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बाढ़ पीड़ितों के समक्ष खाने का संकट
अमर उजाला/बाराबंकी
Updated Sun, 20 Aug 2017 12:01 AM IST
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सीतापुर के जलमग्न हुआ एक इलाका
- फोटो : amar ujala
घाघरा नदी का पानी तेजी के साथ भले ही घट रहा हो, लेकिन बाढ़ पीड़ितों का संकट वैसे ही बरकरार है। पीड़ितों की समस्याओं का स्थायी हल नहीं निकल पा रहा है। बंधे और राहत शिविरों में बसे बाढ़ पीड़ित पूरे दिन दो वक्त की रोटी जुटाने के जद्दोजहद में जुटे रहते हैं। पीड़ितों के सामने दो जून की रोटी का संकट खड़ा हो गया है। चारों तरफ पानी भरा होने की वजह से बाढ़ पीड़ितों के सामने सबसे बड़ा संकट मवेशियों के लिए चारा जुटाना है।
वहीं, प्रशासनिक अमला और जनप्रतिनिधि बाढ़ पीड़ितों में राहत सामग्री वितरण का दावा कर रहे हैं, जबकि बाढ़ पीड़ित से नाकाफी बता रहे हैं। घाघरा नदी का पानी खतरे के निशान से अभी भी 57 सेमी ऊपर बह रहा है। नेपाली पानी पिछले सवा महीने से तराई में तबाही मचाए हुए है। डेढ़ सौ से अधिक गांवों में नदी का पानी भरा हुआ तो पचास से ज्यादा गांव अभी भी पानी से घिरे हुए हैं।
कचनापुर, हेतमापुर, सुंदरनगर, नैपुरा, कमियार, परसावल चरपुरवा, रायपुर मांझा समेत दो दर्जन से अधिक गांव नदी की धारा में समा चुके हैं। इन गांवों के पीड़ित हेतमापुर बंधे, बेहटा गांव के पास बने बंधे, अलीनगर रानीमऊ बंधे के अलावा बाढ़ राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं। बाढ़ पीड़ितों की मानें तो सवा महीने बीतने को है, राशन व पानी लगभग सब खत्म हो चुका है। राहत सामग्री जो मिली थी, वह भी खत्म हो गई है।
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दो वक्त की रोटी के साथ मवेशियों के लिए चारे के लिए पूरे दिन इधर-उधर भटकना पड़ता है। चारों तरफ पानी ही पानी होने की वजह से चारा जुटा पाना काफी मुश्किल हो रहा है। बाढ़ पीड़ितों की मानें तो चरपुरवा, नाऊपुरवा समेत कई गांवों में अभी लोग फंसे हुए हैं, जिन्हें नावों के माध्यम से सुरिक्षत स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। बंधा कटने की वजह से बांसगांव पूरी तरह से डूब गया था। वहां पर फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का दावा प्रशासन द्वारा किया जा रहा है।
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वहीं, प्रशासनिक अमला और जनप्रतिनिधि बाढ़ पीड़ितों में राहत सामग्री वितरण का दावा कर रहे हैं, जबकि बाढ़ पीड़ित से नाकाफी बता रहे हैं। घाघरा नदी का पानी खतरे के निशान से अभी भी 57 सेमी ऊपर बह रहा है। नेपाली पानी पिछले सवा महीने से तराई में तबाही मचाए हुए है। डेढ़ सौ से अधिक गांवों में नदी का पानी भरा हुआ तो पचास से ज्यादा गांव अभी भी पानी से घिरे हुए हैं।
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कचनापुर, हेतमापुर, सुंदरनगर, नैपुरा, कमियार, परसावल चरपुरवा, रायपुर मांझा समेत दो दर्जन से अधिक गांव नदी की धारा में समा चुके हैं। इन गांवों के पीड़ित हेतमापुर बंधे, बेहटा गांव के पास बने बंधे, अलीनगर रानीमऊ बंधे के अलावा बाढ़ राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं। बाढ़ पीड़ितों की मानें तो सवा महीने बीतने को है, राशन व पानी लगभग सब खत्म हो चुका है। राहत सामग्री जो मिली थी, वह भी खत्म हो गई है।
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दो वक्त की रोटी के साथ मवेशियों के लिए चारे के लिए पूरे दिन इधर-उधर भटकना पड़ता है। चारों तरफ पानी ही पानी होने की वजह से चारा जुटा पाना काफी मुश्किल हो रहा है। बाढ़ पीड़ितों की मानें तो चरपुरवा, नाऊपुरवा समेत कई गांवों में अभी लोग फंसे हुए हैं, जिन्हें नावों के माध्यम से सुरिक्षत स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। बंधा कटने की वजह से बांसगांव पूरी तरह से डूब गया था। वहां पर फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का दावा प्रशासन द्वारा किया जा रहा है।