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Barabanki News: जनमाष्टमी पर बाजार में बढ़ी राधे-राधे स्टोल की मांग
Sat, 22 Aug 2026 11:15 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sat, 22 Aug 2026 11:15 PM IST
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जैदपुर। राम मंदिर आंदोलन से निकले रामनामी पटके की तरह अब जनमाष्टमी पर राधे-राधे लिखे स्टोल की मांग बाजार में तेजी से बढ़ी है। यह धार्मिक आस्था रामनगरी से कृष्णनगरी तक फैल गई है। जैदपुर की बुनकर बस्ती में अब्दुल और जफर सरीखे कई मुस्लिम स्टोल पर राधे-राधे उकेर रहे हैं।
मथुरा के कारसेवकपुरम में शिलाओं पर नक्काशी का काम जारी है। वहीं, जैदपुर के करघों पर दिन-रात राधे-राधे नाम उकेरा जा रहा है। जैदपुर कस्बे के हथकरघे इस माह 12 हजार स्टोल की भारी मांग को पूरा करने में तेजी से जुटे हैं। नूरुद्दीन अंसारी, जफर अंसारी, कमरुज्जमा और अब्दुल तव्वाब अंसारी जैसे कारीगर धागे पिरो रहे हैं। ये खूबसूरत स्टोल मथुरा, वृंदावन, अयोध्या और प्रदेश के अन्य जिलों में भेजे जा रहे हैं। त्योहार के इस सीजन में थोक ऑर्डरों से बुनकर परिवारों को अतिरिक्त काम मिला है। इससे उनकी आजीविका को एक मजबूत सहारा मिला है। (संवाद)
मेहनत का नहीं मिल रहा वाजिब दाम
त्योहार के सीजन में बुनकरों को भरपूर काम मिला है। हालांकि, धागे और कच्चे माल की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। इससे स्टोल बनाने की लागत में भी वृद्धि हुई है। थोक व्यापारी उचित दाम देने को तैयार नहीं हैं। इस कारण कारीगरों को उनकी मेहनत का वाजिब लाभ नहीं मिल पा रहा है। बुनकर संगठन के अध्यक्ष तफज्जुल हुसैन और हफीज अंसारी का कहना है कि जैदपुर का पारंपरिक हथकरघा उद्योग केवल त्योहारों के भरोसे नहीं चल सकता। सरकार को बुनकरों के लिए विशेष सब्सिडी योजना लागू करनी चाहिए। ताकि कारीगरों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकेगा।
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मथुरा के कारसेवकपुरम में शिलाओं पर नक्काशी का काम जारी है। वहीं, जैदपुर के करघों पर दिन-रात राधे-राधे नाम उकेरा जा रहा है। जैदपुर कस्बे के हथकरघे इस माह 12 हजार स्टोल की भारी मांग को पूरा करने में तेजी से जुटे हैं। नूरुद्दीन अंसारी, जफर अंसारी, कमरुज्जमा और अब्दुल तव्वाब अंसारी जैसे कारीगर धागे पिरो रहे हैं। ये खूबसूरत स्टोल मथुरा, वृंदावन, अयोध्या और प्रदेश के अन्य जिलों में भेजे जा रहे हैं। त्योहार के इस सीजन में थोक ऑर्डरों से बुनकर परिवारों को अतिरिक्त काम मिला है। इससे उनकी आजीविका को एक मजबूत सहारा मिला है। (संवाद)
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मेहनत का नहीं मिल रहा वाजिब दाम
त्योहार के सीजन में बुनकरों को भरपूर काम मिला है। हालांकि, धागे और कच्चे माल की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। इससे स्टोल बनाने की लागत में भी वृद्धि हुई है। थोक व्यापारी उचित दाम देने को तैयार नहीं हैं। इस कारण कारीगरों को उनकी मेहनत का वाजिब लाभ नहीं मिल पा रहा है। बुनकर संगठन के अध्यक्ष तफज्जुल हुसैन और हफीज अंसारी का कहना है कि जैदपुर का पारंपरिक हथकरघा उद्योग केवल त्योहारों के भरोसे नहीं चल सकता। सरकार को बुनकरों के लिए विशेष सब्सिडी योजना लागू करनी चाहिए। ताकि कारीगरों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकेगा।
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