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मानक विहीन बता एफसीआई ने फेल किया 29 सौ क्विंटल चावल
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बाराबंकी। एफसीआई की मनमानी चरम पर पहुंचती जा रही है। जिम्मेदारों द्वारा ध्यान नहीं दिए जाने से सरकारी चावल को घटिया बता आए दिन फेल कर दिया जा रहा है। अब तक 2900 क्विंटल चावल फेल किया जा चुका है।
इससे राइस मिल मालिकों में हड़कंप मच गया है और उन्होंने दो टूक कहा है कि जब तक एफसीआई सरकारी चावल नहीं लेती है तब क्रय केंद्रों पर खरीदे जा रहे धान का उठान कर पाना संभव नहीं है। इससे धान की खरीद प्रभावित होने लगी है और क्रय केंद्रों पर धान डंप होता जा रहा है।
जिले में अब तक निर्धारित लक्ष्य एक लाख 66 हजार एमटी के सापेक्ष 16 दिसंबर तक 53 हजार 667 एमटी धान की खरीद की जा चुकी है। इसमें से राइस मल मालिकों ने 36 हजार एमटी धान का उठान कर लिया और 8500 एमटी चावल भी एफसीआई को दे दिया।
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विभाग के अनुसार, राइस मिल मालिक अब तक 208 लॉट चावल एफसीआई को दे चुके हैं लेकिन एफसीआई द्वारा इसमें से 29 लॉट (2900 क्विंटल) चावल घटिया (मानकविहीन) बता फेल कर दिया गया है। इतना ज्यादा सरकारी चावल फेल किए जाने से राइस मिल मालिकों में हड़कंप मचा हुआ है।
सरकारी अमला राइस मिल मालिकों पर धान का उठान का दबाव बराबर बना रहा है लेकिन सरकारी चावल एफसीआई में समय से उतरे सके इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। जिम्मेदारों द्वारा इसे गंभीरता से न लिए जाने से एफसीआई पूरी तरह से मनमानी कर रहा है और सरकारी चावल की लॉट को आए दिन फेल कर रहा है।
इसका धान खरीद पर अब विपरीत असर पड़ने लगा है और केंद्रों पर करीब 17 हजार एमटी से ज्यादा धान डंप पड़ा हुआ है। वहीं मिल मालिकों का आरोप है कि एफसीआई ने एक नियम बना रखा है जो मानता है उसका चावल पास हो जाता है। जो नहीं मानता है उसका चावल फेल कर दिया जाता है।
एफसीआई के अपने मानक हैं। राइस मिल मालिक कोई पहली बार सरकारी चावल एफसीआई को नहीं भेज रहे हैं। उन्हें सब कुछ अच्छी तरह से पता है। इसके बाद भी मानक के अनुरूप चावल नहीं भेजा जाता है। एफसीआई उसी चावल को फेल करती है जो उसके मानकों पर खरा नहीं उतरता है।
-लारेब, डिपो मैनेजर एफसीआई
राइस मिल मालिक धान का उठान में जैसे ही तेजी लाते हैं वैसे ही एफसीआई सरकारी चावल की लॉट को फेल कर देता है। इससे मिल मालिक धान का उठान करने से कतराने लगते हैं। इसका विपरीत असर धान की खरीद पर पड़ रहा है। सरकारी चावल की लॉट फेल न हो इसके लिए एफसीआई के अधिकारी से बराबर संपर्क भी किया जाता है।
-रमेश कुमार, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
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इससे राइस मिल मालिकों में हड़कंप मच गया है और उन्होंने दो टूक कहा है कि जब तक एफसीआई सरकारी चावल नहीं लेती है तब क्रय केंद्रों पर खरीदे जा रहे धान का उठान कर पाना संभव नहीं है। इससे धान की खरीद प्रभावित होने लगी है और क्रय केंद्रों पर धान डंप होता जा रहा है।
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जिले में अब तक निर्धारित लक्ष्य एक लाख 66 हजार एमटी के सापेक्ष 16 दिसंबर तक 53 हजार 667 एमटी धान की खरीद की जा चुकी है। इसमें से राइस मल मालिकों ने 36 हजार एमटी धान का उठान कर लिया और 8500 एमटी चावल भी एफसीआई को दे दिया।
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विभाग के अनुसार, राइस मिल मालिक अब तक 208 लॉट चावल एफसीआई को दे चुके हैं लेकिन एफसीआई द्वारा इसमें से 29 लॉट (2900 क्विंटल) चावल घटिया (मानकविहीन) बता फेल कर दिया गया है। इतना ज्यादा सरकारी चावल फेल किए जाने से राइस मिल मालिकों में हड़कंप मचा हुआ है।
सरकारी अमला राइस मिल मालिकों पर धान का उठान का दबाव बराबर बना रहा है लेकिन सरकारी चावल एफसीआई में समय से उतरे सके इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। जिम्मेदारों द्वारा इसे गंभीरता से न लिए जाने से एफसीआई पूरी तरह से मनमानी कर रहा है और सरकारी चावल की लॉट को आए दिन फेल कर रहा है।
इसका धान खरीद पर अब विपरीत असर पड़ने लगा है और केंद्रों पर करीब 17 हजार एमटी से ज्यादा धान डंप पड़ा हुआ है। वहीं मिल मालिकों का आरोप है कि एफसीआई ने एक नियम बना रखा है जो मानता है उसका चावल पास हो जाता है। जो नहीं मानता है उसका चावल फेल कर दिया जाता है।
एफसीआई के अपने मानक हैं। राइस मिल मालिक कोई पहली बार सरकारी चावल एफसीआई को नहीं भेज रहे हैं। उन्हें सब कुछ अच्छी तरह से पता है। इसके बाद भी मानक के अनुरूप चावल नहीं भेजा जाता है। एफसीआई उसी चावल को फेल करती है जो उसके मानकों पर खरा नहीं उतरता है।
-लारेब, डिपो मैनेजर एफसीआई
राइस मिल मालिक धान का उठान में जैसे ही तेजी लाते हैं वैसे ही एफसीआई सरकारी चावल की लॉट को फेल कर देता है। इससे मिल मालिक धान का उठान करने से कतराने लगते हैं। इसका विपरीत असर धान की खरीद पर पड़ रहा है। सरकारी चावल की लॉट फेल न हो इसके लिए एफसीआई के अधिकारी से बराबर संपर्क भी किया जाता है।
-रमेश कुमार, जिला खाद्य विपणन अधिकारी