यहां तो हर तरफ धधक रही मौत की भट्ठियां
पुलिस व आबकारी विभाग की मिलीभगत से जिले में अवैध शराब का कारोबार तेजी से अपने पांव फैलाता जा रहा है, लेकिन इस धंधे पर रोक नहीं लग पा रही है। तराई इलाके में हर क्षेत्र में अवैध शराब बनाने की भट्ठियां धधक रही है। आबकारी विभाग द्वारा इस कारोबार पर रोक लगाने की बात बेमानी साबित हो रही है। आलम यह है कि यह धंधा जिले के सभी थाना क्षेत्रों में चल रहा है। जबकि पूर्व में कच्ची शराब पीने से कई की जान जा चुकी है।
जिले में फल फूल रहे अवैध शराब के कारोबार पर अंकुश लगता नहीं दिखाई पड़ रहा है। नदियों से घिरे तराई बेल्ट व जिले के सीमावर्ती गांवों में नकली शराब का धंधा बेरोकटोक चल रहा है। जिले के लगभग सभी थानाक्षेत्रों के करीब सौ से अधिक गांवों मेें फैले इस अवैध कारोबार करने वालों को राजनीतिक नेताओं का संरक्षण भी प्राप्त है जिसके चलते आबकारी विभाग भी इनके खिलाफ कार्रवाई करने का साहस नहीं जुटा पाता है। जिले के सुबेहा, हैदरगढ़, टिकैतनगर, अंसद्रा, लोनीकटरा, कोठी, रामसनेहीघाट, दरियाबाद, बदोसरायं, रामनगर, कुर्सी, बड्डुपुर, घुंघटेर, देवां, जहांगीराबाद, सतरिख, सफदरगंज थाना क्षेत्रों मेें अवैध शराब का कारोबार धड़ल्ले फल फूल रहा है। खासकर घाघरा नदी की तराई में बसे गांवों में यह काम सबसे ज्यादा हो रहा है।
किसी की मौत तो कोई हुआ अंधा
मिलावटी शराब पीने से देवा क्षेत्र के जबरीकला गांव में बीते 31 दिसंबर 2009 को पांच लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद देवा क्षेत्र के कुशंभा में भी इसी वर्ष जहरीली शराब पीने से दो लोगों की मौत हो गई थी व तीन को आंखों की रोशनी गंवानी पड़ी थी। इन घटनाओं के बाद भी पुलिस व आबकारी विभाग द्वारा कोई खास कार्रवाई नहीं की गई। अवैध रूप से बनाई जाने वाली शराब में नशा बढ़ाने के लिए यूरिया, नौसादर और ईस्ट का मिश्रण महुआ सड़ाने के दौरान इस्तेमाल किया जाता है। तैयार शराब में अल्कोहल की मात्रा अधिक होने के कारण शराब जहरीली हो जाती है।
अवैध शराब का काम करने वालों के खिलाफ लगातार चेकिंग व छापेमारी कर कार्रवाई की जाती है। जनपद में हर उस क्षेत्र में आबकारी विभाग की टीमें लगातार गश्त करती है जहां पर इस तरह का काम होता है। बारिश के कारण इस समय तराई इलाकों में पहुंचने में दिक्कत हो रही है।
- विपिन सहाय यादव, जिला आबकारी अधिकारी