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Barabanki News: चिप संकट में फंसे 4874 लोगों के डीएल
Fri, 05 May 2023 10:02 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Fri, 05 May 2023 10:02 PM IST
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- पायलट प्रोजेक्ट वाले जिले में ही हो रही परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
बाराबंकी। स्मार्ट चिप का संकट अभी खत्म नहीं हुआ है। पायलट प्रोजेक्ट वाले जिले में ही लोगों को परेशानी हो रही है। चिप के अभाव के कारण जिले के करीब 4874 स्मार्ट ड्राइविंग लाइसेंस अधर में लटके हैं। आवेदकों की परेशानी इसलिए बढ़ गई है क्योंकि चेकिंग के दौरान पुलिस भारी भरकम जुर्माना लगा रही है।
प्रदेश में ऑनलाइन आवेदन के माध्यम से ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की प्रकिया पायलट प्रोजेक्ट के तहत चार साल पहले बाराबंकी के एआरटीओ से शुरू हुई थी। यहां यह प्रयोग सफल होने के बाद पूरे प्रदेश में लागू किया गया। पायलट प्रोजेक्ट वाले जिले में भी आवेदकों को डीएल नहीं मिल पा रहा है। ड्राइविंग लाइसेंस के आवेदन के बाद आवेदक को निर्धारित तारीख पर एआरटीओ कार्यालय बुलाकर ऑनलाइन फोटो खींची जाती है और कागजी कार्रवाई पूरी की जाती है। ड्राइविंग का टेस्ट लेने के बाद पास हुए आवेदकों का लाइसेंस बनने के लिए एआरटीओ ऑफिस से संस्तुति कर दी जाती है जिसके बाद स्मार्ट ड्राइविंग लाइसेंस लखनऊ से बनकर डाक से आवेदक के पास पहुंचते हैं। स्मार्ट चिप की कमी के चलते टेस्टिंग में पास होने व सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी आवेदकों के डीएल निर्गत नहीं हो पा रहे हैं। फरवरी से अब तक 4874 आवेदकों को ड्राइविंग लाइसेंस नहीं मिल सका है।
वर्जन-
स्मार्ट ड्राइविंग लाइसेंस के जो भी आवेदन आए उनकी विभागीय प्रकिया पूरी करने के बाद संस्तुति भेजी जा चुकी है। एआरटीओ कार्यालय में इसे लेकर कोई बाधा नहीं है। लखनऊ में चिप की कमी होने के कारण लाइसेंस निर्गत नहीं हो पा रहे हैं।
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- अंकिता शुक्ला, एआरटीओ, प्रशासन
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संवाद न्यूज एजेंसी
बाराबंकी। स्मार्ट चिप का संकट अभी खत्म नहीं हुआ है। पायलट प्रोजेक्ट वाले जिले में ही लोगों को परेशानी हो रही है। चिप के अभाव के कारण जिले के करीब 4874 स्मार्ट ड्राइविंग लाइसेंस अधर में लटके हैं। आवेदकों की परेशानी इसलिए बढ़ गई है क्योंकि चेकिंग के दौरान पुलिस भारी भरकम जुर्माना लगा रही है।
प्रदेश में ऑनलाइन आवेदन के माध्यम से ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की प्रकिया पायलट प्रोजेक्ट के तहत चार साल पहले बाराबंकी के एआरटीओ से शुरू हुई थी। यहां यह प्रयोग सफल होने के बाद पूरे प्रदेश में लागू किया गया। पायलट प्रोजेक्ट वाले जिले में भी आवेदकों को डीएल नहीं मिल पा रहा है। ड्राइविंग लाइसेंस के आवेदन के बाद आवेदक को निर्धारित तारीख पर एआरटीओ कार्यालय बुलाकर ऑनलाइन फोटो खींची जाती है और कागजी कार्रवाई पूरी की जाती है। ड्राइविंग का टेस्ट लेने के बाद पास हुए आवेदकों का लाइसेंस बनने के लिए एआरटीओ ऑफिस से संस्तुति कर दी जाती है जिसके बाद स्मार्ट ड्राइविंग लाइसेंस लखनऊ से बनकर डाक से आवेदक के पास पहुंचते हैं। स्मार्ट चिप की कमी के चलते टेस्टिंग में पास होने व सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी आवेदकों के डीएल निर्गत नहीं हो पा रहे हैं। फरवरी से अब तक 4874 आवेदकों को ड्राइविंग लाइसेंस नहीं मिल सका है।
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वर्जन-
स्मार्ट ड्राइविंग लाइसेंस के जो भी आवेदन आए उनकी विभागीय प्रकिया पूरी करने के बाद संस्तुति भेजी जा चुकी है। एआरटीओ कार्यालय में इसे लेकर कोई बाधा नहीं है। लखनऊ में चिप की कमी होने के कारण लाइसेंस निर्गत नहीं हो पा रहे हैं।
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- अंकिता शुक्ला, एआरटीओ, प्रशासन