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सीट बचाने, गढ़ कब्जाने को बिछी बिसात
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बाराबंकी। विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने सभी और सपा ने चार उम्मीदवारों के टिकट का ऐलान कर दिया है। दोनो दलों के बीच जिस तरह से जोर आजमाइश दिख रही है। उससे साफ है कि भाजपा ने सीट बचाने तो सपा ने गढ़ को वापस पाने के लिए जो बिसात बिछाई है उसमें पुराने चेहरों पर ही दांव लगाया है।
सपा ने थोड़ा प्रयोग कर दिग्गज नेताओं के क्षेत्रों में फेरबदल कर दिया है। तो भाजपा ने एक को छोड़कर न चेहरे बदले हैं न ही क्षेत्र। टिकट के बाद अब कौन उम्मीदवार किस पर भारी होगा, चुनाव किस करवट पर बैठेगा, इसकी चर्चाएं शुुरू हो गई हैं। वहीं चुनावी प्रयोग में दिग्गज नेता कसौटी पर कितना खरे उतरते हैं यह भी परिणाम से तय होगा।
बाराबंकी जिला कभी समाजवादियों का गढ़ कहा जाता था। 2007 के आम चुनाव में बसपा ने पांच सीटें जीतकर गढ़ को हिला दिया था। इसके बाद 2012 के चुनाव में सपा ने जिले की छह की छह सीटें जीतकर अपना गढ़ ही वापस नहीं ले लिया था बल्कि इतिहास बना डाला था।
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इसी परिणाम के चलते सपा सरकार में अरविंद कुुमार सिंह गोप, फरीद महफूज किदवाई और राजीव कुमार सिंह को मंत्री बनाया गया। लेकिन 2017 के चुनाव में यह जीत कायम नहीं रह सकी और लम्बे बनवास के बाद भाजपा ने बाराबंकी सीट को छोड़कर पांच सीटों पर कमल खिला दिया। एक बार फिर 2022 में चुनाव का नगाड़ा बज चुका है।
रामनगर विधानसभा क्षेत्र से पार्टी के दो बड़े नेता गोप और राकेश की टिकट की दावेेदारी ने पार्टी हाईकमान को काफी पशोपेश में डाले रखा था। दोनों की लड़ाई 2012 से छिड़ी और टिकट न मिलने से राकेश ने कैसरगंज से मिले टिकट को ठुकरा दिया था।
नेतृत्व ने इस बार फार्मूला निकाला और क्षेत्र को बदलकर राकेश को कुर्सी और गोप को दरियाबाद से चुनावी समर में उतार दिया। जबकि रामनगर से फरीद महफूज किदवाई को टिकट दिया। बाराबंकी सदर से दो बार लगातार जीतने वाले धर्मराज सिंह उर्फ सुरेश यादव को प्रत्याशी बनाया। इस तरह चारों पुराने चेहरों पर पार्टी ने दांव लगाया है। जैदपुर और हैदरगढ़ सुरक्षित सीट पर अभी कसरत चल रही है।
भाजपा की लहर में विधानसभा पहुंचे साकेंद्र प्रताप वर्मा, शरद कुमार अवस्थी, सतीश चंद्र शर्मा को फिर मैदान में उतारा है। जैदपुर से विधायक चुने गए उपेंद्र रावत के सांसद बनने के बाद उप चुनाव में रनर रहे अमरीश रावत को फिर से मौका दिया है। हैदरगढ़ विधायक का टिकट जरूर काटकर दिनेश को मैदान में उतारा है। अभी तक जीत न दर्ज करने वाली बाराबंकी सीट पर अरविंद मौर्य पर दांव खेला है।
इस तरह जिले की प्रतिष्ठा पूर्ण सीटों पर सपा और भाजपा के घोषित प्रत्याशियों में सब पुराने चेहरे हैं। सपा ने पार्टी में टूटन बचाने के लिए क्षेत्र जरूर बदले हैं पर चेहरे वही रखे हैं। भाजपा ने वह भी नहीं किया है। इस तरह दोनों दलों में सीट बचाने और गढ़ को कब्जाने की जो बिसात बिछाई है उसकी कसौटी पर एक बार फिर पुराने नेता ही होंगे। क्योंकि दोनों दलों में टिकट की दौड़ में शामिल सैकड़ों कार्यकर्ता फिर पार्टी का झंडा डंडा लेकर चुनाव में शामिल होने को मजबूर होंगे।
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सपा ने थोड़ा प्रयोग कर दिग्गज नेताओं के क्षेत्रों में फेरबदल कर दिया है। तो भाजपा ने एक को छोड़कर न चेहरे बदले हैं न ही क्षेत्र। टिकट के बाद अब कौन उम्मीदवार किस पर भारी होगा, चुनाव किस करवट पर बैठेगा, इसकी चर्चाएं शुुरू हो गई हैं। वहीं चुनावी प्रयोग में दिग्गज नेता कसौटी पर कितना खरे उतरते हैं यह भी परिणाम से तय होगा।
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बाराबंकी जिला कभी समाजवादियों का गढ़ कहा जाता था। 2007 के आम चुनाव में बसपा ने पांच सीटें जीतकर गढ़ को हिला दिया था। इसके बाद 2012 के चुनाव में सपा ने जिले की छह की छह सीटें जीतकर अपना गढ़ ही वापस नहीं ले लिया था बल्कि इतिहास बना डाला था।
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इसी परिणाम के चलते सपा सरकार में अरविंद कुुमार सिंह गोप, फरीद महफूज किदवाई और राजीव कुमार सिंह को मंत्री बनाया गया। लेकिन 2017 के चुनाव में यह जीत कायम नहीं रह सकी और लम्बे बनवास के बाद भाजपा ने बाराबंकी सीट को छोड़कर पांच सीटों पर कमल खिला दिया। एक बार फिर 2022 में चुनाव का नगाड़ा बज चुका है।
रामनगर विधानसभा क्षेत्र से पार्टी के दो बड़े नेता गोप और राकेश की टिकट की दावेेदारी ने पार्टी हाईकमान को काफी पशोपेश में डाले रखा था। दोनों की लड़ाई 2012 से छिड़ी और टिकट न मिलने से राकेश ने कैसरगंज से मिले टिकट को ठुकरा दिया था।
नेतृत्व ने इस बार फार्मूला निकाला और क्षेत्र को बदलकर राकेश को कुर्सी और गोप को दरियाबाद से चुनावी समर में उतार दिया। जबकि रामनगर से फरीद महफूज किदवाई को टिकट दिया। बाराबंकी सदर से दो बार लगातार जीतने वाले धर्मराज सिंह उर्फ सुरेश यादव को प्रत्याशी बनाया। इस तरह चारों पुराने चेहरों पर पार्टी ने दांव लगाया है। जैदपुर और हैदरगढ़ सुरक्षित सीट पर अभी कसरत चल रही है।
भाजपा की लहर में विधानसभा पहुंचे साकेंद्र प्रताप वर्मा, शरद कुमार अवस्थी, सतीश चंद्र शर्मा को फिर मैदान में उतारा है। जैदपुर से विधायक चुने गए उपेंद्र रावत के सांसद बनने के बाद उप चुनाव में रनर रहे अमरीश रावत को फिर से मौका दिया है। हैदरगढ़ विधायक का टिकट जरूर काटकर दिनेश को मैदान में उतारा है। अभी तक जीत न दर्ज करने वाली बाराबंकी सीट पर अरविंद मौर्य पर दांव खेला है।
इस तरह जिले की प्रतिष्ठा पूर्ण सीटों पर सपा और भाजपा के घोषित प्रत्याशियों में सब पुराने चेहरे हैं। सपा ने पार्टी में टूटन बचाने के लिए क्षेत्र जरूर बदले हैं पर चेहरे वही रखे हैं। भाजपा ने वह भी नहीं किया है। इस तरह दोनों दलों में सीट बचाने और गढ़ को कब्जाने की जो बिसात बिछाई है उसकी कसौटी पर एक बार फिर पुराने नेता ही होंगे। क्योंकि दोनों दलों में टिकट की दौड़ में शामिल सैकड़ों कार्यकर्ता फिर पार्टी का झंडा डंडा लेकर चुनाव में शामिल होने को मजबूर होंगे।