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सेहत को नुकसान पहुंचा रही पॉलीथीन
बाराबंकी/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 18 Dec 2015 11:32 PM IST
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सरकार ने भले ही पॉलीथिन के प्रयोग पर भले ही रोक लगा दी हो, लेकिन इस आदेेश का अनुपालन इतनी जल्दी करा पाना आसान नहीं दिखाई दे रहा है। क्योंकि बाजार पॉलीथिन और उसके उत्पाद से भरा पड़ा हुआ है। पॉलीथीन सेहत को नुकसान पहुंचा रही है। वहीं, जिलाधिकारी ने सरकार के आदेश का अनुपालन करने की बात कही है।
जिले में प्रतिदिन लगभग पांच से सात क्विंटल पॉलीथिन की खपत होती है। जिले में न ही पालीथिन बनाए जाने की कोई फैक्ट्री नहीं लगी है। ज्यादातर व्यापारी पॉलीथिन उससे बने उत्पाद लखनऊ और कानपुर से ही लाते हैं। शहर के थोक विक्रेताओं से छोटे व्यापारी पॉलीथिन और उसे बने उत्पाद लेकर जाते हैं और छोटे-छोटे कस्बों में इसकी बिक्री करते हैं। जबकि पॉलीथिन का प्रयोग पर्यावरण के लिए सबसे घातक माना गया है। क्योंकि यह नष्ट नहीं होती है और प्रयोग करने वाले इसे बिना नष्ट किए ही खुले में फेंक देते हैं जिससे इसे मवेशी खा लेते हैं और पाचन न होने की वजह से उनकी मौत हो जाती।
यदि इसे नष्ट किया जाता है तो पर्यावरण को खतरा बढ़ जाता है। पॉलीथिन से होने वाले नुकसान को देखते ही सरकार ने इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है। पॉलीथिन और उससे बने उत्पाद का प्रयोग करने वाले व्यापारियों का कहना है कि एक अनुमान के मुताबिक करोड़ों रुपये की पॉलीथिन और उससे बने उत्पाद बाजार में पड़ा हुआ है। यदि इसकी बिक्री पर एकदम से रोक लगा दी जाएगी तो सैकड़ों व्यापारी फुटपाथ पर आ जाएंगे। इसलिए अदालत के आदेश का अनुपालन होगा लेकिन इसमें कुछ समय जरूर लगेगा।
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बाजार तो पटा पड़ा
पॉलीथिन की बिक्री पर रोक लगा पाना आसान नहीं है। क्योंकि ये अब लोगों की आदत में शुमार हो चुका है। लोग सामान की खरीददारी करने बाजार तो जाते हैं लेकिन सामान रखने के लिए घर से किसी प्रकार का कोई बैग आदि नहीं ले जाते हैं। अब धीरे धीरे उन्हें घर से झोला ले जानेे की आदत डालनी होगी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह कि बाजार में पहले से पॉलीथिन और उसके उत्पाद मौजूद हैं उनका क्या होगा। कुछ मुख्य कस्बों में तो अंकुश लगाया जा सकता है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में रोक लगा पाना बहुत मुश्किल है।
पॉलीथिन के प्रयोग पर रोक लगाकर सरकार ने बहुत ही अच्छा कार्य किया है। क्योंकि पॉलीथिन पर्यावरण के लिए जहां सबसे अधिक खतरा बनती जा रही है वहीं इसका सेवन करने से मवेशी अकारण ही काल के गाल में समा रहे हैं। पालीथिन ऐसी चीज है जिसे यदि जलाया जाता है तो पर्यावरण को खतरा है और न जलाओ तो मवेशियों के लिए खतरा बनती है।
- डॉ. रविन्द्र कुमार, सीएमओ
सरकार ने यदि पालीथिन के प्रयोग पर रोक लगा दी है तो इस आदेश का अक्षरंश: अनुपालन कराया जाएगा और पालीथिन की बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। इसके लिए अधिकारियों को अभियान चलाने के भी आदेश दिए जाएंगे।
- योगेश्वर राम मिश्र, जिलाधिकारी
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जिले में प्रतिदिन लगभग पांच से सात क्विंटल पॉलीथिन की खपत होती है। जिले में न ही पालीथिन बनाए जाने की कोई फैक्ट्री नहीं लगी है। ज्यादातर व्यापारी पॉलीथिन उससे बने उत्पाद लखनऊ और कानपुर से ही लाते हैं। शहर के थोक विक्रेताओं से छोटे व्यापारी पॉलीथिन और उसे बने उत्पाद लेकर जाते हैं और छोटे-छोटे कस्बों में इसकी बिक्री करते हैं। जबकि पॉलीथिन का प्रयोग पर्यावरण के लिए सबसे घातक माना गया है। क्योंकि यह नष्ट नहीं होती है और प्रयोग करने वाले इसे बिना नष्ट किए ही खुले में फेंक देते हैं जिससे इसे मवेशी खा लेते हैं और पाचन न होने की वजह से उनकी मौत हो जाती।
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यदि इसे नष्ट किया जाता है तो पर्यावरण को खतरा बढ़ जाता है। पॉलीथिन से होने वाले नुकसान को देखते ही सरकार ने इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है। पॉलीथिन और उससे बने उत्पाद का प्रयोग करने वाले व्यापारियों का कहना है कि एक अनुमान के मुताबिक करोड़ों रुपये की पॉलीथिन और उससे बने उत्पाद बाजार में पड़ा हुआ है। यदि इसकी बिक्री पर एकदम से रोक लगा दी जाएगी तो सैकड़ों व्यापारी फुटपाथ पर आ जाएंगे। इसलिए अदालत के आदेश का अनुपालन होगा लेकिन इसमें कुछ समय जरूर लगेगा।
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बाजार तो पटा पड़ा
पॉलीथिन की बिक्री पर रोक लगा पाना आसान नहीं है। क्योंकि ये अब लोगों की आदत में शुमार हो चुका है। लोग सामान की खरीददारी करने बाजार तो जाते हैं लेकिन सामान रखने के लिए घर से किसी प्रकार का कोई बैग आदि नहीं ले जाते हैं। अब धीरे धीरे उन्हें घर से झोला ले जानेे की आदत डालनी होगी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह कि बाजार में पहले से पॉलीथिन और उसके उत्पाद मौजूद हैं उनका क्या होगा। कुछ मुख्य कस्बों में तो अंकुश लगाया जा सकता है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में रोक लगा पाना बहुत मुश्किल है।
पॉलीथिन के प्रयोग पर रोक लगाकर सरकार ने बहुत ही अच्छा कार्य किया है। क्योंकि पॉलीथिन पर्यावरण के लिए जहां सबसे अधिक खतरा बनती जा रही है वहीं इसका सेवन करने से मवेशी अकारण ही काल के गाल में समा रहे हैं। पालीथिन ऐसी चीज है जिसे यदि जलाया जाता है तो पर्यावरण को खतरा है और न जलाओ तो मवेशियों के लिए खतरा बनती है।
- डॉ. रविन्द्र कुमार, सीएमओ
सरकार ने यदि पालीथिन के प्रयोग पर रोक लगा दी है तो इस आदेश का अक्षरंश: अनुपालन कराया जाएगा और पालीथिन की बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। इसके लिए अधिकारियों को अभियान चलाने के भी आदेश दिए जाएंगे।
- योगेश्वर राम मिश्र, जिलाधिकारी