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घरों में घुसा पानी, तटबंधों पर जिंदगानी
Amarujala
Updated Fri, 17 Aug 2018 12:07 AM IST
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लोगों को परेशानी
- फोटो : Amarujala
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घाघरा नदी के पानी से तराई के हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं। घरों में पानी भर जाने की वजह बाढ़ पीड़ितों की जिंदगी छतों, तटबंधों या फिर गांव में बनाए गए मचानों पर बीत रही है। बाढ़ पीड़ितों में प्रशासन द्वारा बांटी गई राहत सामग्री भी नाकाफी साबित हो रही है। दो वक्त की रोटी और मवेशियों के लिए चारा जुटाना भी इनके लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। वहीं घाघरा नदी का पानी खतरे के निशान से 70 सेमी ऊपर पहुंचकर स्थिर हो गया है।
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घाघरा नदी का पानी खतरे के निशान से 106.076 से बढ़कर 106.776 पर पहुंचकर स्थिर हो गया है। लेकिन जिन पांच दर्जन गांवों में पानी भरा हुआ है वहां के हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं। गांव के ज्यादातर लोग परिवारीजनों और मवेशियों के साथ तटबंधों पर जीवन गुजार रहे हैं। इसके अलावा विषैल जीव जंतुओं का भी खतरा बना हुआ है। जो लोग तटबंधों पर तिरपाल के नीचे जीवन बिता रहे हैं उनका हाल बेहाल है। वहीं घरो में जो अनाज बचा था वह दोबारा आई बाढ़ अपने साथ बहा ले गई। अब बाढ़ पीड़ितों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है लेकिन इनकी समस्या का हल प्रशासन भी नहीं निकाल पा रहा है।
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इन गांवों में घुसा बाढ़ का पानी
टिकैतनगर क्षेत्र के सनावा, टेपरा, बधौली पुरवा, सरइंया, भौरी कोल, गोबरहा, तेलवारी, करोनी, अतरसुइयां, कोठरी गौरिया, सेमरी, गौररीपुरवा, बसंतपुर, परसावल, रायपुर, नैपुरा, कमियार, ढेमा, किठुली, लिलार, सोनबरसा, असवा, नऊवन पुरवा, नया पुरवा आदि। इसके अलावा सूरतगंज और रामनगर के कंचनापुर, बबुरी, सरसंडा, बेलहरी, केदारीपुर, बाबा पुरवा, बतनेरा, बलाई पुरवा, हेतमापुर, ललपुरवा, सुंदरनगर, कोडरी, मदरहा, सांई तकिया, कोइली पुरवा, सकतापुर, गडरियनपुरवा, पर्वतपुर, मिश्रीपुरवा, गायघाट, चौधरीपुरवा, माधवपुरवा, बिझला, नयापुरवा, महोडिया, जमका, खुज्जी, फाजिलपुर, पूरनपुर, रयकोलवा आदि तक में अभी भी बाढ़ का पानी भरा हुआ है। इन गांवों के ज्यादातर लोग तटबंधों पर तिरपाल के नीचे जीवन गुजार रहे हैं।
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