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धान लदी ट्रॉलियों के साथ किसानों ने डाला डेरा
बाराबंकी
Updated Mon, 04 Dec 2017 11:32 PM IST
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गन्ना संस्थान परिसर में धरना-प्रदर्शन करते भाकियू कार्यकर्ता।
- फोटो : अमर उजाला
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बढ़ी बिजली दरों को वापस लिए जाने की मांग को लेकर किसानों ने सोमवार को धान लदी ट्रॉलियों के साथ गन्ना कार्यालय परिसर में डेरा डाल दिया है। किसान धान लदी ट्रॉलियों के साथ लखनऊ कूच करने की मांग पर अड़े हुए हैं। इस दौरान अधिकारियों ने किसानों से वार्ता भी की लेकिन बात नहीं बन सकी।
धरने को नेतृत्व कर रहे भाकियू के प्रांतीय उपाध्यक्ष रामकिशोर पटेल का कहना है कि धान खरीद में किसानों से भेदभाव किया जा रहा है। जिन किसानों ने नहरों से फ्री में फसलों की सिंचाई की, उनका धान भी उसी दर पर लिया जा रहा है और जिन किसानों ने टयूबवेल से सिंचाई की उनका धान भी उसी भाव पर लिया जा रहा है।
लिहाजा यह भेदभाव दूर होना चाहिए और किसानों का बिजली का बिल माफ किया जाना चाहिए। इसके अलावा जो बिजली की दरें बढ़ाई गई हैं उसे भी वापस लिया जाए नहीं तो किसान इससे भी बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे। कहा कि किसान धान लदी ट्रॉलियां लेकर लखनऊ इसलिए जाना चाह रहे हैं कि वह सरकार को बताना चाहते हैं कि बिजली बढ़ाई गई दरों से किसानों को कितना नुकसान होगा।
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आज के दौर में जो किसान फसलों की लागत नहीं निकाल पा रहा है वह बिजली की इतनी ज्यादा वृद्धि को किस प्रकार सहेगा। धान लदी ट्रॉलियां लेकर आए किसानों का कहना है कि हम लोगों को आगे की फसलों की बोआई के लिए पैसे की जरूरत हैं जबकि क्रय केंद्रों पर धान नहीं तौला जाता है।
वहीं शाम को अपर जिलाधिकारी अनिल कुमार सिंह, डिप्टी आरएमओ प्रभाकांत द्विवेदी अन्य अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे और किसानों से वार्ता की। एडीएम ने बताया कि किसानों की मांग है कि बढ़ी बिजली की दरों को कम किया जाए, इसी मुद्दे को लेकर वह धान लदी ट्रॉलियों के साथ लखनऊ कूच करना चाह रहे हैं जो कि संभव नहीं है। किसानों को समझा दिया गया है इसके बाद भी नहीं माने तो फिर वार्ता की जाएगी।
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धरने को नेतृत्व कर रहे भाकियू के प्रांतीय उपाध्यक्ष रामकिशोर पटेल का कहना है कि धान खरीद में किसानों से भेदभाव किया जा रहा है। जिन किसानों ने नहरों से फ्री में फसलों की सिंचाई की, उनका धान भी उसी दर पर लिया जा रहा है और जिन किसानों ने टयूबवेल से सिंचाई की उनका धान भी उसी भाव पर लिया जा रहा है।
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लिहाजा यह भेदभाव दूर होना चाहिए और किसानों का बिजली का बिल माफ किया जाना चाहिए। इसके अलावा जो बिजली की दरें बढ़ाई गई हैं उसे भी वापस लिया जाए नहीं तो किसान इससे भी बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे। कहा कि किसान धान लदी ट्रॉलियां लेकर लखनऊ इसलिए जाना चाह रहे हैं कि वह सरकार को बताना चाहते हैं कि बिजली बढ़ाई गई दरों से किसानों को कितना नुकसान होगा।
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आज के दौर में जो किसान फसलों की लागत नहीं निकाल पा रहा है वह बिजली की इतनी ज्यादा वृद्धि को किस प्रकार सहेगा। धान लदी ट्रॉलियां लेकर आए किसानों का कहना है कि हम लोगों को आगे की फसलों की बोआई के लिए पैसे की जरूरत हैं जबकि क्रय केंद्रों पर धान नहीं तौला जाता है।
वहीं शाम को अपर जिलाधिकारी अनिल कुमार सिंह, डिप्टी आरएमओ प्रभाकांत द्विवेदी अन्य अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे और किसानों से वार्ता की। एडीएम ने बताया कि किसानों की मांग है कि बढ़ी बिजली की दरों को कम किया जाए, इसी मुद्दे को लेकर वह धान लदी ट्रॉलियों के साथ लखनऊ कूच करना चाह रहे हैं जो कि संभव नहीं है। किसानों को समझा दिया गया है इसके बाद भी नहीं माने तो फिर वार्ता की जाएगी।