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दूसरे वृहद गो-संरक्षण केंद्र भेजे जाएंगे मवेशी
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बाराबंकी। पशुपालन विभाग के नोडल अधिकारी द्वारा बनीकोडर ब्लॉक के एक गो-आश्रय स्थल पर किए गए निरीक्षण में मिली अव्यवस्थाओं के बाद यहां संरक्षित मवेशियों को अब दूसरे वृहद गो-संरक्षण केंद्र पर भेजा जाएगा। वहीं एक अन्य गो-आश्रय स्थल पर अत्यधिक जलभराव रहने की दशा में वहां का सुदृढ़ीकरण कराने की रिपोर्ट प्रशासन को भेजी है।
शासन ने जिलों के सभी गो-आश्रय स्थलों के साथ वहां संरक्षित मवेशियों को दी जाने वाले सुविधाओं की वास्तविक स्थिति देखकर सुधार के निर्देश दिए थे। इसके लिए पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर लखनऊ डॉ. एसएन प्रसाद को नोडल अधिकारी के रूप में यहां भेजा गया है। उन्होंने दो, तीन और चार सितंबर को जिले के आठ गो-आश्रय स्थलों का निरीक्षण किया गया। इसके बाद वहां मिली कमियों की एक रिपोर्ट तैयार कर पशुपालन विभाग और जिला प्रशासन को भेजी है।
उन्होंने बनीकोडर ब्लॉक के ग्राम सरवन टिकरा में बने गो-आश्रय स्थल का दौरा किया तो वहां की भौगोलिक स्थिति सही नहीं मिली। इस पर उन्होंने यहां के संरक्षित मवेशियों को वृहद गो-संरक्षण केंद्र कंधईपुर बनपुरवा में स्थानांतरित करने की बात कही है।
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उधर, देवा ब्लॉक का गो-आश्रय स्थल खजूर गांव अत्यधिक नीचे बना है जिससे आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। नोडल अधिकारी ने इस गो-आश्रय स्थल का सुदृढ़ीकरण कराने या फिर यहां के संरक्षित मवेशियों को दूसरे वृहद गो-संरक्षण केंद्र में स्थानांतरित करने की बात कही है।
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शासन ने जिलों के सभी गो-आश्रय स्थलों के साथ वहां संरक्षित मवेशियों को दी जाने वाले सुविधाओं की वास्तविक स्थिति देखकर सुधार के निर्देश दिए थे। इसके लिए पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर लखनऊ डॉ. एसएन प्रसाद को नोडल अधिकारी के रूप में यहां भेजा गया है। उन्होंने दो, तीन और चार सितंबर को जिले के आठ गो-आश्रय स्थलों का निरीक्षण किया गया। इसके बाद वहां मिली कमियों की एक रिपोर्ट तैयार कर पशुपालन विभाग और जिला प्रशासन को भेजी है।
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उन्होंने बनीकोडर ब्लॉक के ग्राम सरवन टिकरा में बने गो-आश्रय स्थल का दौरा किया तो वहां की भौगोलिक स्थिति सही नहीं मिली। इस पर उन्होंने यहां के संरक्षित मवेशियों को वृहद गो-संरक्षण केंद्र कंधईपुर बनपुरवा में स्थानांतरित करने की बात कही है।
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उधर, देवा ब्लॉक का गो-आश्रय स्थल खजूर गांव अत्यधिक नीचे बना है जिससे आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। नोडल अधिकारी ने इस गो-आश्रय स्थल का सुदृढ़ीकरण कराने या फिर यहां के संरक्षित मवेशियों को दूसरे वृहद गो-संरक्षण केंद्र में स्थानांतरित करने की बात कही है।