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आधा दर्जन अस्पतालों पर छापा, जवाब तलब
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बाराबंकी। सीएमओ के आदेश पर मंगलवार को एसीएमओ की टीम ने शहर के करीब आधा दर्जन अस्पतालों पर छापा मारा। इस दौरान अस्पताल संचालक अस्पतालों के नवीनीकरण संबंधी कोई प्रपत्र नहीं दिखा पाए। जिस पर सभी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।
निजी अस्पताल संचालकों के लिए सीएमओ का आदेश कोई मायने नहीं रखता है। तभी तो बिना लाइसेंस का नवीनीकरण कराए ही धड़ल्ले से अस्पतालों का संचालन किया जा रहा है। सीएमओ ने ऐसे अस्पताल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं। जिसके तहत मंगलवार को एसीएमओ डॉ. आरएन वर्मा ने कमलेश कुमार के साथ सतरिख नाका स्थित आदर्श हॉस्पिटल, देव नर्सिंगहोम, अजंता पॉलीक्लीनिक, आशीर्वाद नर्सिंगहोम, कृपाशंकर हॉस्पिटल समेत आधा दर्जन अस्पतालों पर छापा मारा।
इसकी सूचना मिलते ही अस्पताल संचालकों में हड़कंप मच गया और कई संचालक तो अपने अस्पताल का शटर बंद कर चले गए। एसीएमओ ने बताया कि जब अस्पताल संचालकों से नवीनीकरण के प्रपत्र दिखाने को कहा गया तो ये लोग बगले झांकते नजर आए।
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जबकि इनके यहां मरीजों को भर्ती कर लगातार उपचार किया जा रहा है जोकि पूरी तरह से नियम विपरीत है। ऐसे अस्पताल संचालकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। इस बाबत सीएमओ डॉ. रामजी वर्मा का कहना है कि निर्धारित समय के अंदर जवाब नहीं देने पर अस्पताल संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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निजी अस्पताल संचालकों के लिए सीएमओ का आदेश कोई मायने नहीं रखता है। तभी तो बिना लाइसेंस का नवीनीकरण कराए ही धड़ल्ले से अस्पतालों का संचालन किया जा रहा है। सीएमओ ने ऐसे अस्पताल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं। जिसके तहत मंगलवार को एसीएमओ डॉ. आरएन वर्मा ने कमलेश कुमार के साथ सतरिख नाका स्थित आदर्श हॉस्पिटल, देव नर्सिंगहोम, अजंता पॉलीक्लीनिक, आशीर्वाद नर्सिंगहोम, कृपाशंकर हॉस्पिटल समेत आधा दर्जन अस्पतालों पर छापा मारा।
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इसकी सूचना मिलते ही अस्पताल संचालकों में हड़कंप मच गया और कई संचालक तो अपने अस्पताल का शटर बंद कर चले गए। एसीएमओ ने बताया कि जब अस्पताल संचालकों से नवीनीकरण के प्रपत्र दिखाने को कहा गया तो ये लोग बगले झांकते नजर आए।
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जबकि इनके यहां मरीजों को भर्ती कर लगातार उपचार किया जा रहा है जोकि पूरी तरह से नियम विपरीत है। ऐसे अस्पताल संचालकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। इस बाबत सीएमओ डॉ. रामजी वर्मा का कहना है कि निर्धारित समय के अंदर जवाब नहीं देने पर अस्पताल संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।