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नौकरी का झांसा देकर 8.5 लाख ठगे
बाराबंकी/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 26 Aug 2015 11:22 PM IST
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ठगी का शिकार हुए लोगों ने डीडीसी से पैसे मांगे तो पहले तो वह उन्हें टरकाता रहा। पीड़ितों का कहना है कि अब डीडीसी द्वारा पैसा वापस नहीं करने के साथ ही धमकी भी दी जा रही है। पीड़ितों ने मामले की शिकायत एसपी से की है।
कोतवाली फतेहपुर के ग्राम गुड़ौली निवासी ज्ञानेंद्र कुमार, प्यारेपुर केे शिवकुमार, अमरेश व मो. सिराज व तेलियानी रामनगर के झब्बूलाल ने बताया कि बसपा सरकार में बीएचडब्लू स्वास्थ्य कार्यकर्ता पद के लिए वर्ष 2010 में लिखित परीक्षा हुई थी। इन लोगों ने बताया कि उमेश चंद्ररावत पुत्र मेड़ीलाल निवासी ग्राम मनौरा थानारामनगर जो डीडीसी है ने नौकरी दिलाने का झांसा दिया।
कहा कि वह तत्कालीन मुख्यमंत्री के सुरक्षा सचिव राजेंद्र प्रसाद के माध्यम से नौकरी दिलवा देंगे। इसके लिए शिवकुमार व अमरेश कुमार से 75 हजार, मो. सिराज से 90 हजार ज्ञानेंद्र कुमार से दो लाख और छब्बू लाल से तीन लाख रुपये लिए। लेकिन काम नहीं हुआ।
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दो साल तक इंतजार करने के बाद भी जब नौकरी नहीं मिली तो उमेश चंद्र रावत से पैसे की मांग की गई तो वह इधर उधर के बहाने बना टरकाता रहा।
पैसा वापसी के लिए जब और दबाव बनाया गया तो उसने सभी से खाता संख्या मांगे और बताया कि पैसा खाते में भेज दिया जाएगा। लेकिन जब खाते में पैसा नहीं आया तो 13 अगस्त 2015 को पीड़ित ने जिला पंचायत सदस्य उमेश चंद्र रावत से बात की तो
उसने पैसा नहीं वापस करने के साथ ही धमकी भी दी। पीड़ितों ने बुधवार को पुलिस अधीक्षक अब्दुल हमीद से
मामले की शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई है।
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कोतवाली फतेहपुर के ग्राम गुड़ौली निवासी ज्ञानेंद्र कुमार, प्यारेपुर केे शिवकुमार, अमरेश व मो. सिराज व तेलियानी रामनगर के झब्बूलाल ने बताया कि बसपा सरकार में बीएचडब्लू स्वास्थ्य कार्यकर्ता पद के लिए वर्ष 2010 में लिखित परीक्षा हुई थी। इन लोगों ने बताया कि उमेश चंद्ररावत पुत्र मेड़ीलाल निवासी ग्राम मनौरा थानारामनगर जो डीडीसी है ने नौकरी दिलाने का झांसा दिया।
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कहा कि वह तत्कालीन मुख्यमंत्री के सुरक्षा सचिव राजेंद्र प्रसाद के माध्यम से नौकरी दिलवा देंगे। इसके लिए शिवकुमार व अमरेश कुमार से 75 हजार, मो. सिराज से 90 हजार ज्ञानेंद्र कुमार से दो लाख और छब्बू लाल से तीन लाख रुपये लिए। लेकिन काम नहीं हुआ।
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दो साल तक इंतजार करने के बाद भी जब नौकरी नहीं मिली तो उमेश चंद्र रावत से पैसे की मांग की गई तो वह इधर उधर के बहाने बना टरकाता रहा।
पैसा वापसी के लिए जब और दबाव बनाया गया तो उसने सभी से खाता संख्या मांगे और बताया कि पैसा खाते में भेज दिया जाएगा। लेकिन जब खाते में पैसा नहीं आया तो 13 अगस्त 2015 को पीड़ित ने जिला पंचायत सदस्य उमेश चंद्र रावत से बात की तो
उसने पैसा नहीं वापस करने के साथ ही धमकी भी दी। पीड़ितों ने बुधवार को पुलिस अधीक्षक अब्दुल हमीद से
मामले की शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई है।