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धान खरीद पर संकट, आठ केंद्रों से उठान ठप

Tue, 14 Dec 2021 11:21 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 14 Dec 2021 11:21 PM IST
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Crisis on paddy procurement, lifting stalled from eight centers
बाराबंकी। खरीदे गए धान की उठान राइस मिल मालिक नहीं कर रहे हैं। इसके चलत केंद्रों पर खरीदा गया धान डंप हो गया है। इसका सीधा असर अब धान की खरीद पर भी दिखने लगा है।
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आठ क्रय केंद्रों के प्रभारियों ने खरीदे गए धान की उठान राइस मिलो की तरफ से न किए जाने की परेशानी बतायी है। क्रय केंद्र प्रभारियों का आरोप है कि राइस मिल संचालक न तो धान की उठान कर रही है और न ही एग्रीमेंट। इससे धान खरीद पर व्याप्त संकट और गहराता जा रहा है और किसी भी समय किसानों से खरीद बंद हो सकती है।
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जिले में धान खरीद के लिए 64 केंद्र खोले गए हैं इनके माध्यम से अब तक करीब 35 हजार एमटी धान की खरीद की जा चुकी है। खरीदे गए धान की उठान के लिए 52 राइस मिलों को क्रय केंद्रों से संबद्व किया गया है लेकिन राइस मिल मालिकों की मनमानी किसानों पर भारी पड़ने लगी है।
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क्रय केंद्रों से जोड़ी गयी राइस मिल धान की उठान नहीं कर रही हैं। नवीन मंडी में खुले पांच केंद्रों समेत, फतेहपुर, सूरतगंज और सफदरगंज केंद्रों से उठान ठप हो गई है।
यदि तत्काल धान की उठान शुरू नहीं कराई गई तो धान की खरीद किसी भी समय बंद हो सकती है। इसके चलते ही मंगलवार को इन केंद्रों पर धान खरीद की रफ्तार काफी धीमी रही और किसान धान लदी ट्रालियां लिए खड़े अपनी बारी का इंतजार करते परेशान दिखे।
जिला खाद्य विपणन अधिकारी रमेश कुमार ने बताया कि लगातार चेतावनी के बाद भी यदि राइस मिल मालिक खरीदे गए धान की उठान क्रय केंद्र से शुरू नहीं करते हैं तो ऐसे मिल मालिकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया जाएगा।
टोकन की आड़ में भी हो रहा खेल
धान लेकर आने वाले किसानों का आरोप है कि क्रय केंद्र प्रभारी तू डाल-डाल मैं पात-पात की तर्ज पर कार्य कर रहे हैं। किसानों के नाम पर व्यापारियों को टोकन दे दिए गए हैं और प्राथमिकता पर उनका ही धान तौला जा रहा है। यदि कोई किसान टोकन पर धान लेकर पहुंच भी जाता है तो उससे कहा जाता है कि फलां किसान का टोकन पहले का था और ये धान लेकर आ नहीं सके इसलिए पहले इनका धान तौला जाएगा।

इस तरह टोकन की आड़ में खेल कर सिर्फ और सिर्फ व्यापारियों से धान की खरीद कर लक्ष्य पूरा किया जा रहा है। लेकिन अधिकारी इस बात से पूरी तरह से वाकिफ होने के बाद भी कुछ नहीं करते हैं और जांच के नाम पर औपचारिकता निभा वापस लौट आते हैं।
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