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खनन माफिया सरकार को लगा चुके करोड़ों के राजस्व का चूना
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बाराबंकी। प्रदेश की राजधानी से सटे जिले में मिट्टी का अवैध खनन करने वाले माफिया सरकार को करोड़ों के राजस्व का चूना लगा चुके हैं। खनन कराने की सांठगांठ के आरोप में कोतवाल से लेकर सिपाहियों तक का निलंबन होने के साथ ही केस भी दर्ज कराया जा चुका है। लेकिन इसके बावजूद इस काम को करने वाले लोग बेखौफ हैं।
इसी का नतीजा है कि डीएम द्वारा जारी किए जाने वाले खनन परमिट की फर्जी कॉपी बनाकर कार्य करने की अनुमति मांग ली गई। मामला पकड़ में आने के बाद लखनऊ की एक कंपनी के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। वहीं एसपी ने अवैध खनन करने वालों की संपत्ति जब्तीकरण के साथ ही उनके खिलाफ गैंगेस्टर की कार्रवाई करने की बात कही है।
सतरिख थाने में रविवार को जिला खनन अधिकारी डॉ. दीपक की तहरीर क्लेसन इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड, पता 107 प्रथम तल, यस सिलवर हाईट अपार्टमेंट बादशाहनगर लखनऊ के खिलाफ कई संगीन धारा में केस दर्ज किया गया था। आरोप है कि इस कंपनी द्वारा फर्जी तरीके से डीएम के डिजिटल हस्ताक्षर का दुरुपयोग करते हुए बनाई गई परमिट की कॉपी को दिखाकर सराय अकबराबाद गांव के पास मिट्टी का खनन करने की अनुमति मांगी थी। लेकिन जांच में जब यह पकड़ में आ गया तो केस दर्ज करवाया गया।
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अब पुलिस इस कंपनी से जुड़े लोगों को तलाश रही है कि आखिर वह कौन है जिनके द्वारा ऐसा काम किया गया है। वैसे तो खनन का जो भी अवैध काम होता है उसमें तहसील से लेकर थाने के पुलिस कर्मियों को भी उनका बराबर का हिस्सा मिलता है। मगर जब मामला पकड़ में आता है तो पुलिस व तहसील प्रशासन मामले की जानकारी न होने की ही बात कहने लगता है।
इन इलाकों में होता खनन
शहर के बड़ेल, सफेदाबाद, पल्हरी, सफदरगंज, जैदपुर से लेकर सतरिख व देवा इलाके मेें लखनऊ से सटे क्षेत्र में जमकर मिट्टी का अवैध खनन होता है। इसी के साथ ही हैदरगढ़ व लोनीकटरा इलाके का भी यही हाल है। यह मिट्टी लखनऊ में बनने वाली बड़ी-बड़ी इमारतों में प्रयोग की जाती है और इससे खननकर्ता महंगे रुपये वसूल करते हैं। बीते दस साल में यहां जिस तरह से मिट़्टी के अवैध खनन का काम हुआ है उससे सरकार को सैकड़ों करोड़ के राजस्व का चूना लगने की बात कही जा सकती है।
जब्त हो चुकी 10स करोड़ की संपत्ति
बीते डेढ़ साल पहले तत्कालीन एसपी रहे डॉ. अरविंद चतुर्वेदी ने खनन माफिया पर शिकंजा कसते हुए करीब 10 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त कराई थी। वहीं इंस्पेक्टर से लेकर गई पुलिस कर्मियों को भी निलंबित किया गया था। जबकि विनोद यादव को जिला प्रशासन ने खनन माफिया भी घोषित कर रखा है। इसके अलावा वर्ष 2017 में तत्कालीन एसपी रहे वैभव कृष्ण ने सतरिख के कोतवाल समेत कई पुलिस कर्मियों को निलंबित भी किया था। लेकिन अब एक बार फिर यह काम तेजी से फल फूल रहा है।
मिट्टी के अवैध खनन के जो भी मामले सामने आएंगे उनमें दोषियों के खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा। पुलिस इनके खिलाफ गैंगेस्टर की कार्रवाई करने के साथ ही संपत्ति जब्तीकरण की कार्रवाई भी करेगी।
-अनुराग वत्स, एसपी
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इसी का नतीजा है कि डीएम द्वारा जारी किए जाने वाले खनन परमिट की फर्जी कॉपी बनाकर कार्य करने की अनुमति मांग ली गई। मामला पकड़ में आने के बाद लखनऊ की एक कंपनी के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। वहीं एसपी ने अवैध खनन करने वालों की संपत्ति जब्तीकरण के साथ ही उनके खिलाफ गैंगेस्टर की कार्रवाई करने की बात कही है।
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सतरिख थाने में रविवार को जिला खनन अधिकारी डॉ. दीपक की तहरीर क्लेसन इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड, पता 107 प्रथम तल, यस सिलवर हाईट अपार्टमेंट बादशाहनगर लखनऊ के खिलाफ कई संगीन धारा में केस दर्ज किया गया था। आरोप है कि इस कंपनी द्वारा फर्जी तरीके से डीएम के डिजिटल हस्ताक्षर का दुरुपयोग करते हुए बनाई गई परमिट की कॉपी को दिखाकर सराय अकबराबाद गांव के पास मिट्टी का खनन करने की अनुमति मांगी थी। लेकिन जांच में जब यह पकड़ में आ गया तो केस दर्ज करवाया गया।
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अब पुलिस इस कंपनी से जुड़े लोगों को तलाश रही है कि आखिर वह कौन है जिनके द्वारा ऐसा काम किया गया है। वैसे तो खनन का जो भी अवैध काम होता है उसमें तहसील से लेकर थाने के पुलिस कर्मियों को भी उनका बराबर का हिस्सा मिलता है। मगर जब मामला पकड़ में आता है तो पुलिस व तहसील प्रशासन मामले की जानकारी न होने की ही बात कहने लगता है।
इन इलाकों में होता खनन
शहर के बड़ेल, सफेदाबाद, पल्हरी, सफदरगंज, जैदपुर से लेकर सतरिख व देवा इलाके मेें लखनऊ से सटे क्षेत्र में जमकर मिट्टी का अवैध खनन होता है। इसी के साथ ही हैदरगढ़ व लोनीकटरा इलाके का भी यही हाल है। यह मिट्टी लखनऊ में बनने वाली बड़ी-बड़ी इमारतों में प्रयोग की जाती है और इससे खननकर्ता महंगे रुपये वसूल करते हैं। बीते दस साल में यहां जिस तरह से मिट़्टी के अवैध खनन का काम हुआ है उससे सरकार को सैकड़ों करोड़ के राजस्व का चूना लगने की बात कही जा सकती है।
जब्त हो चुकी 10स करोड़ की संपत्ति
बीते डेढ़ साल पहले तत्कालीन एसपी रहे डॉ. अरविंद चतुर्वेदी ने खनन माफिया पर शिकंजा कसते हुए करीब 10 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त कराई थी। वहीं इंस्पेक्टर से लेकर गई पुलिस कर्मियों को भी निलंबित किया गया था। जबकि विनोद यादव को जिला प्रशासन ने खनन माफिया भी घोषित कर रखा है। इसके अलावा वर्ष 2017 में तत्कालीन एसपी रहे वैभव कृष्ण ने सतरिख के कोतवाल समेत कई पुलिस कर्मियों को निलंबित भी किया था। लेकिन अब एक बार फिर यह काम तेजी से फल फूल रहा है।
मिट्टी के अवैध खनन के जो भी मामले सामने आएंगे उनमें दोषियों के खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा। पुलिस इनके खिलाफ गैंगेस्टर की कार्रवाई करने के साथ ही संपत्ति जब्तीकरण की कार्रवाई भी करेगी।
-अनुराग वत्स, एसपी