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बाढ़ के पानी और बारिश ने बढ़ा दी मुश्किलें
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बाराबंकी। भले ही घाघरा नदी के जलस्तर में कमी आयी हो किंतु तराई वासियों की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। ऊपर से लगातार दो दिन से हो रही बारिश से बाढ़ पीड़ितों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। एक दर्जन से अधिक गांवों में अभी भी नदी का पानी भरा हुआ है। गांवों में हुए जलभराव से संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा और भी बढ़ गया है।
बाढ़ पीड़ितों को दो वक्त की रोटी के साथ मवेशियों के लिए चारे का संकट खड़ा होता जा रहा है। घाघरा नदी का पानी कम होने के बाद भी तराई के करीब एक दर्जन से अधिक गांवों बधौली पुरवा, टेपरा, भैरवकोल, सरायं सुरजन, तेलवारी, सनावा, भयक पुरवा, परसावल, नव्वनपुरवा में अभी भी पानी भरा हुआ है।
वहीं गांवों को जाने वाले संपर्क मार्गों पर पानी भरा होने और पर्याप्त संख्या में नाव न मिल पाने से बाढ़ पीड़ितों को आवागमन में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बाढ़ पीड़ित निजी संसाधनों से गांवों से तटबंध तक पहुंच रहे हैं।
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वहीं जो लोग अलीनगर रानीमऊ तटबंध पर बसे हुए हैं, उनकी दुश्वारियों में कमी नहीं आ रही है। तहसीलदार अखिलेश कुमार ने बताया कि जो परिवार बांध पर बसे हैं, उन्हें जल्द ही बारिश से बचने के लिए तिरपाल के साथ ही हर संभव मदद उपलब्ध कराई जाएगी।
अलीनगर रानीमऊ तटबंध के अंदर बसे गांवों के लोग बाढ़ के पानी से तबाह हैं तो वहीं बांध के इस पार बने घरों को बारिश के पानी ने अपने आगोश में ले लिया है। सुधा और अकबाल के घर के अंदर बरसात का पानी भरा हुआ है।
इसके चलते इन दो परिवारों के सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है। इन लोगों ने बताया कि बांध में बने वॉल के बंद होने से पानी नहीं निकल पा रहा है जिससे उनके घरों के अंदर पानी भर गया है।
जिलाधिकारी डॉ. आदर्श सिंह ने बुधवार शाम क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र खजुरी चिर्रा गांव का निरीक्षण किया और बाढ़ पीड़ितों केे सामने आ रही समस्याओं को जाना। इस दौरान डीएम ने एसडीएम रामसनेेहीघाट राजीव शुक्ला को निर्देश दिये कि बाढ़ पीड़ितों के लिये नाव आदि की व्यवस्था के साथ डॉक्टरों को तैनात किया जाए।
डीएम ने यह भी कहा कि बाढ़ पीड़ित लोगों को किसी सुरक्षित स्थान पर बसाया जाएगा। वहीं रामनगर प्रतिनिधि के अनुसार एडीएम संदीप गुप्ता ने एसडीएम जितेंद्र कटियार व तहसीलदार डॉ. राहुल वत्स व रामदेव निषाद के साथ तहसील क्षेत्र के बाढ़ग्रस्त गांव सुंदरनगर, कोड़री, लालपुरवा, कचनापुर व हेतमापुर का स्थलीय निरीक्षण किया और बाढ़ पीड़ितों की समस्याएं देखी। इसके साथ ही अधिकारियों को निर्देशित भी किया।
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बाढ़ पीड़ितों को दो वक्त की रोटी के साथ मवेशियों के लिए चारे का संकट खड़ा होता जा रहा है। घाघरा नदी का पानी कम होने के बाद भी तराई के करीब एक दर्जन से अधिक गांवों बधौली पुरवा, टेपरा, भैरवकोल, सरायं सुरजन, तेलवारी, सनावा, भयक पुरवा, परसावल, नव्वनपुरवा में अभी भी पानी भरा हुआ है।
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वहीं गांवों को जाने वाले संपर्क मार्गों पर पानी भरा होने और पर्याप्त संख्या में नाव न मिल पाने से बाढ़ पीड़ितों को आवागमन में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बाढ़ पीड़ित निजी संसाधनों से गांवों से तटबंध तक पहुंच रहे हैं।
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वहीं जो लोग अलीनगर रानीमऊ तटबंध पर बसे हुए हैं, उनकी दुश्वारियों में कमी नहीं आ रही है। तहसीलदार अखिलेश कुमार ने बताया कि जो परिवार बांध पर बसे हैं, उन्हें जल्द ही बारिश से बचने के लिए तिरपाल के साथ ही हर संभव मदद उपलब्ध कराई जाएगी।
अलीनगर रानीमऊ तटबंध के अंदर बसे गांवों के लोग बाढ़ के पानी से तबाह हैं तो वहीं बांध के इस पार बने घरों को बारिश के पानी ने अपने आगोश में ले लिया है। सुधा और अकबाल के घर के अंदर बरसात का पानी भरा हुआ है।
इसके चलते इन दो परिवारों के सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है। इन लोगों ने बताया कि बांध में बने वॉल के बंद होने से पानी नहीं निकल पा रहा है जिससे उनके घरों के अंदर पानी भर गया है।
जिलाधिकारी डॉ. आदर्श सिंह ने बुधवार शाम क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र खजुरी चिर्रा गांव का निरीक्षण किया और बाढ़ पीड़ितों केे सामने आ रही समस्याओं को जाना। इस दौरान डीएम ने एसडीएम रामसनेेहीघाट राजीव शुक्ला को निर्देश दिये कि बाढ़ पीड़ितों के लिये नाव आदि की व्यवस्था के साथ डॉक्टरों को तैनात किया जाए।
डीएम ने यह भी कहा कि बाढ़ पीड़ित लोगों को किसी सुरक्षित स्थान पर बसाया जाएगा। वहीं रामनगर प्रतिनिधि के अनुसार एडीएम संदीप गुप्ता ने एसडीएम जितेंद्र कटियार व तहसीलदार डॉ. राहुल वत्स व रामदेव निषाद के साथ तहसील क्षेत्र के बाढ़ग्रस्त गांव सुंदरनगर, कोड़री, लालपुरवा, कचनापुर व हेतमापुर का स्थलीय निरीक्षण किया और बाढ़ पीड़ितों की समस्याएं देखी। इसके साथ ही अधिकारियों को निर्देशित भी किया।