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मोबाइल की रोशनी में कराया प्रसव, बच्चा मरा
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
Updated Thu, 11 May 2017 11:48 PM IST
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सीएचसी फतेहपुर में चिकित्सकों की लापरवाही से जन्म के कुछ देर बाद एक नवजात की मौत हो गई। घटना के बाद स्टाफ नर्स ने जच्चा बच्चा को घर ले जाने की बात कहते हुए वार्ड से जबरन बाहर निकाल दिया।
परिजन प्रसूता का इलाज करने को कहा तो स्टाफॅ नर्स ने पुलिस बुलाने की धमकी दी, इस पर परिवारीजन आक्रोशित हो गए और हंगामा काटने लगे। गुरुवार को पीड़ित शिकायत पर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। क्षेत्रीय विधायक साकेंद्र वर्मा के हस्तक्षेप के बाद प्रसूता को वार्ड में भर्ती कर इलाज शुरू कर किया गया।
सीएचसी फतेहपुर को (एफआरयू) फस्ट रेफरल यूनिट का दर्जा प्राप्त है। इसके बाद भी यहां मरीजों के इलाज में घोर लापरवाही बरती जा रही है। क्षेत्र के औरंगाबाद निवासी विक्रम गौतम बुधवार को पत्नी सरिता को प्रसव पीड़ा होने पर उसे सुबह आठ बजे भर्ती कराया था। लेबर रूम में तैनात स्टाफ नर्स शबा कुरैशी ने प्रसूता को शाम करीब 7:30 बजे प्रसव के लिए लेबर रूम में ले गई।
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प्रसव के 20 मिनट बाद नवजात की अचानक मौत हो गई। प्रसूता के पति ने मौत का कारण पूछा तो स्टाफॅ नर्स ने बताया कि मृत बच्चा पैदा हुआ है। प्रसव के समय मौजूद पीड़िता की मां मुन्नी देवी ने बताया कि जब बच्चा पैदा हुआ था तो ठीक था। इस पर स्टाफॅ नर्स भड़क उठी और जच्चा बच्चा को वार्ड से निकाल बरामदे में लिटा दिया।
नर्स के इस अभद्र व्यवहार को देख परिवारीजन आक्रोशित होकर हंगामा करने लगे। पीड़ित जब सीएचसी प्रभारी से शिकायत करने पहुंचे तो वह अपने आवास से नदारद मिले। पूरी रात प्रसूता बिना इलाज के फर्श पर तड़पती रही।
सुबह प्रसूता के पति ने गांव वालों के साथ एसडीएम व कोतवाल को शिकायती पत्र देकर स्टाफ नर्स की लापरवाही से बच्चे की मौत होने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने नवजात के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
कहने पर भी नहीं चलाया जनरेटर
प्रसूता की मां का आरोप है कि जिस समय प्रसव हो रहा था उस समय बिजली नहीं थी। स्टाफॅ नर्स से जनरेटर चलवाने को कहा गया तो उसने कहा कि बस दो मिनट का काम है। और उससे मोबाइल से रोशनी दिखाने को कहा। उन्होंने बताया कि प्रसव के समय कम रोशनी में दिखाई नहीं पड़ रहा था। यह भी आरोप है कि स्टाफ नर्स ने प्रसव के दौरान काफी जोर जबरदस्ती भी की जिसकी वजह से बच्चे की मौत हो गई। आरोप है कि इमरजेंसी में तैनात डॉ. संजीव मोहन ने भी बच्चे को हाथ नहीं लगाया।
सीएचसी फतेहपुर में स्टाफ नर्स की लापरवाही से बच्चे की मौत होने की शिकायत मिली है। सीएचसी प्रभारी भी रात को अपने आवास पर न मिलने का मामला प्रकाश में आया है। जांच के लिए टीम भेजी गई है। जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. डीआर सिंह, सीएमओ
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परिजन प्रसूता का इलाज करने को कहा तो स्टाफॅ नर्स ने पुलिस बुलाने की धमकी दी, इस पर परिवारीजन आक्रोशित हो गए और हंगामा काटने लगे। गुरुवार को पीड़ित शिकायत पर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। क्षेत्रीय विधायक साकेंद्र वर्मा के हस्तक्षेप के बाद प्रसूता को वार्ड में भर्ती कर इलाज शुरू कर किया गया।
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सीएचसी फतेहपुर को (एफआरयू) फस्ट रेफरल यूनिट का दर्जा प्राप्त है। इसके बाद भी यहां मरीजों के इलाज में घोर लापरवाही बरती जा रही है। क्षेत्र के औरंगाबाद निवासी विक्रम गौतम बुधवार को पत्नी सरिता को प्रसव पीड़ा होने पर उसे सुबह आठ बजे भर्ती कराया था। लेबर रूम में तैनात स्टाफ नर्स शबा कुरैशी ने प्रसूता को शाम करीब 7:30 बजे प्रसव के लिए लेबर रूम में ले गई।
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प्रसव के 20 मिनट बाद नवजात की अचानक मौत हो गई। प्रसूता के पति ने मौत का कारण पूछा तो स्टाफॅ नर्स ने बताया कि मृत बच्चा पैदा हुआ है। प्रसव के समय मौजूद पीड़िता की मां मुन्नी देवी ने बताया कि जब बच्चा पैदा हुआ था तो ठीक था। इस पर स्टाफॅ नर्स भड़क उठी और जच्चा बच्चा को वार्ड से निकाल बरामदे में लिटा दिया।
नर्स के इस अभद्र व्यवहार को देख परिवारीजन आक्रोशित होकर हंगामा करने लगे। पीड़ित जब सीएचसी प्रभारी से शिकायत करने पहुंचे तो वह अपने आवास से नदारद मिले। पूरी रात प्रसूता बिना इलाज के फर्श पर तड़पती रही।
सुबह प्रसूता के पति ने गांव वालों के साथ एसडीएम व कोतवाल को शिकायती पत्र देकर स्टाफ नर्स की लापरवाही से बच्चे की मौत होने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने नवजात के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
कहने पर भी नहीं चलाया जनरेटर
प्रसूता की मां का आरोप है कि जिस समय प्रसव हो रहा था उस समय बिजली नहीं थी। स्टाफॅ नर्स से जनरेटर चलवाने को कहा गया तो उसने कहा कि बस दो मिनट का काम है। और उससे मोबाइल से रोशनी दिखाने को कहा। उन्होंने बताया कि प्रसव के समय कम रोशनी में दिखाई नहीं पड़ रहा था। यह भी आरोप है कि स्टाफ नर्स ने प्रसव के दौरान काफी जोर जबरदस्ती भी की जिसकी वजह से बच्चे की मौत हो गई। आरोप है कि इमरजेंसी में तैनात डॉ. संजीव मोहन ने भी बच्चे को हाथ नहीं लगाया।
सीएचसी फतेहपुर में स्टाफ नर्स की लापरवाही से बच्चे की मौत होने की शिकायत मिली है। सीएचसी प्रभारी भी रात को अपने आवास पर न मिलने का मामला प्रकाश में आया है। जांच के लिए टीम भेजी गई है। जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. डीआर सिंह, सीएमओ