{"_id":"69cad956920520019f057354","slug":"departments-busy-spending-budget-in-march-barabanki-news-c-315-1-brp1006-162866-2026-03-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Barabanki News: मार्च में बजट खपाने में जुटे विभाग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Barabanki News: मार्च में बजट खपाने में जुटे विभाग
Tue, 31 Mar 2026 01:43 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Tue, 31 Mar 2026 01:43 AM IST
विज्ञापन
बाराबंकी। वित्तीय वर्ष के आखिरी दो दिनों में सरकारी मशीनरी पूरी रफ्तार में नजर आ रही है। बजट खपाने और लंबित फाइलों को निपटाने के लिए विकास भवन से लेकर कलेक्ट्रेट तक सभी विभागों में कामकाज तेज हो गया है। सोमवार को देर रात तक अधिकारी और कर्मचारी दफ्तरों में डटे रहे।
सूत्रों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष के आखिरी दिनों में सिर्फ फाइलों का निस्तारण ही नहीं, बल्कि मार्च माह में शासन से करीब 53 परियोजनाओं को लेकर छोटा बड़ा बजट व निर्देश मिला है। इसे लेकर भी हलचल तेज हो गई है। नहर, पुल और सड़क निर्माण जैसी योजनाओं के लिए मिली धनराशि को जल्द खर्च करने की होड़ लगी है। ब्लॉकों में टाइड व अनटाइड फंड खपाने को लेकर लंबित कार्यों को भी मंजूरी मिल गई है। कलेक्ट्रेट परिसर और विकास भवन में देर रात तक जलती लाइटें इस बात की गवाही देती रहीं कि वित्तीय वर्ष के समापन से पहले हर विभाग अपने लक्ष्य को पूरा करने में जुटा है। कर्मचारियों की मानें तो मार्च के अंतिम दिनों में हर साल यही स्थिति बनती है, जब अचानक काम का दबाव कई गुना बढ़ जाता हैसंतुलित तरीके से नहीं बनाई जा सकती, ताकि अंतिम समय की इस हड़बड़ी से बचा जा सके।
विज्ञापन
सूत्रों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष के आखिरी दिनों में सिर्फ फाइलों का निस्तारण ही नहीं, बल्कि मार्च माह में शासन से करीब 53 परियोजनाओं को लेकर छोटा बड़ा बजट व निर्देश मिला है। इसे लेकर भी हलचल तेज हो गई है। नहर, पुल और सड़क निर्माण जैसी योजनाओं के लिए मिली धनराशि को जल्द खर्च करने की होड़ लगी है। ब्लॉकों में टाइड व अनटाइड फंड खपाने को लेकर लंबित कार्यों को भी मंजूरी मिल गई है। कलेक्ट्रेट परिसर और विकास भवन में देर रात तक जलती लाइटें इस बात की गवाही देती रहीं कि वित्तीय वर्ष के समापन से पहले हर विभाग अपने लक्ष्य को पूरा करने में जुटा है। कर्मचारियों की मानें तो मार्च के अंतिम दिनों में हर साल यही स्थिति बनती है, जब अचानक काम का दबाव कई गुना बढ़ जाता हैसंतुलित तरीके से नहीं बनाई जा सकती, ताकि अंतिम समय की इस हड़बड़ी से बचा जा सके।
विज्ञापन