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Barabanki News: अरहर की खेती का रकबा घटा, बढ़ाने की तैयारी
Mon, 10 Feb 2025 01:28 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Mon, 10 Feb 2025 01:28 AM IST
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रामनगर क्षेत्र स्थित कृषि विभाग केंद्र पर लहलहाती अरहर की फसल। संवाद
बाराबंकी। एक समय था जब जिले भर में अरहर की खेती हुआ करती थी लेकिन आज विभाग के आंकड़ों से अरहर का रकबा ही नदारद हो गया है। इससे विभाग की चिंता बढ़ी है और अरहर का रकबा बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही किसानों को जागरूक भी किया जा रहा है जिससे वे चना, मटर और मसूर के साथ अरहर की खेती भी करें।
जिले की शान रही अरहर की खेती अब खत्म होने के कगार पर है। विभाग के अनुसार जिले में अरहर की खेती कभी 25 हजार हेक्टेयर में होती थी लेकिन आज कितने हेक्टेयर में हो रही है, इसका कोई आंकड़ा विभाग के पास नहीं है जबकि 825 हेक्टेयर में चना, 4337 हेक्टेयर में मटर और 16918 हेक्टेयर में मसूर की खेती किसानों ने की है।
अरहर की खेती का कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। किसान भी अरहर की जगह मेंथा, आलू और खरबूजा व टमाटर आदि की खेती पर ज्यादा ध्यान देते हैं क्योंकि ये फसलें कम लागत में अधिक पैदावार और बेहतर मुनाफा देती हैं। इसी वजह से किसान अब अरहर की खेती करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
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इसके अलावा किसान धान और गेहूं के साथ गन्ने की खेती शुरू से ही करते चले आ रहे हैं जिसे वह आज भी कर रहे हैं लेकिन अब विभाग ने भी इस ओर ध्यान देना शुरू कर दिया है।
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जिले की शान रही अरहर की खेती अब खत्म होने के कगार पर है। विभाग के अनुसार जिले में अरहर की खेती कभी 25 हजार हेक्टेयर में होती थी लेकिन आज कितने हेक्टेयर में हो रही है, इसका कोई आंकड़ा विभाग के पास नहीं है जबकि 825 हेक्टेयर में चना, 4337 हेक्टेयर में मटर और 16918 हेक्टेयर में मसूर की खेती किसानों ने की है।
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अरहर की खेती का कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। किसान भी अरहर की जगह मेंथा, आलू और खरबूजा व टमाटर आदि की खेती पर ज्यादा ध्यान देते हैं क्योंकि ये फसलें कम लागत में अधिक पैदावार और बेहतर मुनाफा देती हैं। इसी वजह से किसान अब अरहर की खेती करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
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इसके अलावा किसान धान और गेहूं के साथ गन्ने की खेती शुरू से ही करते चले आ रहे हैं जिसे वह आज भी कर रहे हैं लेकिन अब विभाग ने भी इस ओर ध्यान देना शुरू कर दिया है।