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Barabanki News: चंद्रयान-3 में जिले की पूजा व अब्दुल्लाह का भी योगदान
Sun, 27 Aug 2023 01:07 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sun, 27 Aug 2023 01:07 AM IST
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बाराबंकी। चंद्रयान-3 मिशन की सफलता से पूरा देश गदगद है मगर बाराबंकी जिले के लिए ये दोहरी खुशी का मौका है। चंद्रयान लैंडिंग में अहम भूमिका निभाने वाली वैज्ञानिकों की टीम में जिले की बेटी पूजा व अब्दुल्लाह भी शामिल रहे। बीते तीन दिनों से इन मेधावियों के परिजनों व रिश्तेदारों को बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। करीबी लोग चंद्रयान-3 से जुड़ी हर चीज उनसे पूछ रहे हैं। दोनों के जिले में आगमन पर जोरदार स्वागत की तैयारी भी है।
रामनगर ब्लॉक की भिठौरा गांव के निवासी सचिवालय के सेवानिवृत्त अधिकारी कुशेन्द्र सिंह की पुत्री पूजा की शुरुआती शिक्षा लखनऊ में हुई। 2011 में उसका चयन इसरो में हुआ। 2012 में पूजा की शादी सीतापुर के निवासी साॅफ्टवेयर इंजीनियर गुरुचरण सिंह से हुई। वह भी बंगलूरू में तैनात हैं। पति-पत्नी वहीं रहकर देश सेवा में लगे हैं।
परिजनों ने बताया कि चंद्रयान की लैंडिग के समय निगहबानी करने वाली टीम में पूजा भी शामिल थी। चंद्रयान-3 की लैंडिंग होते ही पूजा के माता-पिता ने उसे बधाई दी। इस उपलब्धि से अभिभूत कुशेन्द्र सिंह व उनकी पत्नी ज्ञानमती बेटी को बधाई देने बंगलूरू पहुंच चुके हैं। इसी प्रकार चंद्रयान-3 की हाई रिजोल्यूशन डेटा प्रोसेसिंग डिवीजन में मसौली ब्लॉक के बड़ागांव निवासी अब्दुल्लाह सुहैल भी शामिल रहे। अब्दुल्लाह अपने पिता सुहैल अयूब व माता नसरीन फातिमा के साथ लखनऊ में रहते हैं। इनके नाना मुजीब उद्दीन किदवाई साहब डिप्टी एक्साइज कमिश्नर थे। अब्दुल्लाह उन चुनिन्दा लोगों में शामिल थे जिन पर चंद्रयान-3 के लिए लैंडिंग स्थान का चयन करने की जिम्मेदारी थी।
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अब्दुल्लाह ने सीएमएस महानगर कैंपस से इंटर की परीक्षा में गणिम में सौ फीसदी अंक हासिल किए थे। बीटेक करने के बाद उन्होंने पीसीएस उत्तीर्ण की फिर जेएनयू से एमटेक व पीएचडी किया। इसके बाद इनका चयन इसरो में हो गया।
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रामनगर ब्लॉक की भिठौरा गांव के निवासी सचिवालय के सेवानिवृत्त अधिकारी कुशेन्द्र सिंह की पुत्री पूजा की शुरुआती शिक्षा लखनऊ में हुई। 2011 में उसका चयन इसरो में हुआ। 2012 में पूजा की शादी सीतापुर के निवासी साॅफ्टवेयर इंजीनियर गुरुचरण सिंह से हुई। वह भी बंगलूरू में तैनात हैं। पति-पत्नी वहीं रहकर देश सेवा में लगे हैं।
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परिजनों ने बताया कि चंद्रयान की लैंडिग के समय निगहबानी करने वाली टीम में पूजा भी शामिल थी। चंद्रयान-3 की लैंडिंग होते ही पूजा के माता-पिता ने उसे बधाई दी। इस उपलब्धि से अभिभूत कुशेन्द्र सिंह व उनकी पत्नी ज्ञानमती बेटी को बधाई देने बंगलूरू पहुंच चुके हैं। इसी प्रकार चंद्रयान-3 की हाई रिजोल्यूशन डेटा प्रोसेसिंग डिवीजन में मसौली ब्लॉक के बड़ागांव निवासी अब्दुल्लाह सुहैल भी शामिल रहे। अब्दुल्लाह अपने पिता सुहैल अयूब व माता नसरीन फातिमा के साथ लखनऊ में रहते हैं। इनके नाना मुजीब उद्दीन किदवाई साहब डिप्टी एक्साइज कमिश्नर थे। अब्दुल्लाह उन चुनिन्दा लोगों में शामिल थे जिन पर चंद्रयान-3 के लिए लैंडिंग स्थान का चयन करने की जिम्मेदारी थी।
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अब्दुल्लाह ने सीएमएस महानगर कैंपस से इंटर की परीक्षा में गणिम में सौ फीसदी अंक हासिल किए थे। बीटेक करने के बाद उन्होंने पीसीएस उत्तीर्ण की फिर जेएनयू से एमटेक व पीएचडी किया। इसके बाद इनका चयन इसरो में हो गया।