नहाय-खाय रस्म के साथ डाला छठ महापर्व शुरू
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कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से शुरू होकर कार्तिक सप्तमी तक मनाए जाने वाले चार दिवसीय डाला छठ महपर्व की शुरुआत नहाय खाय रस्म के साथ हो गई। रविवार को व्रती महिलाओं ने परंपरा के अनुसार नहाने के बाद पूजा अर्चना की और लौकी की सब्जी व चने की दाल स्वयं बनाया, उसका भोग लगाया और प्रसाद ग्रहण किया। अब चार दिनों तक व्रती महिलाएं चटाई बिछाकर या तख्त पर शयन करेंगी। ठेकुआ बनाने के लिए महिलाओं ने गेेहूं आदि को साफ किया। अधिकतर घरों में नहाय खाय से पूर्व लहसुन और प्याज का प्रयोग बंद हो गया। शाम होते ही व्रती महिलाओं के घरों में छठ मइया के पारंपरिक गीत गूंज उठे। महिलाओं ने गीतों के माध्यम से छठ मइया की महिमा का बखान किया।
छोटी छठ खरना अनुष्ठान आज
कार्तिक शुक्ल पंचमी को खरना (छोटी छठ) अनुष्ठान के रूप में जाना जाता है। इस दिन व्रत करने वाले लोग दिनभर उपवास रखते है। इस व्रत को कई पुरुष भी रखते हैं। शाम को गन्ने के रस या गुड़ से बने हुए चावल की खीर (बखीर), चावल का पिट्ठा और रोटी बनाई जाती है। पूजन उपरांत इसे प्रसाद के रूप में खाया जाता है। सोमवार को खरना अनुष्ठान के साथ ही महिलाएं निर्जला व्रत रहेंगी।