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अब भी 60 गांवों में भरा है बाढ़ का पानी
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बाराबंकी। सरयू नदी का जलस्तर तेजी के साथ घट रहा है लेकिन तराई के 60 से ज्यादा गांवों में अभी भी नदी का पानी भरा हुआ है। जिससे यहां के बाढ़ पीड़ितों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं नदी के पानी की चपेट में आने से फसलों के डूबने से बाढ़ पीड़ित परिवार बर्बादी की कगार पर पहुंच गए हैं।
एल्गिन ब्रिज पर बने कंट्रोल रूम के अनुसार सरयू नदी का पानी काफी तेजी से घट रहा है। पानी खतरे के निशान से महज 48 सेमी ऊपर बह रहा है। जिस तेजी से पानी घट रहा है इससे उम्मीद है कि बृहस्पतिवार तक नदी का पानी खतरे के निशान से नीचे आ जाएगा। लेकिन तराई के कोरियनपुरवा, तपेसिपाह, दुर्गापुर, लहडरा, कोड़री, हेतमापुर, कंचनापुर, सुंदरनगर आदि समेत दो दर्जन गांवों में अभी भी नदी का पानी भरा हुआ है।
कोटवाधाम में भी नदी का जलस्तर भले ही घट रहा हो लेकिन तराई के कहारनपुरवा, सनावा, विहड़, टेपरा, बघौलीपुरवा, गोबरहा, नव्वनपुरवा, पारा, सिरौलीगुंग, कोठीडीहा, भयकपुरवा, इटहुआ पूर्व समेत चार दर्जन गांवों में बाढ़ का पानी अभी भी भरा हुआ है। यहां के पीड़ित अलीनगर रानीमऊ बांध पर अपना आशियाना बना कर रह रहे है।
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गुड्डू, मिथलेश, होली सिंह, राधे चौहान, राजिन्दर आदि कहते हैं कि बाढ़ की चपेट में आकर हम लोगों की फसलें पूरी तरह से चौपट हो गई हैं जिससे हम लोग पूरी तरह से बर्बादी की कगार पर पहुंच गए हैं। लेकिन प्रशासन द्वारा इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है जिससे हम लोगों को भविष्य की चिंता खाए जा रही है।
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एल्गिन ब्रिज पर बने कंट्रोल रूम के अनुसार सरयू नदी का पानी काफी तेजी से घट रहा है। पानी खतरे के निशान से महज 48 सेमी ऊपर बह रहा है। जिस तेजी से पानी घट रहा है इससे उम्मीद है कि बृहस्पतिवार तक नदी का पानी खतरे के निशान से नीचे आ जाएगा। लेकिन तराई के कोरियनपुरवा, तपेसिपाह, दुर्गापुर, लहडरा, कोड़री, हेतमापुर, कंचनापुर, सुंदरनगर आदि समेत दो दर्जन गांवों में अभी भी नदी का पानी भरा हुआ है।
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कोटवाधाम में भी नदी का जलस्तर भले ही घट रहा हो लेकिन तराई के कहारनपुरवा, सनावा, विहड़, टेपरा, बघौलीपुरवा, गोबरहा, नव्वनपुरवा, पारा, सिरौलीगुंग, कोठीडीहा, भयकपुरवा, इटहुआ पूर्व समेत चार दर्जन गांवों में बाढ़ का पानी अभी भी भरा हुआ है। यहां के पीड़ित अलीनगर रानीमऊ बांध पर अपना आशियाना बना कर रह रहे है।
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गुड्डू, मिथलेश, होली सिंह, राधे चौहान, राजिन्दर आदि कहते हैं कि बाढ़ की चपेट में आकर हम लोगों की फसलें पूरी तरह से चौपट हो गई हैं जिससे हम लोग पूरी तरह से बर्बादी की कगार पर पहुंच गए हैं। लेकिन प्रशासन द्वारा इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है जिससे हम लोगों को भविष्य की चिंता खाए जा रही है।