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Barabanki News: तय समय के बाद भी अधूरा लैब निर्माण, जांच कार्य बाधित
Tue, 15 Jul 2025 12:52 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Tue, 15 Jul 2025 12:52 AM IST
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बाराबंकी। जिला महिला अस्पताल में बनाई जा रही आधुनिक लैब का काम तय मियाद के बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। कार्यदायी संस्था द्वारा बरती जा रही इस लापरवाही का खामियाजा प्रसूताओं के साथ ही जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को भी भुगतना पड़ रहा है। लैब शुरू न हो पाने के कारण उन्हें कई तरह की महंगी जांच मनमानी दर पर निजी जांच केंद्रों पर कराने की परेशानी उठाना पड़ रही है।
जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 300 से 350 प्रसूताएं इलाज के लिए आती हैं। इन्हें हर दिन करीब 150 से 200 जांचे कराना पड़ती हैं। इसी प्रकार जिला अस्पताल की ओपीडी 15 सौ से 17 सौ के करीब रहती है। यहां पर ओपीडी में परामर्श के बाद 400 से 500 जांचे हर कराई जाती हैं। इनमें से विटामिन डी, विटामिन बी-12, थायरायड, माइक्रो बॉयलॉजिकल एनालिसिस समेत कई महत्वपूर्ण जांचे अस्पताल में बनी पैथालॉजी सेंटरों पर नहीं हो पाती हैं।
जांच न होने से मरीजों को होने वाली परेशानी दूर कराने के लिए ही जिला महिला अस्पताल में बनी बीएसएल लैब-2 की जगह पर 89 लाख रुपये की लागत से अत्याधुनिक लैब का निर्माण कार्य कराने का निर्णय हुआ था। अत्याधुनिक लैब में एक मीडिया प्रीपरेशन सेंटर के साथ ही वाशिंग और स्ट्रलाइजेशन एरिया के साथ ही सैंपल रिसीविंग और रिपोर्टिंग एरिया भी बनाया जाना है।
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इस लैब को बनाने का प्रमुख उद्देश्य मरीजों को सभी तरह की जांच सुविधा एक ही छत के नीचे परिसर में ही उपलब्ध कराने का था। शासन के निर्देशानुसार लैब का निर्माण कार्य जून 2025 तक पूरा हो जाना चाहिए था। लेकिन कार्यदायी संस्था द्वारा काफी धीमी रफ्तार से कराए जा रहे काम के कारण लैब का निर्माण कार्य तय मियाद के बाद भी अधूरा पड़ा है। जिम्मेदारों की माने तो लैब के संचालित होने में अभी कम से कम पांच माह का समय और लग सकता है। एसीएमओ प्रशासन डॉ. डीके श्रीवास्तव ने बताया कि अब तक लैब के निर्माण पूरा हो जाना चाहिए था लेकिन कुछ तकनीकी दिक्कतों की वजह से इसे क्रियाशील करने में देरी हो रही है। अधूरे निर्माण कार्य को जल्दी पूरा कराया जाएगा।
लैब निर्माण से मिलेगी इन जांचों की सुविधा
निर्माणाधीन लैब के क्रियाशील होने से क्लीनिकल पैथालॉजी, हेमटोलॉजी, साइटोलॉजी, बायोकमेस्टि्री, माइक्रो बायोलॉजी के तहत आने वाली सभी तरह की जांचों की सुविधा मरीजों को अस्पताल में ही उपलब्ध हो सकेगी। इसके अलावा बैक्टीरियोलॉजी, माइकोबाइक्टीरियोलॉजी, सीरोलॉजी, मोलेकूलर बायोलॉजी, वाइरोलॉजी के साथ ही कई अन्य महंगी जांचों की सुविधा मिलने से उन्हें निजी केंद्रों पर जाकर जेब भी ढीली नहीं करना पड़ेगी।
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जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 300 से 350 प्रसूताएं इलाज के लिए आती हैं। इन्हें हर दिन करीब 150 से 200 जांचे कराना पड़ती हैं। इसी प्रकार जिला अस्पताल की ओपीडी 15 सौ से 17 सौ के करीब रहती है। यहां पर ओपीडी में परामर्श के बाद 400 से 500 जांचे हर कराई जाती हैं। इनमें से विटामिन डी, विटामिन बी-12, थायरायड, माइक्रो बॉयलॉजिकल एनालिसिस समेत कई महत्वपूर्ण जांचे अस्पताल में बनी पैथालॉजी सेंटरों पर नहीं हो पाती हैं।
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जांच न होने से मरीजों को होने वाली परेशानी दूर कराने के लिए ही जिला महिला अस्पताल में बनी बीएसएल लैब-2 की जगह पर 89 लाख रुपये की लागत से अत्याधुनिक लैब का निर्माण कार्य कराने का निर्णय हुआ था। अत्याधुनिक लैब में एक मीडिया प्रीपरेशन सेंटर के साथ ही वाशिंग और स्ट्रलाइजेशन एरिया के साथ ही सैंपल रिसीविंग और रिपोर्टिंग एरिया भी बनाया जाना है।
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इस लैब को बनाने का प्रमुख उद्देश्य मरीजों को सभी तरह की जांच सुविधा एक ही छत के नीचे परिसर में ही उपलब्ध कराने का था। शासन के निर्देशानुसार लैब का निर्माण कार्य जून 2025 तक पूरा हो जाना चाहिए था। लेकिन कार्यदायी संस्था द्वारा काफी धीमी रफ्तार से कराए जा रहे काम के कारण लैब का निर्माण कार्य तय मियाद के बाद भी अधूरा पड़ा है। जिम्मेदारों की माने तो लैब के संचालित होने में अभी कम से कम पांच माह का समय और लग सकता है। एसीएमओ प्रशासन डॉ. डीके श्रीवास्तव ने बताया कि अब तक लैब के निर्माण पूरा हो जाना चाहिए था लेकिन कुछ तकनीकी दिक्कतों की वजह से इसे क्रियाशील करने में देरी हो रही है। अधूरे निर्माण कार्य को जल्दी पूरा कराया जाएगा।
लैब निर्माण से मिलेगी इन जांचों की सुविधा
निर्माणाधीन लैब के क्रियाशील होने से क्लीनिकल पैथालॉजी, हेमटोलॉजी, साइटोलॉजी, बायोकमेस्टि्री, माइक्रो बायोलॉजी के तहत आने वाली सभी तरह की जांचों की सुविधा मरीजों को अस्पताल में ही उपलब्ध हो सकेगी। इसके अलावा बैक्टीरियोलॉजी, माइकोबाइक्टीरियोलॉजी, सीरोलॉजी, मोलेकूलर बायोलॉजी, वाइरोलॉजी के साथ ही कई अन्य महंगी जांचों की सुविधा मिलने से उन्हें निजी केंद्रों पर जाकर जेब भी ढीली नहीं करना पड़ेगी।