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इंद्रधनुषी छठा के बीच देवा महोत्सव अलविदा
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
Updated Wed, 26 Oct 2016 11:48 PM IST
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आतिशबाज
- फोटो : अमर उजाला
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चंद दिनों में एक रिश्ता सा बन गया, लेकिन आज वो अलविदा कह गया..। रंग-बिरंगी आसमानी आतिशबाजियों के साथ अंतरराष्ट्रीय ख्याति हासिल कर चुका देवा महोत्सव यादों को कारवां छोड़ बुधवार को अलविदा कह गया। ऐतिहासिक महत्व रखने वाले इस वार्षिक महोत्सव के आयोजन पर खुफिया व पुलिस की नजरें लगी रहीं। नामचीन व चोटी के कलाकारों की उपस्थिति ने चार चांद लगा दिए।
महोत्सव के आयोजन ने सूफी संत के कौमी एकता व आपसी भाई चारे के संदेश को यथार्थ कर दिखा दिया। महोत्सव में उमड़ी भीड़ ने देवा की जमीन से अपने गहरे रिश्ते का खुलकर इजहार किया।
सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की पावन तपोभूमि पर चलने वाले विख्यात देवा महोत्सव का अंतिम दिन बुधवार को परंपरागत ढंग से आतिशबाजी के बीच विधिवत समापन हुआ।
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इंद्रधनुषी छठा बिखरेती आतिशबाजी के साथ दस दिवसीय देवा महोत्सव ने अलविदा कह दिया। बुधवार की रात जिलाधिकारी अजय यादव, एडीएम अनिल सिंह की मौजूदगी में पुलिस अधीक्षक राजूबाबू सिंह की पत्नी सुधा सिंह ने आतिशबाजी के कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
इसके बाद आसमान आतिशबाजी के रंगाें से भर गया। चरखी, झूला, हवाई आतिशबाजी, अनार आदि पटाखाें के रंगाें से आसमान चमक उठा। इंद्रधनुषी रंगाें ने आसमान पर मानाें कब्जा कर लिया हो। तमाम रंगाें की फुलझड़ी छोड़ते पटाखाें की गूंज से महोत्सव रोशनी से भर गया। इसकी एक वजह आतिशबाज की प्रतियोगिता भी रही।
एक-दूसरे को पीछा छोड़ने के लिए आतिशबाजों ने आपस में होड़ लगी रही। इस होड़ में बाराबंकी शहर के निवासी मो. आजम आतिशबाज ने बाजी मार ली। दूसरे नंबर पर चिनहट के दिलशाद व तृतीय स्थान पर जैदपुर के शमीम मुंशी रहे। महोत्सव में देश-विदेश के श्रद्धालुओं ने बड़ी अकीदत के साथ इस महोत्सव में शिरकत कर बाबा को अपनी खिराज-ए-अकीदत पेश की।
सांस्कृतिक पंडाल में हुए एक से बढ़कर एक कार्यक्रम यादों का कारवां छोड़ गया। बिरहा, आल्हा, सूफियाना कलाम, सीरतुन्नवी, लोकगीत, नृत्य, मानस कार्यक्रम, भजन, नाटक, भोजपुरी संध्या, गजल गायन, मुशायरा, कवि सम्मेलन, मामे खानद्वारा सूफी नाइट, लोकनृत्य, सलीम सुलेमान विद मेगा नाइट, हॉकी, वालीबाल समेत लोगों को जागरूक करने वाली गोष्ठियों की भी लोगों ने मुक्तकंठ से सराहा।
सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की मुकद्दस सरजमीं पर नामचीन शायरों, प्रसिद्ध कवियों व भरत शर्मा व्यास, सौरभी देव वर्मा, दीपक राजा, सलीम सुलेमान, मामे खान जैसे चोटी के कलाकारों की मौजूदगी ने नया आयाम देकर महोत्सव को यादगार बना दिया।
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महोत्सव के आयोजन ने सूफी संत के कौमी एकता व आपसी भाई चारे के संदेश को यथार्थ कर दिखा दिया। महोत्सव में उमड़ी भीड़ ने देवा की जमीन से अपने गहरे रिश्ते का खुलकर इजहार किया।
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सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की पावन तपोभूमि पर चलने वाले विख्यात देवा महोत्सव का अंतिम दिन बुधवार को परंपरागत ढंग से आतिशबाजी के बीच विधिवत समापन हुआ।
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इंद्रधनुषी छठा बिखरेती आतिशबाजी के साथ दस दिवसीय देवा महोत्सव ने अलविदा कह दिया। बुधवार की रात जिलाधिकारी अजय यादव, एडीएम अनिल सिंह की मौजूदगी में पुलिस अधीक्षक राजूबाबू सिंह की पत्नी सुधा सिंह ने आतिशबाजी के कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
इसके बाद आसमान आतिशबाजी के रंगाें से भर गया। चरखी, झूला, हवाई आतिशबाजी, अनार आदि पटाखाें के रंगाें से आसमान चमक उठा। इंद्रधनुषी रंगाें ने आसमान पर मानाें कब्जा कर लिया हो। तमाम रंगाें की फुलझड़ी छोड़ते पटाखाें की गूंज से महोत्सव रोशनी से भर गया। इसकी एक वजह आतिशबाज की प्रतियोगिता भी रही।
एक-दूसरे को पीछा छोड़ने के लिए आतिशबाजों ने आपस में होड़ लगी रही। इस होड़ में बाराबंकी शहर के निवासी मो. आजम आतिशबाज ने बाजी मार ली। दूसरे नंबर पर चिनहट के दिलशाद व तृतीय स्थान पर जैदपुर के शमीम मुंशी रहे। महोत्सव में देश-विदेश के श्रद्धालुओं ने बड़ी अकीदत के साथ इस महोत्सव में शिरकत कर बाबा को अपनी खिराज-ए-अकीदत पेश की।
सांस्कृतिक पंडाल में हुए एक से बढ़कर एक कार्यक्रम यादों का कारवां छोड़ गया। बिरहा, आल्हा, सूफियाना कलाम, सीरतुन्नवी, लोकगीत, नृत्य, मानस कार्यक्रम, भजन, नाटक, भोजपुरी संध्या, गजल गायन, मुशायरा, कवि सम्मेलन, मामे खानद्वारा सूफी नाइट, लोकनृत्य, सलीम सुलेमान विद मेगा नाइट, हॉकी, वालीबाल समेत लोगों को जागरूक करने वाली गोष्ठियों की भी लोगों ने मुक्तकंठ से सराहा।
सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की मुकद्दस सरजमीं पर नामचीन शायरों, प्रसिद्ध कवियों व भरत शर्मा व्यास, सौरभी देव वर्मा, दीपक राजा, सलीम सुलेमान, मामे खान जैसे चोटी के कलाकारों की मौजूदगी ने नया आयाम देकर महोत्सव को यादगार बना दिया।