदा के लिए आंखें मूंद लीं। केजीएमयू लखनऊ के नेत्र विभाग की टीम जगवंती देवी की कॉर्निया रात में ही निकाल कर ले गई है। सुबह करीब दस बजे केजीएमसी के देहदान विभाग की टीम गांव पहुंच गई थी। सीडीओ से शिकायत होने पर डॉ. हरप्रीत ने मौके पर पहुंच डेड सर्टिफिकेट दिया इसके बाद बॉडी को लखनऊ ले जाया जा सका।
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सिद्धौर की ग्राम न्योछना में रहने वाली जगवंती (70), पत्नी स्व. राम प्यारे ने चार फरवरी 2014 को कोठी कस्बा में आयोजित एक कार्यक्रम में देहदान का संकल्प लिया था। रविवार की रात जगवंती देवी ने सदा के लिए आंखें मूंद लीं। केजीएमयू लखनऊ के नेत्र विभाग की टीम जगवंती देवी की कॉर्निया रात में ही निकाल कर ले गई है। सुबह करीब दस बजे केजीएमसी के देहदान विभाग की टीम गांव पहुंच गई थी। सीडीओ से शिकायत होने पर डॉ. हरप्रीत ने मौके पर पहुंच डेड सर्टिफिकेट दिया इसके बाद बॉडी को लखनऊ ले जाया जा सका।
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