घाघरा नदी उफान पर अलर्ट
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रामनगर/ गनेशपुर (बाराबंकी)। नेपाल से पानी छोड़े जाने के चलते घाघरा में जल स्तर लाल निशान की ओर बढ़ रहा है जिससे तराई में हलचल शुरू हो गई है। नदी का जलस्तर बढ़ता देख प्रशासन भी सतर्क हो गया है। हालांकि दोपहर बाद नदी के जलस्तर में ठहराव आ गया है। नदी का पानी अभी खतरे के निशान से नीचे 105.976 पर बह रहा है। जबकि खतरे का निशान 106.076 पर है।
बनवसा से 2 लाख 13 हजार क्यूसेक पानी शारदा बैराज में छोड़े जाने के बाद से घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ना तय माना जा रहा था। प्रशासन इसको लेकर सतर्क हो गया था। नदी का जलस्तर देर रात से बढ़ता देख तराई के वासियों में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में इसकी सूचना जिला प्रशासन को दी गई। जानकारी मिलते ही प्रशासनिक अमला हरकत में आया और बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मचारियों को पूरी तरह से मुस्तैद रहने के आदेश जारी कर दिए गए। हालांकि दोपहर बाद नदी के बढ़ते जलस्तर में ठहराव आ गया। नदी का जलस्तर 105.976 पर बह रहा है जबकि खतरे का निशान 106.076 पर है।
बताते चले की घाघरा में आने वाली बाढ़ जिले की चार तहसीलों फतेहपुर, रामनगर, सिरौलीगौसपुर और रामसनेहीघाट के सैकड़ों गांवों को प्रभावित करता है। सबसे ज्यादा रामनगर और इसके बाद सिरौलीगौसपुर की आबादी प्रभावित होती है। बाढ़ आने पर यहां के लोग तटबंधों पर घरों की छतों पर और मचान बनकर जीवन गुजारते हैं। कभी कभार तो महीनों तक तटबंधों पर रहना पड़ता है, लेकिन इस बार बाढ़ से निपटने को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह से तैयारी का दावा कर रहा है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में इसको लेकर कई बार बैठकें भी हो चुकी हैं। डीएम की सक्रियता को देखते हुए मातहत भी बाढ़ को लेकर मुस्तैद दिख रहे है। प्रशासनिक दावा है कि चारों तहसीलों के एसडीएम नदी के जलस्तर पर बराबर नजर रखे हुए हैं।
घाघरा नदी में आने वाली बाढ़ से निपटने को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है। बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मचारियों को पूरी तरह से मुस्तैद रहने के आदेश दिए गए हैं। बाढ़ से प्रभावित होने वाली तहसीलों के एसडीएम को हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
हरिकेश चौरसिया, अपर जिलाधिकारी