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Barabanki News: श्रद्धालुओं ने नागदेवता को चढ़ाया दूध व चावल
Tue, 22 Aug 2023 01:22 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Tue, 22 Aug 2023 01:22 AM IST
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बाराबंकी। नागपंचमी पर सोमवार को मंजीठा स्थित नागदेवता के मंदिर पर दूध व चावल चढ़ाने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ी। श्रद्धालुओं ने नागदेवता की बांबी पर दूध व चावल चढ़ाकर मंगलकामना की। यहां चल रहे मेले में लोगों ने गृहस्थी से जुड़े सामानों की जमकर खरीदारी की।
नागपंचमी के दिन केवल जिले से ही नहीं, बल्कि सीतापुर, अयोध्या, लखनऊ, रायबेरली आदि जिलों से श्रद्धालु नागदेवता पर दूध व चावल चढ़ाने आए। यहां लगे मेले में बेलन, पीढ़ा, लकड़ी व धातुओं के बर्तन मथानी, चिमटा, फावड़ा, खुरपी जैसी चीजों की बिक्री हुई। मेले में पांच थाना प्रभारी, 40 महिला कांस्टेबल, 40 पुरुष कांस्टेबल लगाए गए। इसी तरह देवा क्षेत्र के कुसुंभा स्थित विषहरण खागलदेव मंदिर में श्रद्धालुओं का दिन भर जमावड़ा लगा रहा। कई अन्य जगहों पर भी दूध चढ़ाने की परंपरा निभाई गई। मंजीठा समेत शहर में पिटारे में नाग रखकर घूम रहे सपेरों ने नाग के दर्शन कराए। कालसर्प व राहु दोष से बचने के लिए लोगाें ने पूजा-अर्चना की।
उधर, नागपंचमी पर निंदूरा क्षेत्र के धन्नाग तीर्थ स्थल पर आयोजित अखंड रामचरित मानस पाठ के समापन पर कन्या भोज व भंडारे का आयोजन हुआ। कन्याओं के साथ संतों को भी भोजन कराया गया। आयोजन महंत बाबा विक्रम दास, सुजीत, शेर बहादुर, सिद्धार्थ, बेला यादव आदि मौजूद रहे।
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घरों में बनी घुघरी, बच्चों ने पीटीं गुड़िया
नागपंचमी का पर्व पूरे जिले में धूमधाम से मनाया गया। परंपरा के अनुसार सुबह घरों में गेहूं की मीठी और चने की नमकीन घुघरी बनी। पूजा-अर्चना के बाद घरों में पूड़ी, कचौड़ी, खीर, हलवा आदि व्यंजन बनाए गए। परंपरा के अनुसार शाम को बेटियां कपड़े की गुड़िया बनाकर चौराहों पर छोड़ आईं तो लड़कों ने रंग-बिरंगे डंडों व पेड़ों की टहनियों से उन्हें पीटा। शहर के धनोखर चौराहा, लखपेड़ाबाग, बड़ेल चौराहे समेत गांवों में गुड़िया पीटी गईं।
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नागपंचमी के दिन केवल जिले से ही नहीं, बल्कि सीतापुर, अयोध्या, लखनऊ, रायबेरली आदि जिलों से श्रद्धालु नागदेवता पर दूध व चावल चढ़ाने आए। यहां लगे मेले में बेलन, पीढ़ा, लकड़ी व धातुओं के बर्तन मथानी, चिमटा, फावड़ा, खुरपी जैसी चीजों की बिक्री हुई। मेले में पांच थाना प्रभारी, 40 महिला कांस्टेबल, 40 पुरुष कांस्टेबल लगाए गए। इसी तरह देवा क्षेत्र के कुसुंभा स्थित विषहरण खागलदेव मंदिर में श्रद्धालुओं का दिन भर जमावड़ा लगा रहा। कई अन्य जगहों पर भी दूध चढ़ाने की परंपरा निभाई गई। मंजीठा समेत शहर में पिटारे में नाग रखकर घूम रहे सपेरों ने नाग के दर्शन कराए। कालसर्प व राहु दोष से बचने के लिए लोगाें ने पूजा-अर्चना की।
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उधर, नागपंचमी पर निंदूरा क्षेत्र के धन्नाग तीर्थ स्थल पर आयोजित अखंड रामचरित मानस पाठ के समापन पर कन्या भोज व भंडारे का आयोजन हुआ। कन्याओं के साथ संतों को भी भोजन कराया गया। आयोजन महंत बाबा विक्रम दास, सुजीत, शेर बहादुर, सिद्धार्थ, बेला यादव आदि मौजूद रहे।
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घरों में बनी घुघरी, बच्चों ने पीटीं गुड़िया
नागपंचमी का पर्व पूरे जिले में धूमधाम से मनाया गया। परंपरा के अनुसार सुबह घरों में गेहूं की मीठी और चने की नमकीन घुघरी बनी। पूजा-अर्चना के बाद घरों में पूड़ी, कचौड़ी, खीर, हलवा आदि व्यंजन बनाए गए। परंपरा के अनुसार शाम को बेटियां कपड़े की गुड़िया बनाकर चौराहों पर छोड़ आईं तो लड़कों ने रंग-बिरंगे डंडों व पेड़ों की टहनियों से उन्हें पीटा। शहर के धनोखर चौराहा, लखपेड़ाबाग, बड़ेल चौराहे समेत गांवों में गुड़िया पीटी गईं।