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मायूस वापस लौटी शिवभक्तों की टोली

Thu, 12 Jul 2018 10:34 PM IST
Amarujala Bureau
Amarujala Bureau Updated Thu, 12 Jul 2018 10:34 PM IST
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भोले बाबा के दर्शन को लेकर पहाड़ों जैसी समस्या हो, चाहे कठिनाइयां। सब पार कर सिर्फ बाबा बर्फानी के दर्शन की आस लिए कई दिनों तक संघर्ष करने वाले शिवभक्तों की टोली मायूस लौट आई। शायद इस बार बाबा को दर्शन देना मंजूर नहीं, क्योंकि इनमें से कई भक्त ऐसे हैं जो प्रतिवर्ष भोले बाबा के दर्शन के लिए जाते हैं। भक्तों की जुबानी उनकी यात्रा की कहानी- 

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कठिन यात्रा तय करने के बाद भी दर्शन नहीं होने से अमरनाथ यात्रियों का दर्द छलक उठा। शिवभक्तों की टोली के डॉ. सोमेंद्र वर्मा बताते हैं कि अमरनाथ यात्रा में कई अड़चने पहले से ही मौजूद थी। सबसे बड़ी अड़चन  खराब मौसम रहा। बारिश व भूस्खलन और ग्लेशियर के टूटने से रास्ता बंद होने की बाधा थी। अमरनाथ यात्रा के लिए 27 जून को जिले से 35 यात्रियों का जत्था रवाना हुआ। 
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घनश्याम बताते हैं कि यात्रा 2 जुलाई को कश्मीर के पहलगाम पहुंची इसके बाद शेषनाग से आगे गणेश टॉप तक पहुंचे। लेकिन  स्लाइडिंग होने के चलते यात्रा रोकनी पड़ी। चंदनबाड़ी से लेकर पिस्पूटाप तक कठिन चढ़ाई चढ़ने के बाद भारी बारिश शुरू हो गई, लेकिन बाबा के भक्तों का हौसला डिगा नहीं और सभी यात्री शेषनाग पहुंचे। अधिक बारिश के चलते यात्रियों ने टेंट में शरण ली। दूसरे दिन जब यात्री गणेश टाप पहुंचे तो सेना के जवानों ने रोक लिया। बताया कि भूस्खलन से रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है। खराब मौसम के बावजूद हौसला बुलंद रहा। लेकिन रात टेंट में बिताने के बाद अमरनाथ श्राइन बोर्ड द्वारा तीन दिन के लिए रास्ता बंद होने की घोषणा कर दी गई।
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इस पर भी कई भक्त बाबा के दर्शन के लिए अड़े रहे और वहीं रुक गए। अंतत: खराब मौसम व बारिश ने यात्रा में खलल डाल दिया और यात्रा रोकनी पड़ी। बारिश के चलते कठिन रास्तों पर घोड़े जो लंगर (भंडारा) का सामान ले जाते थे, वह भी नहीं पहुंच पा रहे थे। इसके चलते यात्रियों को खिलाने के लिए कुछ भी नहीं बचा था। एक बोतल पानी की कीमत 60 से 80 रुपये तक चुकाना पड़ा। तीसरे दिन पंचतरड़ी के आगे फंसे यात्रियों के उडन खटोले से नीचे लाया गया। अमरनाथ यात्रा में जिले से सुरजीत, गोलू, डॉ. सोमेंद्र वर्मा, डॉ. जमुना प्रसाद, सतगुरु, हरिशंकर, प्रदीप कुमार, हिमांशु, पवन, पंकज, घनश्याम, विवेक, कमलेश शर्मा आदि शामिल रहे।

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