फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Barabanki News ›   Innocent's death by doctors' negligence

डॉक्टरों की लापरवाही से मासूम की मौत

Sat, 20 May 2017 11:44 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी Updated Sat, 20 May 2017 11:44 PM IST
विज्ञापन
Innocent's death by doctors' negligence
तेजधार हथियारों से जालंधर में युवक की हत्या - फोटो : अमर उजाला
जिला अस्पताल में शनिवार को इलाज न मिलने से एक मासूम बच्ची की मौत हो गई। परिवारीजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल प्रशासन से शिकायत की है। अस्पताल में अव्यवस्थाओं का आलम यह है कि पीड़ित परिवार को शव वाहन का लाभ भी नहीं दिया गया।
विज्ञापन


अस्पताल में सर्दी जुखाम का इलाज नहीं है तो गंभीर मरीजों का इलाज कैसे होगा इसका सहज की अंदाजा लगाया जा सकता है।  अंत में शव वाहन चालक न होने की बात कहकर उसे मना किया गया तो वह भाई के साथ बाइक पर ही बेटी का शव लेकर चला गया।                  
विज्ञापन


देवा थाना क्षेत्र के ग्राम कुरखिला मजरे ढर्रेपुर निवासी अनंतराम की पुत्री अराध्या (3) को सर्दी जुकाम होने पर उसे सीएचसी देवा में भर्ती कराया था। जहां देर रात उसकी हालत नाजुक होने पर उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


इमरजेंसी में डॉ. अमित वर्मा ने उसे भर्ती किया था। उसके बाद इमरजेंसी वार्ड देर रात करीब दो बजेे उसकी हालत अचानक बिगड़ी तो उसके पिता ने ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स जशमता से उसे देखने को कहा।

आरोप है कि स्टाफ नर्स आई और कहा कि दवाई दी गई है थोड़ी देर में आराम हो जाएगा। पर मासूम की हालत खराब होती गई, पर आनकॉल चिकित्सक को बुलाकर इलाज कराना स्टाफ नर्स ने उचित नहीं समझा। आरोप है कि बच्ची को लगा ग्लूकोज भी बेड पर बहता रहा लेकिन कोई सही करने नहीं आया।

सुबह ड्यूटी पर आई स्टाफ नर्स विभा व संविदा कर्मचारी रंजीत कौर से डॉक्टर बुलाने को कहा तो उन्होंने बाहर से दो इंजेक्शन लिख दिए। परिवार के हंगामा करने के बाद सुबह दस बजे डॉ. एम पांडेय राउंड पर आए तो देखा कि उसकी हालत काफी नाजुक है उसे लखनऊ में इलाज के लिए ले जाने को कहा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

बच्ची को सही समय पर इलाज न मिलने से उसकी मौत हो गई। आरोप है कि अनट्रेंड कर्मचारियों को इमरजेंसी में तैनात किया गया है और जो ट्रेंड थे उन्हें सीएमएस ने वहां से हटा दिया। इतना ही नहीं शव ले जाने के लिए अस्पताल में खड़े दो शव वाहनों में से एक वाहन भी पीड़ित को नसीब नहीं हो सका।             

सीने से लगाकर रोता रहा पिता            
बिटिया की मौत होने के बाद भी पिता उसके शव को सीने से चिपकाए रखा। शिकायत करने भी गया तो बेटी की लाश लेकर गया। अपनी बिटिया के शव को कलेजे से चिपका कर उसे बार बार आंखे खोलने की बात कहकर फफक-फफक कर रो रहा था।      


इलाज में लापरवाही से मासूम की मौत की सूचना नहीं है, अगर शिकायत मिलती है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। इमरजेंसी वार्ड में किसकी ड्यूटी लगाई गई है यह सीएमएस जाने। -डॉ. डीआर सिंह, सीएमओ
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed