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होटलों में बर्बाद हो रहा बचपन
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
Updated Mon, 03 Oct 2016 11:42 PM IST
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पंचर बनाता बाल श्रमिक
- फोटो : अमर उजाला
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जनपद में बाल श्रम पर रोक लगाने के लिए तीन साल पहले बाल श्रमिकों को चिन्हित करने के लिए सर्वे कराया गया था। इसमें करीब 13 सौ बाल श्रमिक चिन्हित किए गए थे। जिनके लिए 25 बालश्रम विद्यालय खोलने थे। लेकिन यह विद्यालय नहीं खोले जा सके।
अब नए सिरे से जनपद में बालश्रम पर रोक लगाने और बाल श्रमिकों को चिन्हित करने के लिए सर्वे कराए जाने के आदेश हैं। अभी तक लखनऊ विश्वविद्यालय की ओर से ही सर्वें के लिए प्रस्ताव आया है। जिले में बाल श्रमिकों की स्थिति जानने व उन्हें चिंह्ति करने के लिए प्रशासन द्वारा वर्ष 2013-14 में कराए गए सर्वे में 1299 बाल श्रमिक मिले थे।
इसमें सभी बाल श्रमिक 9 से 13 आयु वर्ग के थे। चिंह्ति हुए सभी बाल श्रमिक होटल, ढाबों, जरदोजी, आटो मोबाइल, ईंट भट्ठों पर काम करते पाए गए थे। इन बाल श्रमिकों को तीन साल में कक्षा पांच तक की शिक्षा दी जानी थी। साथ ही उन्हें लघु उद्योगों की भी जानकारी दी जानी थी। इस बालश्रमिकों के लिए जनपद में 25 बालश्रम विद्यालय खोले जाने पर सहमति बनी।
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लेकिन यह विद्यालय एनजीओ से संचालित होंगे या प्रशासन द्वारा इसी मुद्दे पर उहापोह बना रहा। बाद में सहमति बनी कि एनजीओ से यह विद्यालय संचालित हाेंगे। इसके लिए एनजीओ की काउंसिलिंग भी कराई गई। लेकिन मामला फिर अधर में लटक गया। इस दौरान सर्वें की छह माह की वैद्यता सभी समाप्त हो गई। वर्तमान में जनपद में एक भी बालश्रम विद्यालय संचालित नहीं हो रहे हैं।
छह माह का लग सकता समय
बालश्रम पर रोक लगाने और खतरनाक उद्योगों में लिप्त बाल श्रमिकों को शिक्षा व व्यवसाय की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए शासन के निर्देश पर एक बार फिर से प्रशासन जनपद में बाल श्रमिकों की गणना की तैयारी कर रहा है। इनकी गणना के लिए शासन से निर्देश भी मिल चुके हैं। गणना के लिए सर्वे लखनऊ विश्वविद्यालय के सोशल वर्क डिपार्टमेंट की ओर से अभी तक प्रस्ताव आया है। तीन साल पहले हुआ सर्वें भी इसी संस्था की ओर से किया गया था।
राष्ट्रीय बालश्रम परियोजना के द्वारा प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। लेकिन अभी तक सिर्फ एक ही प्रस्ताव आने से कार्य शुरू नहीं हो सका है। विभाग के लोगों की माने फिर से गणना करने की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही बाल श्रमिकों की गणना शुरू होने की उम्मीद है। विभाग के लोगों की माने तो यह प्रक्रिया पूर्ण होने में कम से कम छह माह या इससे अधिक समय लग सकता है।
समय-समय पर चलता है अभियान
बालश्रम पर रोक लगाने के लिए श्रम विभाग द्वारा समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। लेकिन श्रम विभाग, राजस्व प्रशासन व पुलिस तीनों विभागों के समन्वय में दिक्कतों के चलते कभी-कभी काफी गैप होता है। करीब चार-पांच माह पहले तीनों विभागों ने टीमें बनाकर अभियान चलाया था। जिसमें कई स्थानों पर छापामारी की गई थी।
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अब नए सिरे से जनपद में बालश्रम पर रोक लगाने और बाल श्रमिकों को चिन्हित करने के लिए सर्वे कराए जाने के आदेश हैं। अभी तक लखनऊ विश्वविद्यालय की ओर से ही सर्वें के लिए प्रस्ताव आया है। जिले में बाल श्रमिकों की स्थिति जानने व उन्हें चिंह्ति करने के लिए प्रशासन द्वारा वर्ष 2013-14 में कराए गए सर्वे में 1299 बाल श्रमिक मिले थे।
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इसमें सभी बाल श्रमिक 9 से 13 आयु वर्ग के थे। चिंह्ति हुए सभी बाल श्रमिक होटल, ढाबों, जरदोजी, आटो मोबाइल, ईंट भट्ठों पर काम करते पाए गए थे। इन बाल श्रमिकों को तीन साल में कक्षा पांच तक की शिक्षा दी जानी थी। साथ ही उन्हें लघु उद्योगों की भी जानकारी दी जानी थी। इस बालश्रमिकों के लिए जनपद में 25 बालश्रम विद्यालय खोले जाने पर सहमति बनी।
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लेकिन यह विद्यालय एनजीओ से संचालित होंगे या प्रशासन द्वारा इसी मुद्दे पर उहापोह बना रहा। बाद में सहमति बनी कि एनजीओ से यह विद्यालय संचालित हाेंगे। इसके लिए एनजीओ की काउंसिलिंग भी कराई गई। लेकिन मामला फिर अधर में लटक गया। इस दौरान सर्वें की छह माह की वैद्यता सभी समाप्त हो गई। वर्तमान में जनपद में एक भी बालश्रम विद्यालय संचालित नहीं हो रहे हैं।
छह माह का लग सकता समय
बालश्रम पर रोक लगाने और खतरनाक उद्योगों में लिप्त बाल श्रमिकों को शिक्षा व व्यवसाय की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए शासन के निर्देश पर एक बार फिर से प्रशासन जनपद में बाल श्रमिकों की गणना की तैयारी कर रहा है। इनकी गणना के लिए शासन से निर्देश भी मिल चुके हैं। गणना के लिए सर्वे लखनऊ विश्वविद्यालय के सोशल वर्क डिपार्टमेंट की ओर से अभी तक प्रस्ताव आया है। तीन साल पहले हुआ सर्वें भी इसी संस्था की ओर से किया गया था।
राष्ट्रीय बालश्रम परियोजना के द्वारा प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। लेकिन अभी तक सिर्फ एक ही प्रस्ताव आने से कार्य शुरू नहीं हो सका है। विभाग के लोगों की माने फिर से गणना करने की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही बाल श्रमिकों की गणना शुरू होने की उम्मीद है। विभाग के लोगों की माने तो यह प्रक्रिया पूर्ण होने में कम से कम छह माह या इससे अधिक समय लग सकता है।
समय-समय पर चलता है अभियान
बालश्रम पर रोक लगाने के लिए श्रम विभाग द्वारा समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। लेकिन श्रम विभाग, राजस्व प्रशासन व पुलिस तीनों विभागों के समन्वय में दिक्कतों के चलते कभी-कभी काफी गैप होता है। करीब चार-पांच माह पहले तीनों विभागों ने टीमें बनाकर अभियान चलाया था। जिसमें कई स्थानों पर छापामारी की गई थी।