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Barabanki News: किसानों की बनेगी फार्मर रजिस्ट्री, मिलेगा यूनिक आईडी
Sun, 30 Jun 2024 02:59 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sun, 30 Jun 2024 02:59 AM IST
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बाराबंकी। अब खेती किसानी से जुड़ी जमीन की निगरानी भी पूरी तरह से डिजिटलयुक्त होगी। इसके लिए 3,88,587 हेक्टेयर क्षेत्रफल में खेती करने वाले जिले के पांच लाख सात हजार किसानों की फार्मर रजिस्ट्री बनाई जाएगी। इसके लिए उन्हें एक यूनिक आईडी मिलेगी। साथ ही उनके अलग-अलग जगहों पर स्थित खेत भी एक ही जगह पर दर्ज होंगे। फार्मर रजिस्ट्री की मदद से हर खेत की फसलों, खाद एवं दवाओं की मात्रा के बारे में भी सटीक आंकड़े मिलेंगे।
इससे किसानों का डिजिटल डाटा बेस तैयार होने के साथ ही खतौनी के साथ उनका खसरा तक ऑनलाइन हो जाएगा। जिले में पांच लाख सात हजार किसान पीएम सम्मान निधि का लाभ ले रहे हैं। इन सभी की खतौनी ऑनलाइन है। इससे अगर किसी किसान के खेत अलग-अलग है तो उनकी गाटा संख्या व खतौनी भी अलग होती हैं। इससे किसी भी योजना का फायदा किसानों को देने के लिए उनका सत्यापन करना पड़ता है। इस परेशानी को दूर करने के लिए अब किसानों की फार्मर रजिस्ट्री बनाने के साथ ही उनका यूनिक आईडी भी बनाई जाएगी। इसके लिए खसरा खतौनी में दर्ज अभिलेख का उपयोग किया जाएगा।
फार्मर रजिस्ट्री में किसान का नाम, पिता का नाम, स्वामित्व वाले समस्त गाटा संख्या, सहखातेदार होने की स्थिति में गाटे में किसान का अंश, मोबाइल नंबर, आधार संख्या, ईकेवाईसी विवरण दर्ज होगा। इससे किसी भी प्रकार के स्वामित्व का हस्तांतरण (विरासत, बैनामा) होने पर फार्म रजिस्ट्री स्वतः ही अपडेट हो जाएगी। भविष्य में किसान सम्मान निधि समेत किसानों से जुड़ी सभी योजनाओं का लाभ उन्हें इसी के आधार पर मिलेगा।
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फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से तैयार होने वाले डाटा बेस की मदद से खेत की मिट्टी और जलवायु के हिसाब से कौन सी फसल बोनी चाहिए। किस किस्म का बीज खरीदना चाहिए। बेहतर पैदावार के लिए कितना खाद, पानी और दवा की जरूरत है, इसकी जानकारी भी किसानों को आसानी से मिल सकेगी। किसान अपने आप भी मोबाइल एप के जरिए अथवा जन सुविधा केंद्रों पर जाकर फार्मर रजिस्ट्री तैयार करा सकेंगे।
.डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर फॉर एग्रीकल्चर के तहत फार्मर रजिस्ट्री को तैयार किया जाएगा। इसका अभियान जिले में आठ जुलाई से होगा। इसके तहत आयोजित होने वाले शिविर में कृषि विभाग, राजस्व व पंचायत विभाग के कर्मचारी संयुक्त स्तर पर शिविर आयोजित करेंगे।
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इससे किसानों का डिजिटल डाटा बेस तैयार होने के साथ ही खतौनी के साथ उनका खसरा तक ऑनलाइन हो जाएगा। जिले में पांच लाख सात हजार किसान पीएम सम्मान निधि का लाभ ले रहे हैं। इन सभी की खतौनी ऑनलाइन है। इससे अगर किसी किसान के खेत अलग-अलग है तो उनकी गाटा संख्या व खतौनी भी अलग होती हैं। इससे किसी भी योजना का फायदा किसानों को देने के लिए उनका सत्यापन करना पड़ता है। इस परेशानी को दूर करने के लिए अब किसानों की फार्मर रजिस्ट्री बनाने के साथ ही उनका यूनिक आईडी भी बनाई जाएगी। इसके लिए खसरा खतौनी में दर्ज अभिलेख का उपयोग किया जाएगा।
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फार्मर रजिस्ट्री में किसान का नाम, पिता का नाम, स्वामित्व वाले समस्त गाटा संख्या, सहखातेदार होने की स्थिति में गाटे में किसान का अंश, मोबाइल नंबर, आधार संख्या, ईकेवाईसी विवरण दर्ज होगा। इससे किसी भी प्रकार के स्वामित्व का हस्तांतरण (विरासत, बैनामा) होने पर फार्म रजिस्ट्री स्वतः ही अपडेट हो जाएगी। भविष्य में किसान सम्मान निधि समेत किसानों से जुड़ी सभी योजनाओं का लाभ उन्हें इसी के आधार पर मिलेगा।
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फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से तैयार होने वाले डाटा बेस की मदद से खेत की मिट्टी और जलवायु के हिसाब से कौन सी फसल बोनी चाहिए। किस किस्म का बीज खरीदना चाहिए। बेहतर पैदावार के लिए कितना खाद, पानी और दवा की जरूरत है, इसकी जानकारी भी किसानों को आसानी से मिल सकेगी। किसान अपने आप भी मोबाइल एप के जरिए अथवा जन सुविधा केंद्रों पर जाकर फार्मर रजिस्ट्री तैयार करा सकेंगे।
.डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर फॉर एग्रीकल्चर के तहत फार्मर रजिस्ट्री को तैयार किया जाएगा। इसका अभियान जिले में आठ जुलाई से होगा। इसके तहत आयोजित होने वाले शिविर में कृषि विभाग, राजस्व व पंचायत विभाग के कर्मचारी संयुक्त स्तर पर शिविर आयोजित करेंगे।