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घाघरा में समाए तीन मकान
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
Updated Mon, 22 Aug 2016 11:38 PM IST
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घाघरा में आई बाढ़
- फोटो : अमर उजाला
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घाघरा नदी की धारा की चपेट में आकर खुज्जी गांव के तीन लोगों मकान सोमवार को बह गए। वहीं इस गांव के अब तक करीब 45 लोगों के मकान बह चुके हैं। यहां पर बना प्राथमिक विद्यालय भी नदी की चपेट में आ गया है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के खुज्जी गांव निवासी रामदीन, विलास और दुलारे ने बताया कि नदी के पानी की चपेट में आकर हम लोगों के मकान बह गए। इसके साथ ही इन घरों में रखा गृहस्थी का सामान भी बह गया है। परिवार के लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया है। जो थोड़ा बहुत खाने का सामान निकाल पाए वह निकाल कर सुरक्षित स्थान पर रखवा दिया गया है।
नदी का पानी लगातार लोगों के मकानों को अपनी चपेट में लेता जा रहा है। जिससे हम लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यहीं नहीं गांव में बना प्राथमिक विद्यालय भी नदी के पानी की चपेट में आ गया है लेकिन हम लोगों की समस्याओं को कोई सुनने वाला नहीं है। टिकैतनगर प्रतिनिधि के अनुसार रायपुर के सेवक अपनी भैंसों को लेकर जा रहे है इनका कहना है कि अब हर तरफ पानी ही पानी है।
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महीने भर से फसलें डूबी पड़ी हैं। घरों मे पानी भरा हुआ है। ऐसे में घर छोड़ कहीं और जाकर बसने के शिवा कोई चारा नही बचा है। थोड़ा सा आगे बढ़ते ही परसावल निवासी इंस्पेक्टर यादव सरकारी इंतजाम पर खुलकर बोले। वह कहते है कि हर साल बांध की मरम्मत पर करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं। इसके बाद भी बंधे को नहीं बचा पा रहे हैं।
वहीं समरपाल ने कहा कि यहां पर नेता तो बहुत हैं। लेकिन यह नेता, अधिकारी और ठेकेदार मिलकर खेल कर रहे हैं। नेताओं के करीबियों को ही ठेका मिलता है। आधिकारी खामोश रहते हैं। ठेकेदार काम नहीं करते हैं। जब बाढ़ आ जाती है तो सब दिख जाते हैं। इससे पहले हमारा हाल चाल पूछने कोई नही आता अगर बांध कटने से पहले इंतजाम किये जाते तो हमारी स्थित ऐसी नही होती।
बाढ़ पीड़ितों की समस्याओं को दूर करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। संबंधित क्षेत्र के एसडीएम लगातार पीड़ितों के संपर्क में है और राशन आदि का वितरण भी करा रहे हैं। खुज्जी गांव में तीन और घर नदी में बहने की जानकारी नहीं है इसकी जांच कराई जाएगी। -हरिकेश चौरसिया, अपर जिलाधिकारी
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बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के खुज्जी गांव निवासी रामदीन, विलास और दुलारे ने बताया कि नदी के पानी की चपेट में आकर हम लोगों के मकान बह गए। इसके साथ ही इन घरों में रखा गृहस्थी का सामान भी बह गया है। परिवार के लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया है। जो थोड़ा बहुत खाने का सामान निकाल पाए वह निकाल कर सुरक्षित स्थान पर रखवा दिया गया है।
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नदी का पानी लगातार लोगों के मकानों को अपनी चपेट में लेता जा रहा है। जिससे हम लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यहीं नहीं गांव में बना प्राथमिक विद्यालय भी नदी के पानी की चपेट में आ गया है लेकिन हम लोगों की समस्याओं को कोई सुनने वाला नहीं है। टिकैतनगर प्रतिनिधि के अनुसार रायपुर के सेवक अपनी भैंसों को लेकर जा रहे है इनका कहना है कि अब हर तरफ पानी ही पानी है।
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महीने भर से फसलें डूबी पड़ी हैं। घरों मे पानी भरा हुआ है। ऐसे में घर छोड़ कहीं और जाकर बसने के शिवा कोई चारा नही बचा है। थोड़ा सा आगे बढ़ते ही परसावल निवासी इंस्पेक्टर यादव सरकारी इंतजाम पर खुलकर बोले। वह कहते है कि हर साल बांध की मरम्मत पर करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं। इसके बाद भी बंधे को नहीं बचा पा रहे हैं।
वहीं समरपाल ने कहा कि यहां पर नेता तो बहुत हैं। लेकिन यह नेता, अधिकारी और ठेकेदार मिलकर खेल कर रहे हैं। नेताओं के करीबियों को ही ठेका मिलता है। आधिकारी खामोश रहते हैं। ठेकेदार काम नहीं करते हैं। जब बाढ़ आ जाती है तो सब दिख जाते हैं। इससे पहले हमारा हाल चाल पूछने कोई नही आता अगर बांध कटने से पहले इंतजाम किये जाते तो हमारी स्थित ऐसी नही होती।
बाढ़ पीड़ितों की समस्याओं को दूर करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। संबंधित क्षेत्र के एसडीएम लगातार पीड़ितों के संपर्क में है और राशन आदि का वितरण भी करा रहे हैं। खुज्जी गांव में तीन और घर नदी में बहने की जानकारी नहीं है इसकी जांच कराई जाएगी। -हरिकेश चौरसिया, अपर जिलाधिकारी