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प्रशासन से मिली अनुमति के बाद मजार से हटीं पाबंदियां
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बाराबंकी। देवा स्थित हाजी वारिश अली साह बाबा की मजार। फाइल फोटो।
- फोटो : BARABANKI
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देवा (बाराबंकी)। जिला प्रशासन की अनुमति मिलने के बाद करीब 10 माह बाद शुक्रवार को सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की मजार पर लगी तमाम पाबंदियां हटा ली गईं। लॉकडाउन से कोविड-19 प्रोटोकोल के तहत मजार शरीफ परिसर में मजार शरीफ के भीतर दर्शन करना, चादर, फूल व मिठाई इत्यादि चढ़ाने आदि पर मजार ट्रस्ट की ओर से पूर्णतया पाबंदी थी। जिसके चलते श्रद्धालु सिर्फ बाहर से ही मजार के दर्शन कर पा रहे थे। मजार ट्रस्ट ने जिला प्रशासन की अनुमति के बाद आज से पाबंदियों को हटा लिया है। उसी के बाद मजार पर आज काफी संख्या में लोगों ने दर्शन कर अपनी मनोकामना पूरी होने का आशीर्वाद लिया।
देश में कोविड-19 संक्रमण के चलते लागू हुए लॉकडाउन के बाद मार्च 2020 से मजार पर श्रद्धालुओं के लिए तमाम पाबंदियां लगा दी गई थीं। जिसके चलते बीते 10 महीनों में श्रद्धालुओं को सिर्फ बाहर से ही मजार परिसर में खड़े होकर दर्शन करने की अनुमति दी गई थी। इसके अलावा श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अनुसार चादर, फूल, मिठाई व इत्र इत्यादि मजार पर नहीं चढ़ा सकते थे, न ही परिसर के भीतर ले जा सकते थे। जिससे मजार पर आने वाले श्रद्धालुओं को सिर्फ खाली हाथ मजार परिसर में ही प्रवेश की अनुमति थी।
जिससे मजार से जुड़े व्यवसाय जैसे मिठाई, फूल, चादर, इत्र व अगरबत्ती से लेकर अन्य कारोबार पूरी तरह ठप हो गए थे। मजार पर कव्वाली न होने से कव्वाल समुदाय आर्थिक तंगी में था। मजार परिसर की व्यवस्था देखने वाली हाजी वारिस अली शाह मसोलियम ट्रस्ट के मैनेजर शाद महमूद वारसी ने बताया कि जिला प्रशासन की अनुमति मिलने के बाद शुक्रवार से मजार पर श्रद्धालुओं के लिए लगाई गई पाबंदियों को हटा लिया गया है। अब श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार चादर फूल मिठाई मजार पर अर्पित कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद मजार परिसर में मास्क लगाना अनिवार्य है। साथ ही कोविड प्रोटोकाल का पालन करने की भी श्रद्धालुओं को हिदायत दी जा रही है।
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श्रद्धालुओं में खुशी की लहर
दस माह बाद मजार शरीफ पूर्ववत खुलने से कस्बावासियों से लेकर श्रद्धालुओं में खुशी की लहर दौड़ गई। अहराम पोश बाबा पंछी शाह, समाजसेवी बाबा रिजवान वारसी, नगर पंचायत अध्यक्ष साहबे आलम वारसी, सभासद राजकुमार श्रीवास्तव, जितेंद्र रावत मो. रिजवान रिज्जू, शाफे जुबेरी, लकी निगम आदि ने मजार ट्रस्ट को श्रद्धालुओं के लिए लगी पाबंदी हटाने को लेकर धन्यवाद दिया है।
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देश में कोविड-19 संक्रमण के चलते लागू हुए लॉकडाउन के बाद मार्च 2020 से मजार पर श्रद्धालुओं के लिए तमाम पाबंदियां लगा दी गई थीं। जिसके चलते बीते 10 महीनों में श्रद्धालुओं को सिर्फ बाहर से ही मजार परिसर में खड़े होकर दर्शन करने की अनुमति दी गई थी। इसके अलावा श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अनुसार चादर, फूल, मिठाई व इत्र इत्यादि मजार पर नहीं चढ़ा सकते थे, न ही परिसर के भीतर ले जा सकते थे। जिससे मजार पर आने वाले श्रद्धालुओं को सिर्फ खाली हाथ मजार परिसर में ही प्रवेश की अनुमति थी।
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जिससे मजार से जुड़े व्यवसाय जैसे मिठाई, फूल, चादर, इत्र व अगरबत्ती से लेकर अन्य कारोबार पूरी तरह ठप हो गए थे। मजार पर कव्वाली न होने से कव्वाल समुदाय आर्थिक तंगी में था। मजार परिसर की व्यवस्था देखने वाली हाजी वारिस अली शाह मसोलियम ट्रस्ट के मैनेजर शाद महमूद वारसी ने बताया कि जिला प्रशासन की अनुमति मिलने के बाद शुक्रवार से मजार पर श्रद्धालुओं के लिए लगाई गई पाबंदियों को हटा लिया गया है। अब श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार चादर फूल मिठाई मजार पर अर्पित कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद मजार परिसर में मास्क लगाना अनिवार्य है। साथ ही कोविड प्रोटोकाल का पालन करने की भी श्रद्धालुओं को हिदायत दी जा रही है।
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श्रद्धालुओं में खुशी की लहर
दस माह बाद मजार शरीफ पूर्ववत खुलने से कस्बावासियों से लेकर श्रद्धालुओं में खुशी की लहर दौड़ गई। अहराम पोश बाबा पंछी शाह, समाजसेवी बाबा रिजवान वारसी, नगर पंचायत अध्यक्ष साहबे आलम वारसी, सभासद राजकुमार श्रीवास्तव, जितेंद्र रावत मो. रिजवान रिज्जू, शाफे जुबेरी, लकी निगम आदि ने मजार ट्रस्ट को श्रद्धालुओं के लिए लगी पाबंदी हटाने को लेकर धन्यवाद दिया है।